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साजिश के तहत छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के मॉडल को झारखंड में लागू किया गया

Ranchi : राजस्व पर्षद ने झारखंड शराब की थोक और खुदरा दोनों ही बिक्री बिवरेजज कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) के माध्यम से कराने पर आपत्ति दर्ज की थी. पर्षद ने यह आपत्ति विभाग द्वारा भेजे गये दस्तावेज में वर्णित तथ्यों के आधार पर की थी. लेकिन उत्पाद विभाग ने सुनियोजित साजिश के तहत राजस्व पर्षद की आपत्तियों को नजरअंदाज कर छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के मॉडल को झारखंड में लागू किया. इससे सरकार को 448 करोड़ रुपये का नुक़सान उठाना पड़ा.
 
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  • नई नीति से सरकार को 448 करोड़ रुपये का नुक़सान उठाना पड़ा. 
  • एक करोड़ रुपये की फीस पर त्रिपाठी को सलाहकार बनाया.
  • राजस्व पर्षद की आपत्तियों को दरकिनार कर लागू की गई नई नीति.

Ranchi : राजस्व पर्षद ने झारखंड शराब की थोक और खुदरा दोनों ही बिक्री बिवरेजज कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) के माध्यम से कराने पर आपत्ति दर्ज की थी. पर्षद ने यह आपत्ति विभाग द्वारा भेजे गये दस्तावेज में वर्णित तथ्यों के आधार पर की थी. लेकिन उत्पाद विभाग ने सुनियोजित साजिश के तहत राजस्व पर्षद की आपत्तियों को नजरअंदाज कर छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के मॉडल को झारखंड में लागू किया. इससे सरकार को 448 करोड़ रुपये का नुक़सान उठाना पड़ा.

 

जानकारी के मुताबिक राज्य को शराब से मिलने वाले राजस्व में वृद्धि के लिए वर्ष 2009-10 से अब तक कई बार उत्पाद नीति में बदलाव किया गया. कोविड के बाद शराब से मिलने राजस्व में वृद्धि के नाम पर नयी उत्पाद नीति 2022 बनाने की पहल शुरू हुई. इस दौरान उत्पाद विभाग के अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ शराब सिंडिकेट के साथ साजिश रची. इसके बाद उत्पाद सचिव के आदेश से उत्पाद आयुक्त सहित अन्य अधिकारियों का एक दल छत्तीसगढ़ शराब नीति के अध्ययन के लिए गया. 

 

अध्ययन यात्रा से लौटने के बाद राज्य के तत्कालीन उत्पाद आयुक्त ने अध्ययन रिपोर्ट विभागीय सचिव को सौंपी. इस पर उत्पाद आयुक्त का हस्ताक्षर तो था लेकिन पत्रांक और दिनांक का उल्लेख नहीं था. उत्पाद आयुक्त की रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (CSMCL) द्वारा की जा रही शराब की थोक और खुदरा बिक्री और इससे मिले राजस्व का उल्लेख किया गया. इस रिपोर्ट के बाद विभाग ने CSML को सलाहकार नियुक्त कर लिया. इससे छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के किंगपिन के रूप में चिह्नित अरुणपति त्रिपाठी झारखंड शराब नीति के सलाहकार बन गये. उनकी फीस भी एक करोड़ रुपये से निर्धारित कर दी गयी.

 

सलाहकार की नियुक्ति के दूसरे ही दिन विभागीय अधिकारियों, JSBCL और सलाहकार की बैठक हुई. इसमें छत्तीसगढ़ शराब के मॉडल को लागू करने पर सरकार के राजस्व में 15% प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान बताया गया. इसके बाद CSMCL के MD अरूणपति त्रिपाठी की सलाह पर उत्पाद नीति 2022 तैयार की गयी. इसमें छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के मॉडल को पूरी तरह झारखंड में लागू करने के लिए नियम बनाया गया. इसमें छत्तीसगढ़ की तरह ही शराब की खुदरा और थौक दोनो ही प्रकार की बिक्री JSBCL के माध्यम से कराने का प्रावधान किया गया. 

 

विभाग ने उत्पाद नीति 2022 का प्रारूप तैयार कर उसे राजस्व पर्षद के पास भेजा. राजस्व पर्षद के तत्कालीन सदस्य अमरेंद्र प्रताप सिंह ने उत्पाद नीति 2022 के कई प्रावधानों पर आपत्ति जतायी. इसमें JSBCL के माध्यम से थौक और खुदरा दोनों ही तरह की बिक्री कराने पर की गई आपत्ति शामिल थी. राजस्व पर्षद सदस्य ने उत्पाद विभाग द्वारा JSBCL के माध्यम से खुदरा और थौकी बिक्री की नीति पर आपत्ति की. इसके लिए उन्होंने उत्पाद विभाग द्वारा JSBCL के माध्यम से खुदरा और थौक शराब की बिक्री कर उठा चुके नुकसान का हवाला दिया. लेकिन विभाग ने इस आपत्ति को नजरअंदाज करते हुए छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के मॉडल को झारखंड में लागू करने का फैसला लिया.

 

राजस्व पर्षद की आपत्तियां

  • - पर्षद ने सरकार को भेजी गयी रिपोर्ट में लिखा था कि झारखंड में 2009-10 से कई बार उत्पाद नीति बदली गयी. 2009-10 से तीन वित्तीय वर्ष (2009-12) तक की अवधि में लागू उत्पाद नीति में शराब की थोक और खुदरा बिक्री दोनों ही निजी हाथों में थी. इस अवधि में झारखंड को शराब से मिलने वाले राजस्व में 20% की वृद्धि दर्ज की गयी. 
  • - इसके बाद के पांच वित्तीय वर्ष (2012-17) तक शराब की थोक बिक्री JSBCL के माध्यम से की गयी. इस अवधि में शराब की खुदरा बिक्री निजी व्यक्तियों के माध्यम से की गयी. इसमें दो वित्तीय वर्ष के दौरान राजस्व में 20% की वृद्ध हुई. लेकिन तीन वित्तीय वर्ष के दौरान 4%-8% तक रही.
  • - वित्तीय वर्ष 2017-19 और 2018-19 में पहली बार थोक और खुदरा बिक्री दोनों ही JSBCL के माध्यम से की गयी. लेकिन राजस्व में वृद्धि नहीं हुई.
  • - इसके बाद सरकार ने 2019-20 में नीति में फिर बदलाव किया. इसमें JSBCL से शराब की खुदरा बिक्री वापस ले कर निजी हाथों में दे गयी. JSBCL के माध्यम से सिर्फ थोक बिक्री की गयी. इससे शराब के राजस्व मे दो गुनी की वृद्धि हुई. 
  • - एक बार नुकसान के आधार पर थोक और खुदरा बिक्री दोनों ही JSBCL से वापस लेने के बाद फिर से उसे देने पर राजस्व कैसे बढ़ेगा ?
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