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14 साल बाद भी खत्म नहीं हुआ सहायक प्राध्यापकों का वनवास

Rajnesh  Ranchi : झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित सहायक प्राध्यापकों का एसोसिएट प्रोफेसर में प्रमोशन नहीं मिला है. इन सब की नियुक्ति साल 2008 में हुई थी. 14 साल बीत जाने के बाद भी प्रमोशन नहीं मिला है.प्रमोशन नहीं मिलने के कारण सहायक प्राध्यापकों में मायूसी है. 14 साल में तो भगवान राम का भी वनवास खत्म हो गया था, लेकिन झारखंड के सहायक प्राध्यापकों का वनवास खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा. बता दें कि साल 2008 में जेपीएससी ने 745 पदों के लिए रिक्तियां निकाली थी. हालांकि ये नियुक्तियां विवादों में रहीं है. जेपीएससी के 5 अफसरों समेत 69 पर सीबीआई ने जांच भी किया था. इसे भी पढ़ें - छत्तीसगढ़">https://lagatar.in/chhattisgarh-encounter-with-naxalites-in-sukma-3-soldiers-martyred-two-injured/">छत्तीसगढ़

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क्या कहता है यूजीसी रेगुलेशन 2010

यूजीसी रेगुलेशन 2010 के अनुसार जिन सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति पीएचडी के साथ हुई है. उनका चार साल बाद सहायक प्राध्यापक के दूसरे स्टेज के लिए प्रमोशन हो जाना था. जिन सहायक प्राध्यापकों की एमफील के साथ नियुक्ति हुई थी उनका 5 साल के बाद सहायक प्राध्यापक स्टेज दो में प्रमोशन हो जाना था. जिनकी नियुक्ति पीएचडी और एमफील के बिना हुई है उनका प्रमोशन 6 साल बाद सहायक प्राध्यापक स्टेज दो के लिए हो जाना था. सहायक प्राध्यापक स्टेज तीन के लिए स्टेज दो के प्रमोशन के बाद 5 साल का अनुभव होना चाहिए. सहायक प्राध्यापक स्टेज तीन के प्रमोशन के तीन साल बाद एसोसिएट प्रोफेसर में प्रमोशन दिया जाना था. एसोसिएट प्रोफेसर में प्रमोशन के तीन साल के बाद प्रोफेसर में प्रमोशन दिया जाना था. ये सभी प्रमोशन विश्वविद्यालय जेपीएससी के अनुशंसा पर करेगी. मालूम हो कि यूजीसी रेगुलेशन 2010 14 साल बाद दिसंबर 2022 में लागू हुई है.

किस विश्वविद्यालय में है कितने सहायक प्राध्यापक

सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय दुमका में सहायक प्राध्यापकों की संख्या 34, जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापकों की संख्या 20, बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय, धनबाद में यूजी पीजी मिला कर सहायक प्राध्यापकों की संख्या 280 है. डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची में सहायक प्राध्यापकों की संख्या 40 और रांची विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापकों की संख्या 519 है और विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग में 93है. इसे भी पढ़ें - NTA">https://lagatar.in/nta-has-released-the-admit-card-for-ugc-net-phase-2-exam/">NTA

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शीर्ष पर बैठे नीतिकारों की नीयत साफ नहीं : डॉ. विनय भरत

डॉ. श्यामा प्रसाद विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. विनय बरत ने कहा कि सरकार को नई शिक्षा नीति लाने की जल्दी है. विश्वविद्यालय के आला अधिकारी भी नई नीतियों को त्वरित गति से इम्प्लीमेंट करवाकर राजभवन या सरकार से अपनी पीठ थपथपाने में लग जाते हैं. पर यूजीसी की गाइडलाइंस जो शिक्षकों की मूलभूत जरूरतों से जुड़ा है, उसके प्रति बेहोश है. यूजीसी कहती है कि स्नातकोत्तर की पढ़ाई तभी सम्भव है जब हर विभाग में एक प्रोफेसर ,एक एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसरों की टीम हो. पर विगत 15 साल से असिस्टेंट प्रोफेसरों की टीम अपने प्रमोशन की बाट जोह रहे है और लगभग सभी विभागों में पुराने शिक्षकों के रिटायरमेंट के बाद इन्हीं सहायक प्राध्यापक के कंधे पर बोझ बढ़ गया है. असिस्टेंट प्रोफेसरों को यूजी ,पीजी,वोकेशनल और नई शिक्षा नीति के तहत नई सिलेबस , आईक्यूएसी सब नैया पार करने वाला विश्वविद्यालय इन्हीं को प्रोन्नति से वंचित रखा है. पीएचडी इंक्रीमेंट भी देता है तो नई तिथि से. बकाया राशि और उसके इंटरेस्ट का कोई जिक्र तक नहीं. उच्च शिक्षा अपनी आखिरी सांस ले रहा है. कॉन्ट्रैक्ट/ घंटी पर आधारित और प्रोन्नति से वंचित स्थायी शिक्षकों की आह के बीच नई शिक्षा नीति लाइये, या पुरानी शीर्ष पर बैठे नीतिकारों की नीयत साफ नहीं, ये साफ दिखता है. इसे भी पढ़ें - एमसीडी">https://lagatar.in/story-of-uproar-again-repeated-in-mcd-standing-committee-elections/">एमसीडी

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