
श्रीनिवास
कर्नल सोफिया कुरैशी पर अभद्र टिपण्णी करने वाले मंत्री पर केस नहीं चलेगा! मध्य प्रदेश सरकार एक महिला फौजी अफसर कर्नल सोफिया कुरैशी को ‘आतंकवादियों की बहन' बताने अपने मंत्री विजय शाह को बचाने में लगी हुई है.
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी को सेना की ओर से ब्रीफिंग करते देखना एक सुखद आश्चर्य था! यह सेना की और भारत की सेकुलर परंपरा के भी अनुरूप था! पर किसी का नाम ‘सोफिया’ कुछ लोगों के लिए खास अर्थ रखता है!
प्रकरण संक्षेप में
11 मई 2025 को इंदौर के महू (रायकुंडा गांव) में एक कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के जनजातीय मंत्री कुंवर विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर कहा- 'जिन्होंने हमारी बेटियों को विधवा किया, उन्हें मोदी जी ने उनकी ही बिरादरी की बहन भेज कर सबक सिखाया.'
उनके बयान का वीडियो वायरल हुआ. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर 14 मई को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया. मानपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई- धारा 152, 196(1)(b), 197(1)(c) BNS में.
उसके बाद विजय शाह ने जुबानी माफी मांग ली. मामला सुप्रीम कोर्ट गया, सुप्रीम कोर्ट ने भी फटकार लगाई, उनकी माफी को 'घड़ियाली आंसू' कहा और जांच के लिए तीन आईपीएस अधिकारियों की 'एसआईटी' गठित कर दी.
मगर मध्य प्रदेश सरकार ने केस चलाने की मंजूरी नहीं दी. 25 अगस्त 2026 को प्रदेश मंत्रिमंडल ने 45 मिनट चर्चा के बाद कहा कि श्री शाह कई बार माफी मांग चुके हैं. यानी अब उनके खिलाफ केस चलाना जरूरी नहीं है! फाइल अब राज्यपाल मंगुभाई पटेल के पास गई है. 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई है.
लेकिन अब एक नया ट्विस्ट आ गया है. 27 अगस्त 2026 की खबर है कि पूर्व आईएफएस अधिकारी और 'सिस्टम परिवर्तन अभियान' के अध्यक्ष आजाद सिंह डबास ने इस बारे में राज्यपाल को पत्र लिखा है. उन्होंने मांग की है कि विजय शाह को तुरंत बर्खास्त कर गिरफ्तार किया जाए. उन पर भ्रष्टाचार के आरोपों की भी जांच हो, दो बार वन मंत्री रहते हुए तबादलों और विश्राम गृहों में कब्जे का आरोप लगा है. खबरों के उन्होंने यह भी कहा है कि विजय शाह के भ्रष्टाचार को उन्होंने प्रत्यक्ष देखा है.
प्रसंगवश, कर्नल सोफिया कुरैशी के संदर्भ में अशोका विश्वविद्यालय (हरियाणा) के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद ने ट्विटर पर एक सामान्य (जो बहुतों को ‘आपत्तिजनक’ लगी) टिप्पणी कर दी थी. हरियाणा महिला आयोग की अध्यक्ष ने उनके खिलाफ केस कर दिया. गिरफ्तारी हुई. जेल जाना पड़ा. मुश्किल से जान छूटी.
प्रकरण संक्षेप में
मई 2025 में उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की प्रेस ब्रीफिंग करने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह पर फेसबुक/इंस्टा पोस्ट लिखी थी. लिखा था- ‘सोफिया कुरैशी की तारीफ होते देख खुशी हो रही है, पर जो लोग अब उनकी तारीफ कर रहे हैं, उन्हें मॉब लिंचिंग, बुलडोजर कार्रवाई पर भी मुसलमानों के लिए आवाज उठानी चाहिए. सरकार ने दो महिला अफसरों को सामने करके अच्छा ऑप्टिक्स बनाया है, पर इसे हकीकत में भी बदलना चाहिए वरना ये पाखंड होगा.’
केंद्र सरकार और भाजपा पर इस तरह के आरोप विपक्षी दल लगाते ही हैं, मगर ‘अली खान महमूदाबाद’ का टिप्पणी करना ‘सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाना’ हो गया! उनके खिलाफ दो आफ एफआईआर दर्ज हो गये! एक गांव जठेड़ी के सरपंच की शिकायत पर धारा 196, 152, 299 (बीएनएस) के तहत.
दूसरी हरियाणा महिला आयोग अध्यक्ष रेणु भाटिया की शिकायत पर. उन्होंने कहा ये महिला सैन्य अफसरों का अपमान और सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाना है. रेणु भाटिया को विजय शाह के उस बयान में महिला सैन्य अफसरों का अपमान नहीं दिखा!
18 मई 2025 को सोनीपत पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए अली खान महमूदाबाद को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया. महिला आयोग ने पहले समन भेजा था, पेश न होने पर कार्रवाई हुई. दो दिन पुलिस रिमांड, फिर न्यायिक हिरासत.
प्रोफेसर ने गिरफ्तारी को चुनौती दी. सुप्रीम कोर्ट ने 21 मई को अंतरिम जमानत दे दी, पर तीखी टिपण्णी भी की. कहा- ‘आपने जो लिखा, उसमें dog whistling है’. SIT जांच जारी रहेगी, पर गिरफ्तारी नहीं. अंतत: हरियाणा सरकार ने खुद सुप्रीम कोर्ट को बताया, ‘हम उदारता दिखाते हुए केस बंद कर रहे हैं.’ मार्च 2026 में केस बंद करने का फैसला हुआ.
तब भी कहा गया कि मंत्री विजय शाह पर एफआईआर के बाद भी मंत्री पद पर हैं, और प्रोफेसर को पोस्ट के लिए जेल जाना पड़ा!
कल्पना की जा सकती है कि विजय शाह जैसा ही बयान किसी गैर भाजपा सरकार के किसी मंत्री ने दिया होता, तो कैसे इनका 'संस्कार' जग जाता और तब यह एक महिला फौजी के सम्मान का कितना बड़ा मुद्दा होता.
ऐसा नहीं है कि इस मामले में विजय शाह को कड़ी सजा मिल सकती है. मगर माफी मांग ली और बात खत्म, मंत्री पद पर भी बने रहे. उधर प्रो महबूदाबाद को जेल जाना पड़ा. यह विरोधाभास बहुत कुछ कहता है!
सही है- 'वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति…’