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झूठे मुकदमे में फंसा कर रैयतों की आवाज को दबाना चाहती है कंपनी : अंबा प्रसाद

Keredari : हजारीबाग के केरेडारी स्थित चट्टी बारियातू से छह रैयत बेल पर जेल से निकल आए हैं. ग्रामीणों व अन्य रैयतों ने उनका जोरदार स्वागत किया. मौके पर मौजूद स्थानीय विधायक अंबा प्रसाद ने कहा कि कोल कंपनी झूठे मुकदमे में फंसाकर रैयतों की आवाज को दबाकर चाह रही है. विधायक अंबा प्रसाद ने कहा कि वह और उनका पूरा परिवार बड़कागांव विधानसभा वासियों के लिए समर्पित है. शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर रहे लोगों पर कंपनी प्रबंधन ने फर्जी मुकदमा दर्ज किया एवं आनन-फानन में जेल भेज दिया. कंपनी प्रबंधन की शुरू से ही फर्जी मुकदमे दर्ज कर रैयतों की आवाज को कुचलने की नीति रही है. कंपनी प्रबंधन बगैर मुआवजा एवं अन्य सुविधाएं दिए सिर्फ जमीन लेकर अपना हित साधने का प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि रैयतों को न्यायालय से भी तुरंत बेल मिलना इस बात का द्योतक है कि शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे लोगों पर झूठे एवं बेबुनियाद मामले दर्ज किए थे. इसे भी पढ़ें : सीएम">https://lagatar.in/cms-principal-secretary-rajeev-arun-ekka-accused-of-going-to-vishal-chowdharys-house-to-settle-the-file-bjp-released-video/">सीएम

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हक और अधिकार के लिए फिर से आवाज उठाएंगे रैयत

दरअसल चट्टी बारियातू कोल खनन परियोजना व एलएंडटी कंपनी प्रबंधन की ओर से केरेडारी थाने में दर्ज किए गए कांड के तहत छह विस्थापित आंदोलनकारियों को विगत दिनों न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. शनिवार को न्यायालय से उन सभी विस्थापितों को बेल मिल गई. उसके बाद जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा जेल में बंद उमेश साव, राजा मियां, मोहम्मद मुर्तुजा, मोहम्मद मकसूद, मोहम्मद कलाम एवं मोहम्मद इमरोज को कागजी प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद रविवार को बेल दे दी गई. स्थानीय विधायक अंबा प्रसाद खुद जेपी कारागार हजारीबाग पहुंचकर सभी का फूल माला पहनाकर स्वागत किया और मिठाई खिलाईं. जेल से निकलने पर विस्थापितों एवं उनके परिजनों ने विधायक अंबा प्रसाद के प्रति आभार व्यक्त किया. विस्थापितों ने अपने हक व अधिकार के लिए फिर से आवाज उठाने के लिए कमर कस ली है. अंबा प्रसाद ने भी उनका हौसला बढ़ाया. जेल से निकलने पर विस्थापितों ने कहा कि पुलिस एवं कंपनी प्रबंधन के सहयोग से देर रात्रि बगैर किसी प्रकार का नोटिस दिए, उन्हें जेल भेज दिया एवं अपराधियों की तरह व्यवहार किया. उनलोगों का कहना था कि वे लोग सिर्फ शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे. कई लोगों ने बताया कि पुलिस-प्रशासन की ओर से उन्हें एकाएक देर रात्रि घर से उठा लिया गया. जेल से बाहर निकले लोगों ने यह भी कहा कि क्षेत्र के कई लोग कंपनी के दलाल बन गए हैं. इनमें कई पंचायत प्रतिनिधि व स्थानीय जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं. परंतु रैयतों के हक एवं अधिकार के लिए सिर्फ स्थानीय विधायक अंबा प्रसाद एवं उनके परिजनों ने आवाज उठाई. उन्होंने जेल से निकलने का श्रेय स्थानीय विधायक को दिया. इसे भी पढ़ें : होली">https://lagatar.in/hooliganism-will-have-to-be-heavy-in-holi-deployment-about-5000-additional-forces-across-jharkhand/">होली

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