झारखंड में परिमल नाथवानी की इंट्री के साथ ही राज्यसभा चुनाव-2026 का चटक हो गया है. दो सीट है और प्रत्याशी पांच. अब तक सिर्फ झामुमो व कांग्रेस ने ही बैजनाथ राम व प्रणव झा को आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है. भाजपा के गौरव बल्लभ ने भले ही पर्चा खरीद लिया है, लेकिन उन्हें भाजपा ने अब तक अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित नहीं किया है.
उद्योगपति परिमल नाथवानी व साईं विजय रेड्डी ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर पर्चा लिया है. रेड्डी ने क्यों पर्चा लिया है, यह तो वही जानें लेकिन नाथवानी के कारण चर्चा गर्म है. प्रणव झा को बाहरी बताने वाले भी नाथवानी को यह कह कर बेहतर उम्मीदवार बता रहे हैं कि वह पहले भी झारखंड से दो बार राज्यसभा पहुंच चुके हैं. उन्हें कोई बाहरी नहीं मान रहा है.
पहली बार 2008 में जब वह झारखंड आये थे, तब कई तबकों में उन्हें "थैलीशाह" कहा गया था. उनके खिलाफ मेन रोड में एक छोटा जुलूस भी निकाला गया था. इन सबके बावजूद नाथवानी ने शान से नामांकन भरा और जीत भी दर्ज की. फिर वही लोग जो जुलूस निकलवा रहे थे, उनके साथ हो लिये. बहुतों ने बहुत सारे लाभ लिये.
नाथवानी एक बार फिर से मैदान में हैं. निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में. भलें ही गौरव बल्लभ जब पर्चा लेने के बाद भाजपा कार्यालय पहुंचे तब उनके साथ कोई खड़ा नहीं हुआ हो, लेकिन अगर नाथवानी वहां वोट मांगने पहुंच जायें तो पूरी भाजपा उनके पीछे खड़ी नजर आयेगी. सारे विधायक साथ में फोटो खींचवाते, गुलदस्ता देते दिख जायेंगे.
यह स्थिति सिर्फ भाजपा में नहीं है. क्या झामुमो, क्या कांग्रेस, क्या राजद, वह जहां भी जायेंगे, बहुत सारे लोग उनके साथ दिख जायेंगे. हर कोई उनका स्वागत करने को बेताब है. हो भी क्यों नहीं, वह चार्टर्ड प्लेन से चलते हैं और उनके पीछे देश का सबसे बड़ा समूह जो खड़ा है.
इसलिए नाथवानी को निर्दलीय मानना बड़ी भूल होगी. उन्हें बाहरी कहने वाला भी कम मिलेंगे. असल में वह तो सर्वदलीय हैं. सब जगह हैं. सब पार्टी में है. सब पार्टी के हैं. और सर्वमान्य हैं. आप यह मानकर चलिये कि उनका प्लेन झारखंड में आया है, तो उनके जीत तय करने के बाद ही उड़ान भरा होगा.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.
Leave a Comment