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सिकनी कोलियरी में महीनों से चल रहा है डिस्पैच का काला धंधा

डीओ होल्डर्स और प्रबंधन की मिलीभगत से हो रहा है हेराफेरी  Sunil Kumar Latehar : झारखंड राज्य खनिज विकास निगम द्वारा संचालित सिकनी कोलियरी में पिछले कई महीने से आरओएम कोयले की जगह स्टीम कोयला की लोडिंग का खेल जारी है. बताया जाता है कि सिकनी कोल प्रबंधन की मिलीभगत से प्रतिदिन लोडिंग में 20-25 गाड़ियों में आरओएम कोयला की जगह स्टीम कोयला लाद कर भेजा जा रहा है. कीमत आरओएम कोयला की और लदाई स्टीम कोयला की हो रही है. जानकारी के अनुसार वैसे डीओ होल्डर जो प्रबंधन को खुश रखने में कामयाब होते हैं, उन्हें प्रतिदिन आरओएम कोयला की जगह स्टीम कोयला की आपूर्ति की जाती है.

क्या है दामों में अंतर

आरओएम कोयला की कीमत एवं स्टीम कोयला की कीमत में करीब-करीब चार सौ रुपये प्रति टन का अंतर है. इसी अंतर का खेल प्रतिदिन खेला जा रहा है. वर्तमान बीडिंग के अनुसार आरओएम कोयले की कीमत 2423 रुपया 21 पैसा प्रति मीट्रिक टन है, जबकि स्टीम कोयले की कीमत 2839 रुपये प्रति मीट्रिक टन है. उपरोक्त दर निगम की बेसिक दर है. निगम के अधिकारियों की मिलीभगत से प्रतिदिन 20-25 गाड़ियों में डिस्पैच किया जाता है. जिससे सरकार को भारी राजस्व का नुकसान हो रहा है. वहीं आम डीओ होल्डरों में घोर असंतोष व्याप्त है. उनका कहना है कि निगम कर्मी बड़े ही चालाकी से वैसे समय में इन ट्रकों को निकालते हैं, जब हमारे लिफ्टर वहां पर उपलब्ध नहीं होते हैं. मालूम हो कि प्रतिदिन 40 से 100 ट्रक कोयले का उत्पादन वर्तमान में सिकनी कोलियरी से किया जा रहा है. पिछले बीडिंग में आरओएम कोयले की कीमत प्रति मीट्रिक टन 1395 रुपये थी, जबकि स्टीम कोयले की कीमत 1745 रुपए प्रति मीट्रिक टन थी. बरसात के पूर्व कीमतों में भारी वृद्धि हुई है और इसी वृद्धि की आड़ में निगम कर्मियों की कमाई भी बढ़ गई है. जबकि सरकार को राजस्व की क्षति उठानी पड़ रही है. लोडिंग- अनलोडिंग के इस खेल में वैसे डीओ होल्डरों की तूती बोलती है जो प्रबंधन को खुश रखने में कामयाब होते हैं या जिनका दबदबा वहां वर्षों से कायम है. जिन डीओ होल्डरों द्वारा इसका विरोध किया जाता है उनकी गाड़ियां डिस्पैच प्वाइंट पर जाकर सप्ताह दिनों तक बिना लोड किये खड़ी रह जाती है. तरह-तरह की बहानेबाजी करके उनकी गाड़ियों को डिस्पैच सेक्शन में प्रवेश नहीं करने दिया जाता है. सिकनी में संचालित ट्रक ऑनर एसोसिएशन पहले से भी काफी बदनाम हो चुका है. यह संगठन अवैध वसूली का एक अड्डा साबित होते रहा है. प्रशासनिक कार्रवाई भी होती रही है. वर्तमान में आरओएम एवं स्टीम कोयला डिस्पैच का खेल बदस्तूर जारी है. इसे भी पढ़ें : पलायन">https://lagatar.in/officers-should-stop-migration-implement-mnrega-schemes-with-priority-chief-minister/">पलायन

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