Saurav Singh Ranchi : झारखंड में आपराधिक घटनाओं के साक्ष्य और सूचनाएं जुटाने वाला विभाग लंबे समय से नेतृत्व विहीन चल रहा है. जिस स्पेशल ब्रांच के पास राज्यभर की खुफिया सूचनाएं जुटाने की जिम्मेवारी है, वो विभाग पिछले ढाई साल से बिना एडीजी के है. दूसरी तरफ आपराधिक समेत अन्य मामलों में साक्ष्य जुटाने वाले झारखंड एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) विभाग में डेढ़ साल से डायरेक्टर का पद खाली है.
जानें क्या है स्पेशल ब्रांच का काम
स्पेशल ब्रांच, झारखंड पुलिस की आंख और कान मानी जाती है. इसका काम धरना और प्रदर्शन की सही रिपोर्ट जुटाना है. इसके अलावा यह ब्रांच पॉलिटिकल, नक्सल और आपराधिक गतिविधियों पर भी खुफिया नजर रखती है. इतना ही नहीं इसका काम लोकल पुलिस को रणनीति के लिए अलर्ट करने भी है.कांड के अनुसंधान में एफएसएल रिपोर्ट की महत्वपूर्ण भूमिका
बता दें कि किसी भी आपराधिक समेत अन्य घटनाक्रमों के अनुसंधान में एफएसएल रिपोर्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. एफएसएल से मिलने वाली वैज्ञानिक तथ्यों वाली रिपोर्ट को झुठलाया नहीं जा सकता है. इसी रिपोर्ट के आधार पर केस मजबूत होता है. एसएफएसएल के निदेशक पद पर सीधी भर्ती से बहाली संबंधित फाइल को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) ने 28 सितंबर 2022 को गृह विभाग को वापस कर दिया था. राज्य सरकार ने एफएसएल के निदेशक पद पर सीधी भर्ती से बहाली के लिए जेपीएससी से पत्राचार भी किया था. जेपीएससी ने कुछ बिंदुओं पर आपत्ति जताते हुए गृह विभाग को फाइल वापस कर दी थी. साथ ही जेपीएससी की ओर से तर्क दिया गया था कि इस पद के लिए संबंधित नियमावली में उम्र सीमा व चयन की प्रक्रिया का उल्लेख नहीं है. त्रुटि निराकरण के बाद ही जेपीएससी इस दिशा में आगे बढ़ेगा. एफएसएल के निदेशक का पद फिलहाल रिक्त है. 15 सितंबर 2022 तक पूर्व निदेशक एके बापुली का कार्यकाल था. उनकी कार्यावधि विस्तार के लिए भी फाइल सरकार को बढ़ी है, लेकिन अब तक उक्त फाइल पर विचार नहीं हो सका. इसके अलावा एफएसएल में कुल 150 पद स्वीकृत हैं. इनमें से 57 सहायक वैज्ञानिक और 37 सहायक निदेशक ही कार्यरत हैं. यानी एफएसएल में अभी भी कुल 35 फीसदी पद खाली है.क्या होता है FSL का काम :
- – एफएसएल एक सरकारी विभाग है.
- – एफएसएल आपराधिक मामले की जांच करता है.
- – एफएसएल अपराधों के खुलासों में अहम भूमिका निभाता है.
- – एफएसएल में क्राइम के साक्ष्यों की जांच की जाती है.
- – क्राइम के एविडेंस कुछ भी हो सकते हैं.
- – एफएसएल में क्राइम बायोलॉजिकल एविडेंस को भी परखा जाता है.
- – बायोलॉजिकल में ब्लड, विसरा और अन्य सैंपल लिये जाते हैं.
- – सेरोजिकल जांच से भी क्राइम के एविडेंस को पुख्ता किया जाता है.
- – इसमें घटनास्थल से जुटाये साक्ष्य जैसे बाल, कपड़े या अन्य चीजों की जांच की जाती है.
- – एफएसएल में क्राइम के इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस पर भी काम किया जाता है.
Leave a Comment