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दोगुना रॉयल्टी वसूली के नियम से सरकारी ठेका में अवैध खनिजों का इस्तेमाल बढ़ा

Ranchi :  राज्य में पत्थर, बालू आदि पर रॉयल्टी लगाने के नियम से सरकारी निर्माण कार्यों में अवैध खनिजों का इस्तेमाल बढ़ा है. वर्क्स विभाग द्वारा निर्माण कार्यों के दौरान ठेकेदारों से वसूले गये रॉयल्टी के आंकड़ों के इस बात की पुष्टि होती है. फिलहाल निर्माण कार्यों के दौरान इस्तेमाल किये गये लघु खनिजों से मिलने वाली रॉयल्टी का 50% हिस्सा अवैध खनिजों के इस्तेमाल से मिल रहा है.

 

सरकार ने अवैध खनन को रोकने के लिए Jharkhand Minor Mineral Concession Rule 2004 (JMMC Rule) में धारा 54 का प्रावधान किया है. धारा 55 में ठेकेदारों द्वारा सरकारी निर्माण कार्यों में अवैध खनन से निकाले गये खनिजों के इस्तेमाल को रोकने के नियम बनाया गया है. धारा 54 में किसी भी व्यक्ति द्वारा बिना लीज के खनन कार्य को अवैध माना गया है. साथ ही ऐसे खनिजों की ढुलाई आदि को भी अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया है.

 

अवैध खनन करने वालों पर खनिजों के मूल्य की वसूली के अलावा छह महीने की जेल और पांच हजार रुपये के दंड का प्रावधान किया गया है. JMMC की धारा 55 में ठेकेदारों द्वारा सरकारी काम में अवैध खनिजों के इस्तेमाल को रोकने के लिए उन्हें निर्माण कार्य में इस्तेमाल किये गये लघु खनिजों जैसे पत्थर, बालू आदि की खरीद से संबंधित प्रमाण पत्र देना पड़ता है.

 

ठेकेदारों द्वारा सामग्रियों की खरीद से संबंधित स्रोत के सत्यापण के लिए इसे जिला खनन पदाधिकारी के पास भेज दिया जाता है. जिला खनन पदाधिकारी द्वारा रिपोर्ट देने तक, निर्माण कार्य से जुड़े सरकारी अधिकारी ठेकेदार के भुगतान में उसके द्वारा इस्तेमाल किये गये लघु खनिजों पर लगने वाले रॉयल्टी की दोगुनी रकम रोककर रखते हैं.

 

जिला खनन पदाधिकारी के समक्ष ठेकेदार द्वारा खनिज के स्रोत के वैध होने का ब्योरा देना पड़ता है. ठेकेदार द्वारा खनिजों के स्रोत के वैध होने से संबंधित ब्योरा देने में असमर्थ होने पर कार्रवाई करने का अधिकार जिला खनन पदाधिकारी के पास है. जिला खनन पदाधिकारी को सबंधित ठेकेदार से दोगुना रॉयल्टी वसूलने या कार्रवाई करने का अधिकार है. सामान्यत: जिला खनन पदाधिकारियों द्वारा ठेकेदारों से रॉयल्टी की दोगुनी राशि वसूलने का आदेश दिया जाता है. इससे सरकारी निर्माण कार्यों में अवैध खनिजों का इस्तेमाल बढ़ा है.

 

निर्माण कार्यों में इस्तेमाल किये गये पत्थर और बालू सहित अन्य खनिजों के पिछले पांच साल के दौरान कुल 3105.15 करोड़ रुपये की रॉयल्टी वसूली गयी है. इसमें से वैध खनिजों के इस्तेमाल से रॉयल्टी के रूप में 1554.81 करोड़ की वसूली हुई है. ठेकेदारों द्वारा निर्माण कार्यों में खनिजों पर दोगुना रॉयल्टी के रूप में 1550.33 करोड़ का भुगतान किया है. यानी सरकारी निर्माण कार्यों में इस्तेमाल खनिजों से मिली कुल रॉयल्टी का 50 प्रतिशत हिस्सा अवैध खनिजों के इस्तेमाल से मिला है. इस तरह अवैध खनन पर काबू पाने और सरकारी निर्माण में अवैध खनिजों के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए बने इस नियम से ठेकेदारों और अवैध खनन में लिप्त लोगों को लाभ हो रहा है.

 

 

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