Ranchi/Hazaribagh: हजारीबाग के केरेडारी प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत चट्टी बरियातू पंचायत के पगार गांव के किरण बिरहोर (10) की मौत के मामले में कंपनी ने सीधे तौर पर अपना पल्ला झाड़ लिया है. ज्ञात हो की बिरहोर समुदाय की बच्ची की मौत 28 फरवरी को हो गयी थी. इसके पिता बीरु बिरहोर और ग्रामीण सोहराय बिरहोर ने कहा था कि किरण माइंस से उड़ रही धूल गर्दा से बीमार पड़ गई थी. इलाज़ के लिए केरेडारी स्वास्थ केंद्र ले गए जहां उचित इलाज का व्यवस्था नहीं होने से वापस लौट गए, फिर किरण की मौत हो गई. कंपनी ने यहां 25 अप्रैल, 2022 को अपना खनन कार्य शुरू किया था. इसके साथ ही बॉक्स-कट की खुदाई भी शुरू हो गई है, जिससे जुलाई 2022 से कोयला उत्पादन शुरू किया गय़ा था
मजदूर कांग्रेस ने मृत बच्ची के पोस्टमार्टम करवाने की मांग की
राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सुरजीत नागवाला ने कहा है कि एक ओर जहां झारखंड सरकार आदिवासी और बिरहोर के हित में बहुत सारी कल्याणकारी योजनाएं चल रही हैं और उन्हें संरक्षित करने का काम कर रही है. वहीं दूसरी ओर एनटीपीसी के माइंस का जो रवैया है जिसके कारण आदिवासी और बिरहोर धीरे-धीरे काल के गाल में समाते जा रहे हैं. अगर एनटीपीसी के द्वारा बिरहोर परिवार को उचित मुआवजा और भविष्य में ऐसा ना हो इसकी ठोस कदम अगर नहीं उठाया गया तो जल्द ही इसके खिलाफ राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस एक बड़ा आंदोलन करेगी. एनटीपीसी के जो एमडीओ है रितिक माइंस जिसमें किसी भी तरह का प्रदूषण से संबंधित ना तो कोई नियम का अनुपालन होता है, ना ही माइंस कानून के आधार पर सुरक्षा नियमों का पालन नही होता है,.उन्होंने शुभम संदेश में छपी खबरों को भी मुख्यमंत्री को ट्वीट कर दी जानकारी दी है. पूरे मामले में एनटीपीसी चड्डी बरियातू कोल परियोजना के एचआर हेड मृत्युंजय से कंपनी का पक्ष लिया. शुभम संदेश के सवाल
1. एनटीपीसी के चट्टी- बरियातू कोल परियोजना के खनन स्थल के नजदीक आदिम जनजाति बिरहोर समुदाय के परिवारों को बिना सुरक्षित बसाए खनन कैसे चालू कर दिया गया ? एनटीपीसी का उत्तर: चट्टी बरियातु कोल परियोजना के उत्तरी सीमा के बाहर 34 आदिम जनजाति परिवार निवास करते है. यह क्षेत्र धुमरी कोल ब्लॉक के तहत आता है जिसे एनटीपीसी का कोई सीधा संबंध नहीं है. इसके बावजूद एनटीपीसी चट्टी बरियातु प्रबंधन जिला प्रसाशन एवं स्थानीय ग्रामीण प्रतिनिधियों से परामर्श के बाद एनटीपीसी की आर एंड आर कॉलोनी बरकागांव मे बसाने की कारवाई की. लेकिन आदिम जनजातियों ने मांग की उन्हें वर्तमान स्थल के आसपास बसाया जाय. इसके बाद कंपनी ने जिला प्रसाशन एवं अंचल अधिकारी केरेडारी और वन विभाग के अधिकारी केरेडारी से वौसे वन भूमि जहाँ की ज़्यादा पेड़ पौधे नहीं है को चिन्हित किया गया बसाने के लिए, जिसे उक्त परिवारों ने भी स्वीकार किया. इसके उपरांत इन परिवारों को वन अधिकार पट्टा दिलाने हेतु प्रबंधन द्वारा करवाई शुरू की गयी. परन्तु रेंजर बरकागांव द्वारा यह प्रस्थाव अस्वीकार कर दिया गया. इसके हाद उनको पुनः वन अधिकार पट्टा के लिए रेंजर बरकागांव को प्रस्ताव भेजा है. सवाल 2. चट्टी बरियातू परियोजना अंतर्गत आपके एमडीओ ने छोटकी नदी में ओबी डंप कर दिया गया,नदी के प्रवाह को बंद कर दिया गया ..इस पर आप क्या कहेगे.? उतर- सरकार द्वारा प्रदान कि गई मंजूरी और स्वीकृति के अनुसार परियोजना में खनन का कार्य किया जा रहा है, यह कथन कि चट्टी बरियातू परियोजना अंतर्गत आपके एमडीओ ने छोटकी नदी में ओबी डंप कर दिया गया, नदी के प्रवाह को बंद कर दिया गया यह सरासर गलत है. सवाल 3. एनटीपीसी के चट्टी-बरियातू कोल परियोजना अंतर्गत विस्थापितों को बिना पुर्नवास के घनी आबादी के बीच खनन और ट्रांसपोर्टेशन कैसे चलाया जा रहा है ? चट्टी कंपनी विस्थापितों का पुनर्वास भारत सरकार एवं झारखण्ड सरकार द्वारा स्वीकृत पुनर्वास एवं पुनःस्थापना निति के अंतर्गत काम कर रही है. ट्रांसपोर्टेशन भी कोयला मंत्रालय भारत सरकार एवं जिला प्रसाशन द्वारा तय मानको के तहत किया जा रहा है. 4. क्या कंपनी के एमडीओ नियम-शर्तों का पालन किए वगैर काम कर रहा है उन्हे यह कैसे करने दिया जा रहा है ? उत्तर :- एमडीओ द्वारा नियम-शर्तों का पालन करते हुए ही खनन का कार्य किया जा रहा. शुभम संदेश ने एनटीपीसी प्रबंधन से 4 सवाल पूछे, एक भी सवाल का नहीं मिला स्पष्ट जवाब
बता दें कि शुभम संदेश ने एनटीपीसी से पहला सवाल यह पूछा था कि उसकी चट्टी- बरियातू कोल परियोजना के खनन स्थल के नजदीक आदिम जनजाति बिरहोर प्रजाति के परिवारों को बिना सुरक्षित बसाये खनन कैसे चालू कर दिया गया ? जिसके जवाब में एनटीपीसी ने खनन चालू करने के बाद क्या-क्या उपाय किये जा रहे हैं, उसका विवरण बताया है. जबकि भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार उसे सारी प्रक्रिया खनन के पहले करना था. इसके बाद दूसरा सवाल यह था कि चट्टी बरियातू परियोजना अंतर्गत छोटकी नदी में ओबी डंप कर दिया गया, नदी के प्रवाह को बंद कर दिया गया. जिसके जवाब में एनटीपीसी ने राज्य सरकार और भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार खनन किये जाने की बात कही. लेकिन भारत सरकार और राज्य सरकार ने नदियों-जलस्रोतों के बारे में क्या निर्देश था, उसका विवरण नहीं बताया और छोटकी नदी के प्रवाह को बंद करने और ओबी डंप किये जाने से स्पष्ट इनकार कर दिया. जबकि शुभम संदेश ने छोटकी नदी में ओबी डंप गिराये जाने का खबर फोटो सहित प्रकाशित किया था और शुभम संदेश के पास इस बात के पुख्ता प्रमाण हैं कि एमडीओ द्वारा नदी में ओबी डंप किया गया और आज भी अपने खबर पर कायम है. तीसरा सवाल यह था कि एनटीपीसी के चट्टी-बरियातू कोल परियोजना अंतर्गत विस्थापितों को बिना पुर्नवास के घनी आबादी के बीच खनन और ट्रांसपोर्टेशन कैसे चलाया जा रहा है ? जिसके जवाब में भी इसमें भारत सरकार और राज्य सरकार के निर्देशों के आलोक में किया जाना बताया लेकिन क्या गाइडलाइन था यह नहीं बताया. चौथा और महत्वपूर्ण सवाल यह था कि कंपनी को नियम-शर्तों का पालन किए वगैर काम कैसे करने दिया जा रहा है ? कंपनी नियम-शर्तों को पूरा किए वगैर यह क्यों कहा जाता है कि कंपनी उसे पूरा कर रही है..? नियम-शर्तों को पूरा किए वगैर काम क्यों होने दिया जा रहा है ? इसका भी जवाब उसके द्वारा स्पष्ट नहीं दिया गया. [wpse_comments_template]
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