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महंगाई और बेरोजगारी का कपड़ा व्यवसाय पर असर, जानिये क्या कहते हैं झारखंड के व्यवसायी

महंगाई और बढ़ती बेरोजगारी का असर अब हर तरफ देखा जा सकता है. लगभग हर सेक्टर में. नौकरी करने वाले, मजदूरी करने वाले से लेकर व्यवसाय करने वाले तक परेशान हैं. ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते क्रेज ने भी सीधे तौर पर छोटे-मंझोले कपड़ा व्यवसायियों की कमर तोड़ दी है. हमने इस बार कपड़ा व्यवसाय पर महंगाई और बेरोजगारी के असर की जानने की कोशिश की है. झारखंड के हर जिले के कपड़ा व्यवसायिययों से बात की. जो बातें उन्होंने बतायी है, वह भविष्य के डरावने हालात की तरफ इशारा कर रहे हैं. वो साफ-साफ बता रहे हैं कि हालात खराब है. व्यवसायियों को दुर्गा पूजा और दिवाली से उम्मीद है. अगर बाजार की स्थिति लगन की तरह ही पूजा और दिवाली में भी रही, तो कई कपड़ा व्यवसायियों को अपने दुकान-प्रतिष्ठान बंद भी करने पड़ सकते हैं. यह अलग बात है कि कुछ लोग इसे भी गर्व की बात बताने से पीछे नहीं हटेंगे और किसी ब्रांड का नाम आगे कर कहेंगे इतने दिन में, इतने घंटे में अरबों के सामान बिक गये. [caption id="attachment_397629" align="alignnone" width="750"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/08/11-1-750x536.jpeg"

alt="" width="750" height="536" /> महंगाई और बेरोजगारी का कपड़ा व्यवसाय पर असर, जानिये क्या कहते हैं झारखंड के व्यवसायी[/caption]

रांची : नौकरी के विकल्प कम हो रहे, कपड़ा व्यवसाय भी अछूता नहीं

पहले हर दिन 10,000 की बिक्री की होती थी, अब 6000 भी हो जाए तो गनीमत है : सुरेश मल्होत्रा कोई भी वस्तु या उत्पाद की कीमत में वृद्धि होना ही महंगाई है. बढ़ती महंगाई आज देश की सबसे बड़ी समस्या है. इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है. इसके साथ ही बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है. करोड़ों की संख्या में लोग बेरोजगार हो रहे हैं. रोजगार के विकल्प कम होते जा रहे हैं. कपड़ा व्यवसाय पर इसका क्या असर पड़ा है, यह जानने के लिए हमने रांची शहर के 36 साल पुराने व प्रतिष्ठित कपड़े के प्रतिष्ठान कश्मीर वस्त्रालय के मालिक सुरेश मल्होत्रा से बात की. बेरोजगारी का कपड़ा व्यवसाय पर असर के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह एक बड़ी समस्या है. कोरोना काल में बहुत से लोग बेरोजगार हुए हैं. वर्ष 2019 में बाजार का डाउन फॉल हुआ था, पर अब वो भी मेकअप हो रहा है. यहां के मजदूर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता जैसे शहरों के कपड़े फैक्ट्री में काम करते थे, उन्हें वहां से वापस आना पड़ा. कपड़ा व्यवसाय पर असर की बात करें तो अगर पहले हर दिन 10,000 की बिक्री की होती थी, वह अब 6000 पर आ गई है. लेकिन काम हो रहा है. सुरेश मल्होत्रा आगे बताते हैं कि महंगाई का कपड़ा व्यवसाय पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है. कपड़े के दाम में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है. जिन्हें जरूरत है, वो उस दाम के हिसाब से कपड़े ले रहे हैं. हमारे समाज में बहुत से पर्व होते हैं, जिसमें कपड़ों की अच्छी बिक्री होती है. आने वाले 30 अगस्त को तीज है. सभी महिलाएं नई साड़ी लेती हैं.उन्होंने बताया कि कपड़ा में मार्जिन बहुत कम होता है. मार्केट में पॉलिस्टर के कपड़ों का ज्यादा डिमांड है. उनमें फैशनेबल जैसी वस्तु मिल जाती है और पॉलिस्टर का कपड़ा अभी भी सस्ता है. कॉटन के कपड़ों में भी बढ़ोतरी होती है, उसकी वजह भी खेती है, जब खेती अच्छी होती है तो दाम भी सही लगते हैं.

हजारीबाग : कोविड के बाद आयी बड़ी चुनौती,  दशहरा, दीपावली से 90% कवरेज की उम्मीद

टेक्सटाइल मार्केट थोड़ा मंदा, पर हो जाएगी भरपाई : श्रद्धानंद सिंह शहर के बड़े कपड़ा व्यवसायी और स्वदेशी वस्त्रालय के मालिक श्रद्धानंद सिंह ने कहा कि टेक्सटाइल मार्केट थोड़ा मंदा जरूर है, लेकिन एकाध सीजन के बाद इसकी भरपाई हो जाएगी. कोविड काल के बाद टेक्सटाइल की मैनुफैक्चरिंग मार्केट भी बड़े पैमाने पर प्रभावित हुआ. ट्रांसपोर्टिंग आदि प्रभावित होने से इसका सीधा असर छोटे-छोटे कपड़ा व्यवसायियों पर पड़ा. उनके बिजनेस मार खाए. फिर से बिजनेस खड़ा करने की चुनौतियां तो बढ़ गईं, लेकिन इस बीच नए तरीके भी इजाद हुए. व्यवसाय को जीवित रखने के लिए ऑनलाइन मार्केटिंग का दौर शुरू हो गया. हजारीबाग जैसे शहर में भी अमेजन, फिलिपकार्ट आदि ने ऑनलाइन मार्केटिंग शुरू कर दी. इसने बिजनेस को बचाए रखा और व्यवसाय पूरी तरह बंद नहीं हुआ. दो वर्षों के बाद लॉकडाउन खत्म होने पर अब बाजार ऊपर उठने की कोशिश में लगा है. अब भी 10% नुकसान में है, लेकिन 90% तक भरपाई हुई है. उन्होंने बताया कि देश में वेस्टर्न ड्रेसिंग का मार्केट ने रफ्तार पकड़ी है. पहले यह विदेशों में ज्यादा था. उन्होंने बताया कि दशहरा, दीपावली और छठ में इस नुकसान की भरपाई की पूरी उम्मीद है, चूंकि मार्केटिंग अच्छे होने के चांसेज हैं. उन्होंने कहा कि लॉकडाउन में कई लोगों की नौकरी चली गई. इससे भी बाजार पर असर पड़ा. अब लोग फिर से रोजगार से जुड़ रहे हैं, तो निश्चित रूप से बाजार में छायी मंदी का दौर भी खत्म होने लगा है.

लातेहार : कपड़ा दुकानदारों की स्थिति पूरी तरह खस्ताहाल

राजीव कुमार लातेहार/चंदवा में ज्यादातर लोग किसान और मजदूर हैं. इनको बाजार का मुख्य स्रोत कहा जा सकता है. पूरा देश पिछले कुछ वर्षों से कोरोना जैसे महामारी से ग्रसित था जिसमें बहुत लोगों की अपनी नौकरी छूटी. लोगों का कमाई घटा लोग अर्थाभाव में अपना जीवन जी रहे हैं. लोग फैशनेबल कपड़े कम खरीद रहे हैं : रूपेश इंदिरा गांधी चौक के समीप के दुकानदार रुपेश ने कहा कि इस वर्ष महंगाई बहुत बढ़ रही है. होल सेल से ही हम लोगों को महंगे दामों पर कपड़ा मिल रहा है, जिससे हम लोग उसी अनुपात में ग्राहकों को बेचते हैं. कपड़े की महंगाई को देखते हुए क्षेत्र के लोग फैशनेबल कपड़ों की खरीदारी करना कम कर दिये हैं. सिंपल कपड़ों से अपना काम चला रहे हैं. इस महंगाई से दुकानदारी में खासा असर पड़ा है. हम कपड़ा व्यवसायियों की स्थिति खस्ताहाल है. टैक्स में भी बहुत बढ़ोतरी हुई है : अजय कुमार इंदिरा चौक के पास स्थित अजय वस्त्रालय के मालिक अजय कुमार ने कहा कि पिछले दिनों के महामारी से उबर नहीं पाए हैं. इधर टैक्स में बहुत ही बढ़ोतरी हुई , जिसका खामियाजा हम दुकानदार भुगत रहे हैं. इस बार के रक्षाबंधन त्योहार में भी दुकानदारी एकदम नहीं के बराबर रही. इससे हम सबों के घर गृहस्थी पर भी आफत आन पड़ रही है. आगे हम किसी तरह की टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे.

रामगढ़ :  महंगाई के कारण कपड़ा व्यवसाय मंदा, कई हुए बेकार

बहुत कम ग्राहक पहुंच रहे, सेल में भारी कमी महंगाई और बेरोजगारी के कारण रामगढ़ जिले में भी कपड़ा व्यवसाय पर असर पड़ा है.  रेमंड कंपनी से फ्रेंचाइजी लेकर पिछले 8 वर्षों से कपड़ा दुकान चला रहे हैं रामगढ़ के कपड़ा व्यवसायी अमृत अग्रवाल बताते हैं कि 2019 से 2021 तक कोरोना के कारण व्यवसाय काफी प्रभावित रहा. उन दिनों दुकान के बंद होने से नुकसान का ही सामना करना पड़ा. हालांकि अब स्थिति  धीरे-धीरे सामान्य हो रही है और थोड़ा बहुत ग्राहकों का आवागमन दुकान में शुरू हुआ तो अब महंगाई सता रही है. इसके कारण कस्टमर काफी कम संख्या में दुकान तक पहुंच रहे हैं जिससे सेल में भी काफी कमी आई है जिसके बाद इनकम भी कम होने लगा है अमृत अग्रवाल बताते हैं कि शुरुआत में जितना स्टाफ दुकान में था उससे थोड़ा कम स्टॉप आज भी दुकान में काम कर रहे हैं लेकिन जितनी संख्या में दुकान में स्टाफ हैं, सभी मिलजुलकर दुकान को संभाल लेते हैं .कपड़ा में 5% और रेडिमेड में 12% जीएसटी लगता है. हालांकि अभी तक कोरोना काल की ही मार झेल रहे हैं. अमृत अग्रवाल बताते हैं कि रामगढ़ के सतकौड़ी कॉम्पलेक्स में लगभग ₹60,000 रेंट देकर कंपनी दुकान भाड़े में लिए हुए हैं और रेमंड कंपनी से फ्रेंचाइजी लेकर कपड़ा दुकान चला रहे हैं.  हालांकि कारोबार पहले की अपेक्षा अभी काफी धीमी गति से चल रही है इसका सबसे बड़ा कारण महंगाई ही है.

गिरिडीह : कपड़ा व्यवसाय पर बुरा असर, बिक्री पहले की तरह नहीं

दुर्गा पूजा में बाजार की स्थिति सुधरने की संभावना : विनित बाबा टेक्सटाइल के संचालक विनित कुमार का कहना है कि कोरोना काल में कपड़ा व्यवसाय पर विपरीत असर पड़ा. कोरोना काल से पूर्व कपड़ा व्यवसाय जैसा चल रहा था, अब वैसा नहीं रहा. कोरोना के कारण आर्थिक मंदी आई. मंदी का कपड़ा व्यवसाय पर असर पड़ा. बिक्री काफी कम हो गई. कपड़ा व्यवसायियों की निगाह दुर्गा पूजा पर टिकी है. हो सकता है दुर्गा पूजा के समय बिक्री बढ़े. लोग दुर्गा पूजा के समय नए कपड़ों की खरीदारी करते हैं. कपड़े के दाम बढ़े, व्यवसाय मंदा : सुनील केडिया बाबा वस्त्रालय के संचालक सुनील केडिया ने बताया कि व्यवसाय तो ठप है. इस सेक्टर पर कोरोना का बहुत खराब असर पड़ा है. कई लोग बेरोजगार हो गए हैं. उस पर से महंगाई के कारण बाजार एकदम खाली है. तीज और दुर्गा पूजा को देखते हुए बाजार में सुधार हो सकता है. कपड़ों के दाम में इजाफा जरूर हुआ है. फिर भी लोग पूजा के समय खरीदारी करते हैं.

धनबाद: कपड़ा व्यवसायी भी महंगाई से बेहाल, नहीं हो सकेंगे मालामाल

त्योहारी सीजन को लेकर दुकानदारों में जगी है उम्मीद धनबाद से रवि चौरसिया बढ़ती महंगाई ने राशन, सब्जी, दूध-दही पनीर सहित आवश्यक वस्तुओं का बाजार तो मंदा कर ही दिया है, कपड़ा व्यवसाय पर भी बुरी तरह असर डाला है. आम लोगों के पास पैसा नहीं है, रोजगार घट रहे हैं, ऊपर से मूल्य वृद्धि भी परेशान कर रही है. इस बिगड़ते हालात को देख धनबाद के तमाम कपड़ा व्यवसायी भी चिंतित हैं. कोरोना के बाद बाजार में थोड़ा सा सुधार आया. मगर कपड़ा व्यवसाय में घाटा कम होने का नाम नहीं ले रहा. व्यवसायी त्योहारी सीजन की उम्मीद लिए दुकान में बैठे हैं. लेकिन ग्राहकों का अब तक अता-पता नहीं है. फिलहाल कपड़ा व्यवसाय मंदी का सामना कर रहा है. हालांकि तीज और दुर्गापूजा को लेकर व्यापारियों में नई उम्मीद जगी है. कपड़ा व्यवसाय अभी घाटे में चल रहा है : रितेश नारनोली केंदुआ के थोक वस्त्र विक्रेता संघ के उपाध्यक्ष रितेश नारनोली बताते हैं कि इन दिनों कपड़ा व्यवसाय घाटे में है. कारण बताते हुए कहा कि बारिश नहीं होने से खेती-बारी चौपट हो गई, तो हमारी दुकानदारी पर भी असर पड़ा है. दुर्गा पूजा में भी कुछ खास उम्मीद नहीं है. 80 प्रतिशत ग्राहक धनबाद के ग्रामीण क्षेत्र से आते हैं, जो पूरी तरह कृषि पर निर्भर हैं. इस बार बारिश ना होने से कृषि पर असर पड़ा है तो दुर्गा पूजा में भी हम उम्मीद नहीं लगा सकते. लोगों के पास खरीदारी के लिए पैसा ही नहीं: श्रीकांत अग्रवाल पुराना बाज़ार के कपड़ा व्यवसायी श्रीकांत अग्रवाल बताते हैं कि इन दिनों मार्केट में पैसों की कमी है. लोगों के पास पैसे नहीं होने के कारण कपड़ा व्यवसाय की स्थिति नाजुक हो गई है. उन्होंने बताया कि यूं तो मार्केट थोड़ा ऊपर नीचे होता रहता है, लेकिन इन दिनों स्थिति ज्यादा खराब है. उनका कहना है कि तमाम दुकानदार त्योहारी सीजन से आस लगाए बैठे हैं. उन्होंने बताया कि कोरोना काल के बाद इस वर्ष शायद दुर्गा पूजा में बड़े मेले का आयोजन हो सकता है. इसी उम्मीद पर हम टिके हुए हैं. उन्होंने हालत सुधारने के लिए व्यापारियों पर टैक्स कम करने की बात कही है. अब तो खर्च भी निकालना मुश्किल हो गया है : राजीव कपड़ा व्यवसायी राजीव अग्रवाल को दुकान का खर्च भी निकालना मुश्किल लग रहा है. उनका कहना है कि महंगाई से त्राहिमम मचा हुआ है, लोग खाने तक के पैसे नहीं जुटा पा रहे हैं. बढ़ती महंगाई के कारण कपड़ा की दुकानदारी पर असर पड़ा है. त्योहारी सीजन को देखते हुए पूरी तैयारी कर ली है. हालांकि संशय बना हुआ है. बिक्री नहीं होने के कारण महाजन का भी बाकी हो चुका है. हमारे शहर में भी बाजार की हालत नाजुक : समीर अग्रवाल कपड़ा व्यवसाय समीर अग्रवाल को व्यवसाय बचाने की चिंता है. कहा कि लॉक डाउन के पहले शादी का सीजन देख भारी मात्रा में कपड़ा खरीदा. अब बड़े व्यापारी पैसा मांग रहे हैं. बाजार की हालत नाजुक है. हालांकि दुर्गा पूजा को देखते हुए नए डिजाइन के कपड़ों का आर्डर दे रखा है. अब दुर्गा पूजा में भी मार्केट ठंडा रहा तो बड़ी मुसीबत हो जाएगी.

चाईबासा : ब्रांडेड कपड़ा तो अब बिक भी नहीं रहा

पश्चिमी सिंहभूम के कपड़ा व्यवसायी आसिम अब्दुल्ला ने बताया कि फिलहाल कपड़ों की बिक्री में पूरी तरह से धंधा चौपट हो गया है. पहले जैसा अभी धंधा नहीं हो पा रहा है. ब्रांडेड कपड़ा तो अब बिक भी नहीं रहा. ग्रामीण क्षेत्रों के लोग कपड़ा अब पहले जैसा नहीं खरीद रहे हैं. महंगाई का असर है. कोरोनाकाल के बाद कपड़ों का कारोबार पूरी तरह से कमजोर हो गया है. अब तो ऐसी स्थिति हो गई है कि अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में अधिक माल उठाते हैं. लेकिन डंप पड़ा हुआ है, तीन साल का कपड़ा खरीदा हुआ हूं. लेकिन अभी तक सिर्फ 20 से 30% ही बिका है, जिसने हम लोगों के लिये बहुत ही मुश्किल खड़ी कर दी है. पहले जैसी अब स्थिति नहीं है. पहले लोग शौक से कपड़ा खरीदते थे. लेकिन अब जरूरत पर भी कपड़ा खरीदना भी मुश्किल हो गया है. लोगों के पास पैसा नहीं है, ऊपर से रोजगार नहीं होना मुख्य कारण हो सकता है. अब शायद धंधा बदलना पड़ेगा. ऑनलाइन मार्केट की वजह से खरीदारी में कमी आई पश्चिमी सिंहभूम में कपड़ा व्यवसाय से जुड़े राजेश अग्रवाल ने बताया कि ऑनलाइन मार्केट की वजह से कपड़ों की खरीदारी में कमी आई है. लोगों को अब ऑनलाइन में सस्ता मिल जाता है. हालांकि कपड़ा तो खराब रहता ही है. लेकिन तामझाम के चक्कर में ऑनलाइन से अब लोगों की खरीदारी अधिक हो रही है. इसके साथ ही महंगाई का भी असर पड़ा है. लोग महंगाई के कारण कपड़ों में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं. पहले जैसा धंधा अब कम हो गया है. पहले कोलकाता से हर सप्ताह कपड़ा लाया जाता था. लेकिन अब वह स्थिति नहीं बनी है. पहले की तुलना देखा जाए तो 50% से भी कम का धंधा हो रहा है. कपड़ों के धंधा से अब उठकर कुछ और धंधा करने का भी कभी-कभी दिल करता है. कपड़ों की खरीदारी पहले ग्रामीण लोगों में भी रहती थी. लेकिन अब ग्रामीणों में भी रुचि घट रही है. साल में एक दो बार ही लोग कपड़ा खरीद रहे हैं.

जमशेदपुर : त्योहार और लग्न के सीजन पर टिकी उम्मीद, नहीं संभला तो बाजार धड़ाम

जमशेदपुर  के कपड़ा कारोबारी विश्वजीत भट्ट कहते हैं कि जल्द ही आ रहे त्योहार और लग्न के सीजन से जमशेदपुर के कपड़ा बाजार को बहुत ही उम्मीदें हैं. कारोबारी कहते हैं कि लंबे समय की मंदी और बेकारी के बाद एक बार फिर से बेहतर कारोबार की उम्मीद है. यदि इस बार ये उम्मीदें टूट गयीं और लोग बाजार में नहीं आए तो यह कारोबार धड़ाम हो जाएगा. इस समय कपड़ा बाजार में रेगुलर कपड़ों का खूब ट्रेंड चल रहा है. ब्रांडेड कपड़ों की बिक्री कम है. हां, ब्रांडेड कपड़ों पर मिलने वाली छूट बाजार के लिये बहुत ही सहायक साबित होती है. क्योंकि लोगों को रेगुलर कपड़ों की कीमत पर ब्रांडेड कपड़े मिल जाते हैं और लोग जमकर खरीदारी करते हैं. इससे बाजार भी चहक जाता है. अभी फिलहाल तो लग्न खत्म होने के बाद जून, जुलाई व अगस्त के महीने में बाजार में मंदी ही छाई है. अब कंपीटिशन ज्यादा है और लोगों के पास विकल्प हैं साकची स्थित नागरमल शिवनारायण एंड संस के डिविजनल मैनेजर मुकेश झा बताते हैं कि आज के 10 साल पहले तक बिक्री ठीक थी. व्यापार करना आसान था. कंपीटिशन कम था और लोगों के पास विकल्प भी कम थे. हमारे यहां दिन भर में 20 से 25 हजार रुपये तक की सेल हो जाती थी. हमें महसूस होता था कि बाजार बमबम है. यदि हम पिछले पांच सालों की बात करें तो चुनौतियां खूब बढ़ीं और सेल भी 35 से 40 हजार रुपये की ही रोज होती थी. कोरोना काल में हम अपने 70 कर्मचारियों को घर बैठाकर आधा वेतन देते रहे. कुछ बीमार कर्मचारियों का इलाज भी कराया. दूसरी मदद भी की. इसके बावजूद जिन कर्मचारियों का काम नहीं चला, उन्होंने नौकरी छोड़ दी. लॉकडाउन हटा और कपड़ों की दुकानें खुलीं तो लोग दुकानों में आने से डर रहे थे. व्यापार बहुत मंदा था और दुकान खर्च भी नहीं निकल पाता था. लगभग तीन महीने ऐसा चला. इसके बाद बाजार ठीक हुआ और सेल रोजाना ढाई से तीन लाख रुपये तक होने लगी. लग्न खत्म होने के बाद एक बार फिर मंदी आ गई. इसे भी पढ़ें- किशोरी">https://lagatar.in/case-of-getting-a-sit-in-meeting-with-the-teenager-the-main-accused-surrendered-the-attachment-house-rest-accused/">किशोरी

से उठक-बैठक कराने का मामला : मुख्य आरोपी ने किया सरेंडर, बाकी आरोपियों के घर की हुई कुर्की
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