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झारखंड को विकसित राज्य बनाने का जिम्मा महिलाओं के कंधों पर : हेमंत सोरेन

महिलाओं के बगैर देश और राज्य के विकास की परिकल्पना कतई नहीं की जा सकती : हेमंत सोरेन Ranchi :  नामकुम के खोजा टोली स्थित आर्मी ग्राउंड में आयोजित मंईयां सम्मान समारोह में सीएम हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन की शुरुआत रउरे मन के जोहार के साथ की. उन्होंने राज्भर से आयी लाखों महिलाओं को नये साल की बधाई दी. मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला और पुरुष एक हल के दो बैल होते हैं. जब तक दोनों साथ नहीं चलेंगे, तब तक खेती नहीं होगी. इसलिए देश और राज्य के विकास की परिकल्पना महिलाओं को ध्यान में रखे बगैर कतई नहीं की जा सकती है. सीएम ने कहा कि हमने जो कदम उठाया है, आने वाले समय में देश के अन्य राज्य भी उसका अनुसरण करेंगे. महिलाओं के लिए योजनाएं बहुत बनीं, लेकिन महिलाओं का विकास नहीं हुआ. झारखंड की महिलाओं में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चलने की क्षमता है. हेमंत सोरेन ने महिलाओं को धन्यवाद देते हुए कहा कि आपने विगत चुनाव में कमाल कर दिया. आपने हमें जो आशीर्वाद और सम्मान दिया, उसके लिए आपको कोटि-कोटि प्रणाम. हमने वादा किया था कि राज्य की आधी आबादी को उनका हक-अधिकार दिलायेंगे. उनके सपनों को पूरा करने में हम मदद करेंगे. आपको स्वावलंबी बनाने का भी हमने संकल्प लिया था. इसी क्रम में आज हमने इतना बड़ा कदम उठाया है. हेमंत सोरेन ने कहा कि आप पर घर-परिवार की जिम्मेदारी तो होती ही है. इस ऐतिहासिक कदम के जरिये अब राज्य के विकास का भी जिम्मा आपके कंधे पर डाला है. झारखंड को विकसित राज्य के पायदान में पहुंचाने में आप सभी की बहुत बड़ी भूमिका होने वाली है. महिलाएं अपने सपनों को साकार करने के लिए स्वत्रंत रूप से अपने निर्णयों पर आगे बढ़ेंगी. सरकार कई तरीके से गरीबों को मदद करती है. कई तरह से सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उपाय ढूंढती है. लेकिन स्वतंत्र रूप से आप अपने घर-परिवार, बाल-बच्चे, खेती-बाड़ी रोजगार के लिए कोई सपना नहीं देख पाते थे. कोई कार्य योजना नहीं बना पाते थे. आज हमने एक ऐसी व्यवस्था आपको दी है, जिसके माध्यम से आप सपने भी देखेंगे और उन सपनों को पूरा करने की क्षमता भी आपके हाथों में होगी. इस दौरान हेमंत सोरेन ने विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि राज्य के कई गैर-सरकारी संगठन महिला सशक्तिकरण पर बड़ी-बड़ी बातें करते हैं. जब हमने 1000 रुपए महिलाओं के अकाउंट में देने की घोषणा की, तो विपक्षी दलों ने हमारा मजाक उड़ाया. हमने 1000 को बढ़ाकर 2500 रुपये करने का वादा किया, तो उसका भी मजाक उड़ाया गया. बाद में उन्होंने 2100 रुपए देने का झूठा वादा करना शुरू कर दिया. विपक्षी दलों ने चुनौती दी कि महिलाओं को इतने पैसे कहां से दीजियेगा. कहां से सरकार पैसा लायेगी. विपक्ष के नेताओं ने हमसे पूछा कि इतने रुपए कहां से लाओगे. हमने भी उनसे पूछा कि आपने जो राज्य की जनता को कहा है, तो आप बताओ आप कहां से इतने पैसे लाओगे. उन्होंने कहा कि चुनाव खत्म होने के बाद सोचेंगे कि देना है कि नहीं देना है. चुनाव से पहले हमने वादा किया था और चुनाव खत्म होने के बाद हमारा पहला कदम महिलाओं के साथ किये गये वादे को पूरा करना था. इससे पहले हेमंत सोरेन ने कहा कि आज हमलोग एक नयी राह, नयी ऊंचाईयों को छूने की तैयारियों में जुट चुके हैं. सदियों से यह राज्य गरीबी, पिछड़ापन, कुपोषण, शोषण, विस्थापन और तरह-तरह के प्रताड़नों से जुझता रहा है. देश आजाद होने के बाद से आज तक इस राज्य ने पूरे देश का पेट भरने का काम किया. लेकिन ना जाने किसकी नजर इस राज्य को लगी कि यहां के लोगों को भूखे-प्यासे और बिना कपड़ों के रहने पर मजबूर होना पड़ा. सीएम ने कहा कि राज्य समेत देशभर से गरीबी को दूर करने के लिए और महिलाओं को सशक्त करने के लिए कई बड़ी-बड़ी नीतियां और कानून बने. लेकिन देश आजाद होने के बाद भी ना देश की गरीबी खत्म हुई, ना पिछड़ापन खत्म हुआ और ना ही महिलाएं सशक्त हो पायीं. आज के इस भौतिकवादी युग में यह बहुत बड़ी चिंता का विषय है. हेमंत सोरेन ने कहा कि हम विकसित राज्य और विकसित देश की परिकल्पना करते हैं. लेकिन देश की आधी आबादी जब विकास से कोसो दूर है, तो देश कैसे विकास कर सकता है. कहा कि यह सोच से परे है. आज महिला पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने की क्षमता रखती हैं. लेकिन आज भी महिलाओं को वो ताकत नहीं मिल पायी, रास्ता नहीं मिल पाया, जिसके जरिये वो खुद का विकास, परिवार का विकास करते हुए राज्य और देश के विकास का हिस्सा बन पाये.  

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