Rajneesh Prasad Ranchi: लुगुबुरु घांटाबाड़ी धोरोमगाढ़ आदिवासियों के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों मे से एक है. लुगुबुरु बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड के ललपनिया में स्थित है. लगभग 6 किमी. की लम्बाई में फैले इस पहाड़ का इतिहास कई कहानियों से भरा है. इसकी सुंदरता, सिता नाला(छरछरिया) का गिरता पानी काफी मनमोहक है. सिता नाला का पानी लगभग 35 से 40 फीट की ऊंचाई से गिरता है. इसके बड़े बड़े चट्टानों में आदि काल की स्मृतियां आज भी मौजूद हैं. इस पहाड़ की गुफाएं रहस्यों से भरा है. पहाड़ को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि मानो प्रकृति की सुंदरता लुगु पहाड़ पर उमड़ पड़ा है. इसे भी पढ़ें-
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: मौसम की बेरुखी से किसान परेशान, मक्का और सब्जी की फसल को नुकसान गुफा है लुगु बाबा का आंगन
लुगुबूरु संस्थान ने सचिव लोबिन मांझी का कहना है कि हजारों वर्ष पूर्व लगभग 12 वर्षों के विचार विमर्श के बाद लुगू बुरु के अध्यक्षता में संतालियों के जन्म से लेकर मृत्यु तक के नियम को बनाया गया था. लुगू बुरु के जिस स्थान पर बैठकर संविधान की रचना हुई थी ,उसे दरबार दौरा कहा जाता है. सिता नाला के सामने एक गुफा है जिसे वहां के लोग लुगु बाबा का आंगन कहते है. इसे भी पढ़ें-
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गुगुबुरु घांटाबाढ़ी धोरोमगाढ़ में कार्तिक पूर्णिमा के दिन हर साल मेले का आयोजन किया जाता है. मेले में भारत ही नहीं बल्कि भारत के बाहर से भी लोग आते हैं. इनकी यात्रा सिता नाला से शुरु होती है. जो सात पहाड़ों को पार कर के लुगुबाबा की गुफा तक पहुचते हैं. गुफा के अंदर स्थित लुगुबाबा के दर्शन के लिए श्रद्धालुअंदर जाते हैं. बच्चे, बूढे सभी पैदल ही वहां जाते हैं. जाने का कोई अन्य साधन मौजूद नहीं है. बिना साधन के भी श्रद्धालु काफी उत्साह के साथ पहाड़ों पर चढ़ते हैं. लुगु पहाड़ पर आदिवासियों के साथ-साथ अलग-अलग जातियों के लोग भी पहुंचते हैं. लुगु पहाड़ में कई देवी-देवताओं की पूजा होती है, जैसे मरांगबुरु, लुगुदुर लुगुआयो की पूजा की जाती है. लोग यहां पर मन्नतें मांगते हैं. [wpse_comments_template]
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