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कोरोना महामारी भी नहीं बदल सकी दुर्गा पूजा में राजघराने से चली आ रही परंपरा

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Chakradharpur : कोरोना जैसी वैश्विक महामारी भी राजघरानों से चली आ रही परंपरा को बदल नहीं सकी. प्रशासन की रोक के बावजूद वर्ष 2020 में भक्तों ने वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वाह किया, सैकड़ों जलती मशालों के साथ आदि शक्ति मां दुर्गा की प्रतिमा को कंधों पर बैठा कर शहर की परिक्रमा करते हुए विसर्जन कराया गया. सिंहभूम में मां दुर्गा की आराधना और पूजा का इतिहास सदियों पुराना है. सबसे आकर्षक और ऐतिहासिक पूजा चक्रधरपुर की पुरानाबस्ती की श्रीश्री आदि पूजा समिति की मूर्ति विसर्जन की परंपरा है. यहां पर करीबन पांच टन की प्रतिमा को 120 लोगों द्वारा कंधों में ढोकर विसर्जन करते हैं. जहां पर प्रतिमा की ऊचांई 10 से 12 फीट रहती है. आदि दुर्गा पूजा समिति का विसर्जन जुलूस अपने आप में अनोखा है, जिसे देखने के लिए दूर दराज के हजारों लोग विजयादशमी में पहुंचते हैं. [caption id="attachment_169555" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2021/10/durga-1-300x225.jpg"

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मां दुर्गा की प्रतीक है मशाल जुलूस

मशाल जुलूस महाशक्तिमयी मां दुर्गा की प्रतीक है. यह परंपरा आज भी अनवरत जारी है. इसमें लोग प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन की झलक भी देखते हैं. औपचारिक रुप से सन 1912 में नगर की जनता को पूजा अर्चना का भार सौंपे जाने के काफी पहले राजघराने की स्थापना के लगभग आठ सौ वर्ष पूर्व से ही यहां आदि शक्ति के रुप मां दुर्गा की पूजा विधिपूर्वक की जा रही है. वर्तमान में चक्रधरपुर शहर के पुरानाबस्ती स्थित गुंडिचा मंदिर में आयोजित जाती है.

यह है इतिहास.....

1857 ई में अंग्रेज सरकार के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल संपूर्ण देश भर की भांति पोड़ाहाट क्षेत्र में भी उठा था. उस समय पोड़ाहाट नरेश महाराजा अर्जुन सिंह इस क्षेत्र में स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे. उस दौरान अंग्रेजों के साथ संघर्ष कर रहे प्रथम स्वतंत्रता सेनानी जग्गू दीवान समेत अन्य 42 लोगों को अंग्रेजों ने पकड़ कर फांसी दे दी थी. इस बीच महाराजा अर्जुन सिंह कई महीनों से भूमिगत हो गये थे. अंग्रेजों से संघर्ष के दौरान ही दुर्गा पूजा आ गयी. अंग्रेजों को मालूम था कि महाराजा अर्जुन सिंह राजमहल जरूर आएंगे.अंग्रेजों ने राजमहल को नाकेबंदी कर रखी थी. इसकी जानकारी उनके शुभचिंतकों और जनता को हो गयी. विजयादशमी के दिन अचानक असंख्य लोग मशालों और हथियारों के साथ जनता राजमहल पहुंच गये. उसी बीच महाराज अर्जुन सिंह अंग्रेजों को चकमा देकर पुनः भूमिगत हो गये. उसी परंपरा का आज भी चक्रधरपुर में मां दुर्गा पूजा के विसर्जन के दिन निर्वाह होता है. [wpse_comments_template]

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