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खत्म हो जायेगा तालाबों का अस्तित्व

राज्य के नदी,तालाबों और खाली पड़ी सरकारी,निजी, गैरमजरुआ जमीनों पर भू माफिया की नजर अतिक्रमणकारियों को नहीं रोका गया तो खत्म हो जाएगा तालाबों का अस्तित्व Ranchi : राज्य में इन दिनों नदी,तालाबों और खाली पड़ी सरकारी,निजी जमीनों पर भू माफिया की नजर है.वे तालाबों और नदी तटों को भरकर धड़ल्ले से बेच रहे हैं. अगर अतिक्रमण कर तालाबों को बेचने से नहीं रोका गया तो बहुत जल्द उसका अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा. करीब दो दशक पहले राज्य के विभिन्न जिलों में काफी संख्या में तालाबा थे, जिसकी वजह से भू जल स्तर भी ऊंचा रहता था. लेकिन जैसे जैसे आबादी बढ़ती गई शहरी क्षेत्रों में आवासीय भूमी की कमी होती गई. तब भू माफिया और दलालों की नजर तालाब और नदी तटों पर गड़ गई. पहले तालाब के किनारे लोग बसते गए और फिर धीरे धीरे कूड़े-कचरों से उसे भरने का काम शुरू हो गया. इस काम में सरकारी तंत्र की मिलीभगत भी बताई जाती है. इस समय राज्य के विभिन्न जिलों में तालाबों,सरकारी और निजी खाली पड़ी जमीनों को किस तरह भू माफिया फर्जीवाड़ा कर बेच रहे हैं.इसकी पड़ताल शुभम संदेश की टीम ने किया है. पेश है रिपोर्ट.

धनबाद

अतिक्रमणकारियों ने पंपू तालाब का अस्तित्व मिटाने की ठानी

[caption id="attachment_671467" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/06/Untitled-5-12.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> 22 की जगह अब मात्र 4 एकड़ में सिकुड़ गया है यह तालाब[/caption] कोयलांचल धनबाद में भी अन्य जगहों की तरह सरकारी-गैरमजरुआ व सीएनटी, नदी-नालों और निजी व सरकारी तालाबों को भर कर जमीन की खरीद बिक्री और उस पर अवैध कब्जा का खेल धड़ल्ले से चल रहा है. माफिया व दबंगों की हरकत से कई तालाबों का अस्थित्व पहले की खत्म हो चुका है. यह सिलसिला अब भी जारी है. धनबाद के वार्ड 20 में पॉलिटेक्निक रोड स्थित पंपू तालाब इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. इस तालाब का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है. 22 एकड़ में फैला तालाब सिकुड़ते सिकुड़ते हुए अब मात्र 4 एकड़ में सिमट गया है. तालाब के चारों ओर लगभग एक हजार से अधिक लोगों का कब्जा हो चुका है. कहा जा रहा है कि यह सब जिला प्रशासन और रेलवे की नाक के नीचे हुआ है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/06/Untitled-6-14-150x150.jpg"

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खटाल, दुकान व पार्किंग के जरिये हो रहा तालाब का अतिक्रमण: कुमार मधुरेंद्र

स्थानीय निवासी सह समाजसेवी कुमार मधुरेंद्र ने बताया कि यह तालाब रेलवे और जिला प्रशासन का है. अब वहां दर्जनों दुकानें खुल चुकी हैं. पिछले हिस्से में पांडरपाला के लोग तालाब को ढकते हुए काफी आगे आ चुके हैं. दोनों हिस्सों पर खटाल, मकान, वाहन पार्किंग के जरिये कब्जा करने का अभियान जारी है. बचे हुए हिस्से पर भी अतिक्रमणकारियों की नजर है.

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alt="" width="150" height="150" />बड़ी होशियारी से खेला जा रहा अवैध कब्जा का खेल: अनिल कुमार

एक अन्य स्थानीय व्यक्ति अनिल कुमार कहते हैं कि कि अवैध कब्जा का खेल होशियारी से खेला जा रहा है. पहले अतिक्रमणकारी अपने घरों का कूड़ा-कचरा तालाब के किनारे डालते हैं. फिर अपनी जमीन बताकर निर्माण शुरू कर देते हैं. तालाब का जिस तरीके से अतिक्रमण हुआ और हो रहा है, उससे उसका अस्तित्व ही खत्म होने के कगार पर है.

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alt="" width="150" height="150" />पहले पानी ही सूख गया, अब हो रहा अतिक्रमण: अशोक पाल

वार्ड 20 के निवर्तमान पार्षद अशोक पाल ने कहा कि 27 साल पहले गजलीटांड़ खान दुर्घटना के समय दीवार गिर गई. तभी से तालाब का पानी सूखने लगा, अब तो आधा से अधिक सूख चुका है. जमीन दलालों के साथ मिलकर तालाब की जमीन बेच डाली. चारों ओर तो अतिक्रमण हो चुका है.

चाईबासा

  • सीओ ने काटा ऑनलाइन अवैध मालगुजारी
  • जमीन मालिक ने उपायुक्त को जांच के लिये लिखा पत्र

 गितिलीपी में फर्जीवाड़ा से जमीन की खरीद ब्रिकी

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alt="" width="600" height="400" /> सदर प्रखंड चाईबासा के गितिलपी गांव में ग्रामीण मुंडा कृष्णा चन्द्र सावैयां के फर्जी मुहर व जाली हस्ताक्षर से जमीन की बिक्री करने का मामला प्रकाश में आया है. गितिलपी निवासी जमीन मालिक सुखलाल सावैंया की जमीन को दलाल गितिलीपी निवासी कृपेन्द्र नारायण सावैयां ने चाईबासा के मोची साई निवासी अमित भेंगरा, पिता केरोबिन भेंगरा को 0.20 डिसमिल व संतोष खालखो पिता मतियास खालखो को 0.17 डिसमिल जमीन बेच दी. जमीन मालिक को मामले की जानकारी होने पर उन्होंने संबंधित पदाधिकारी के पास लिखित शिकायत की. इसके बाद मामले की जांच शुरू हो गयी है. शुक्रवार को उपायुक्त के पास एक लिखित शिकायत की गई. इधर, सुखलाल सावैंया ने कहा कि सदर अनुमंडल पदाधिकारी ने 20 मई 2023 को भूमि सुधार उपसमाहर्ता न्यायालय में दोनों प्लॉटों का नामांतरण अपील वाद दाखिल करने का निर्देश दिया था. उन्होंने कहा कि एलआरडीसी के पोर्टल में कई बार प्रयास के बावजूद साइट में दखल खारिज करने का ऑप्शन ही नहीं आया. इस कारण आवेदक दाखिल करने में असमर्थ रहा. इसी क्रम में मुझे पता चला कि मेरे लिखित शिकायत के बावजूद 12 जून को रसीद 0440588786 से संतोष खालखो व रसीद नंबर 0259403291 से अमित भेंगरा का ऑनलाइन मालगुजारी काट दिया गया, जो कि पूरी तरह से गलत है. सीओ ने अवैध तरीके से ऑनलाइन मालगुजारी रसीद काट दी है. शिकायत के बावजूद सरकारी सहयोग से ऐसी कारगुजारियों को अंजाम दिया जा रहा है.

ग्रामीण मुंडा के फर्जी हस्ताक्षर की कर चुके हैं शिकायत

गितिलीपी गांव के ग्रामीण मुंडा कृष्णा चंद्र सावैंया लिखित रूप से सीओ कार्यालय में जाली हस्ताक्षर कर जमीन की ब्रिकी करने संबंधित मामले की सूचना दे चुके हैं. इस पर अभी तक सुनवाई नहीं हुई है. मुंडा सावैंया ने कहा कि गलत तरीके से मेरे पद का इस्तेमाल कुछ जमीन दलाल कर रहे हैं. इस पर कर्रवाई की जाए. उन्होंने चाईबासा निवासी अमित भेंगरा व संतोष खालखो पर आरोप लगाया है.

पहले भी दोनों खरीदार फर्जी जाति प्रमाण पत्र बना चुके हैं

शिकायतकर्ता मुंडा कृष्णा चंद्र सावैंया का कहना है कि पूर्व में संतोष खालखो और अमित भेंगरा द्वारा इस फर्जी क्रय के लिए जाली जाति व आवासीय प्रमाण पत्र सदर अंचल से बनवाया है. उन्होंने जिला स्तर से मामले की गंभीरता को देखते हुए अंचलाधिकारी, अंचल निरीक्षक, कर्मचारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया है. पीड़ित जमीन मालिक सुखलाल सावैंया कहते हैं कि अनुमंडल कार्यालय में सुनवाई से पहले ही सदर चाईबासा के सीओ ने ऑनलाइन मालगुजारी काट दिया है. जो गलत है. मामला अभी अनुमंडल कोर्ट में है. इसकी सुनवाई होनी है लेकिन अवैध तरीके से ब्रिकी होने संबंधित मामले पर स्टे के बावजूद भी रसीद काटना गलत है.

चक्रधरपुर

ऐतिहासिक करबला तालाब पर अतिक्रमणकारी कर रहे हैं कब्जे की कोशिश

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alt="" width="600" height="400" /> रांची-चाईबासा मुख्य मार्ग के चक्रधरपुर में पोड़ाहाट स्टेडियम के समीप ऐतिहासिक वर्षों पुरानी करबला तालाब पर अतिक्रमणकारियों द्वारा कब्जा करने की कोशिश की जा रही है. कुछ साल पहले भू माफिया द्वारा तालाब को मिट्टी और कचरों से भरना भी प्रारंभ कर दिया गया था, लेकिन कुछ लोगों द्वारा इस पर आपत्ति जताए जाने के बाद मामला कोर्ट में चला गया. स्थानीय लोग बताते हैं कि तालाब को मिट्टी से भरकर फ्लैट व कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना थी, लेकिन विवाद के कारण फिलहाल यह अधर में लटक गया. भू माफिया अभी इस पर अपनी नजर रखे हुए हैं. यह तालाब पूर्व में काफी बड़ा था, लेकिन धीरे-धीरे इसके आसपास घर व दुकानों का निर्माण होने के बाद यह सिमटता गया. लोगों का कहना है कि पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार कर इसे बचाने की कोशिश की जानी चाहिए न कि तालाब को खत्म कर दिया जाए. शहर के कई तालाबों का अस्तित्व अतिक्रमणकारियों व भू माफिया द्वारा खत्म कर दिया गया है. जो भी तालाब बचे हैं, उसे भी खत्म कर देने की कोशिश हो रही है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/06/16RC_M_55_16062023_1-150x150.jpg"

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करबला तालाब में पहले होता था मछली पालन : मुकेश कसेरा

चक्रधरपुर के पोड़ाहाट पोड़ाहाट स्टेडियम के समीप रहने वाले मुकेश कसेरा ने कहा कि हमारे पिताजी बताते हैं कि करबला तालाब काफी पुराना है. पहले तालाब में काफी मात्रा में पानी भरा रहता था. उसमें मछली पालन भी किया जाता था, लेकिन धीरे-धीरे तालाब में कचरा भरकर व आसपास घरों का निर्माण कर तालाब का पानी सूखा दिया गया. तालाब में अब बारिश के दिनों में ही पानी रहता है. पुराने तालाबों को बचाने की आवश्यकता है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/06/16RC_M_56_16062023_1-150x150.jpg"

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पुराने तालाबों का होना चाहिए जीर्णोद्धार : वंदना श्रीवास्तव

पोड़ाहाट मैदान के समीप रहने वाली वंदना श्रीवास्तव ने कहा कि पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार होना चाहिए. शहर में अतिक्रमण के नाम पर दुकानदारों को उजाड़ा जा रहा है, लेकिन भू माफिया पर अधिकारियों की नजर नहीं है. शहर के पुराने तालाब और खाली पड़ी जमीनों पर अतिक्रमणकारियों द्वारा कब्जा कर भवन का निर्माण कराया जा रहा है. प्रशासनिक अधिकारियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए. तालाबों को खत्म किए जाने के कारण जल का स्तर भी काफी घट रहा है.

जमशेदपुर

भरे गए तालाब के लिए सरकारी जमीन से दिया रास्ता

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alt="" width="600" height="400" /> सामने आ रही है दक्षिण घाघीडीह पंचायत के मुखिया की भू-माफिया से सांठ-गांठ[/caption] बागबेड़ा थाना क्षेत्र के हरहरगुटू-सोमाय झोपड़ी क्षेत्र में सरकारी-निजी तालाब भरे जाने तथा प्लॉटिंग के खेल में कई रसुखदार के भी शामिल होने की बात कही जा रही है. यहां तक कि स्थानीय पंचायत के तत्कालीन एवं वर्तमान मुखिया भरत जोड़ा की सांठ-गांठ भी सामने आ रही है. जिस सरकारी जमीन (खाता संख्या 1075, प्लॉट संख्या 2099) पर अभी पंचायत सचिवालय निर्माण कराए जाने की मुखिया द्वारा अनुशंसा की गई है. उस भू-खंड से सटा निजी एवं सरकारी तालाब हुआ करता था. हाल के कुछ महीनों तक उक्त तालाब में पानी हुआ करता था. लेकिन कहा जा रहा है कि भू-माफिया ने मुखिया की जानकारी में तालाब को भर दिया. लोक सेवक (निर्वाचित प्रतिनिधि) होने के बावजूद मुखिया के द्वारा क्षेत्र की सरकारी जमीन एवं तालाब के अतिक्रमण एवं भरे जाने की शिकायत कभी उच्चाधिकारियों से नहीं की गई. उलटे क्षेत्र की जनता ने वर्ष 2018 में मुखिया समेत क्षेत्र के कई रसुखदारों की शिकायत डीसी से की. जिसमें सरकारी तालाब के जीर्णोद्धार की आड़ में तालाब का अतिक्रमण करने तथा मिट्टी की बिक्री करने का आरोप लगा. प्रशासनिक जांच के बाद जीर्णोद्धार का काम बंद कर दिया गया.

सामुदायिक भवन में मुखिया ने खोल रखा है अपना कार्यालय

झारखंड में वर्ष 2010 में पहली बार पंचायत चुनाव हुआ. उस समय दक्षिणी घाघीडीह पंचायत से भरत जोड़ा मुखिया निर्वाचित हुए. पंचायत का अपना भवन नहीं होने के कारण उन्होंने क्षेत्र की जनता के उपयोग के लिए बने सामुदायिक भवन में पंचायत का कार्यालय खोल लिया. वर्ष 2015 में दूसरी बार हुए पंचायत चुनाव में उक्त पंचायत महिला के लिए आरक्षित हो गया. जिसके कारण भरत जोड़ा की परिवार की सदस्य सुष्मा जोड़ा मुखिया निर्वाचित हुई. जबकि भरत जोड़ा पंचायत समिति सदस्य निर्वाचित हुए. हालांकि मुखिया के कार्यों का संचालन भरत जोड़ा के द्वारा ही किया जाता रहा. तीसरी बार वर्ष 2020 में पंचायत चुनाव होना था. लेकिन कोविड का दौर होने के कारण दो वर्षों तक पंचायत चुनाव टल गया. इस दौरान राज्यभर की मुखिया समेत अन्य प्रतिनिधियों को सरकार ने दो वर्षों का सेवा विस्तार दे दिया. 2022 में तीसरी बार पंचायत चुनाव होने पर भरत जोड़ा पुनः मुखिया निर्वाचित हुए. हालांकि वर्ष 2010 से सामुदायिक भवन में कार्यरत उनका पंचायत कार्यालय आज भी पूर्व की भांति कार्यरत है.

लातेहार

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alt="" width="600" height="400" /> जिला मुख्यालय में कई ऐसे तालाबों को भर कर सरकारी भवन बनाया गया है, जिन तालाबों को लोग जिंदा तालाब कहते थे. इन तालाबों में सालों भर कमोवेश पानी रहता था. शहर के धर्मपुर में तीन ऐसे तालाबों को भर सिविल सर्जन कार्यालय, नर्सिंग प्रशिक्षण केंद्र एवं बहुदेश्यीय भवन बनाये गये. अब अन्य सरकारी तालाबों में भूमि माफिया और अन्य लोगों की नजर पड़ गयी है. शहर के अमवाटीकर मोड़ के पास एक सरकारी तालाब है. इस तालाब के किनारों को भर कर कतिपय लोगों के द्वारा अतिक्रमण कर गृह निर्माण का कार्य कराया जा रहा है. यह तालाब कुल दो एकड़ 35 डिसमिल भूमि पर था. लेकिन आज की तारीख में तालाब भूमि की मापी करायी जाये तो तालाब की भूमि कम पायी जायेगी. इसका कारण है कि इसके किनारों में मिट्टी भरकर समतल कर गृह निर्माण का कार्य कराया जा रहा है. कहना गलत नहीं होगा कि अब इस अतिक्रमण को नहीं रोका गया तो इस तालाब का अस्तित्व आने वाले वर्षों में मिट जायेगा. सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि कतिपय लोगों ने पीलर गाड़ कर पुलनुमा निर्माण करा दिया है. लोगों का कहना है कि पुलनुमा निर्माण कराये जाने से बरसात का पानी लोगों के घरों में घुस जाता है.

हजारीबाग

  • नोटिस में जमीन का रकबा और नक्शा का नहीं होता है जिक्र

नाले पर ही बना दिया मकान

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alt="" width="600" height="400" /> हजारीबाग के सारले मौजा में जीएम लैंड की लूट मची हुई है. जमीन को बचाने के लिए जिला प्रशासन ने कई जगह बोर्ड लगा कर यह बताया है कि इस जमीन की खरीद-बिक्री नहीं की जा सकती है. यह जमीन सरकारी है. थाना नंबर 159 खाता नंबर 92 प्लॉट नंबर 72 पर एक सरकारी बोर्ड भी लगाया गया है. इसमें कहा गया है कि जमीन गैरमजरूआ खास है. इस जमीन की खरीद-बिक्री नहीं की जा सकती है और न ही इस जमीन पर निर्माण कार्य किया जा सकता है. अगर कोई व्यक्ति निर्माण कार्य करेगा, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी. [caption id="attachment_671484" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/06/AAM-SUCHNA-1_0.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> सारले मौजा पर कई जगह लगा है सरकारी नोटिस[/caption]

अधिकारी ही जमीन बचाना नहीं चाहते : राजेश मिश्रा

इस पर आरटीआई एक्टिविस्ट राजेश मिश्रा कहते हैं कि जिला प्रशासन यह स्पष्ट करे कि नोटिस बोर्ड पर जमीन कितनी है और उसका नक्शा अंकित नहीं है. अगर जमीन और नक्शा नोटिस बोर्ड पर अंकित किया जाए, तो इसका व्यापक असर पड़ेगा और लोगों को जानकारी भी सही मिल पाएगी. प्रशासनिक पदाधिकारी ही नहीं चाहते हैं कि सरकारी जमीन को बचाया जाए. उनका कहना है कि सारले मौजा में जमीन को लेकर कई गड़बड़ियां सामने आई हैं. आरटीआई के जरिए जानकारी प्राप्त की गई है. लेकिन आज तक प्रशासन का बुलडोजर इन इलाकों में नहीं चला.

घर बन गए पर अंचल को जानकारी नहीं

राजेश मिश्रा का यह भी कहना है नाला के प्रवाह क्षेत्र में बड़े-बड़े घर बन जाते हैं और अंचल को जानकारी नहीं हो पाती है. प्रशासनिक पदाधिकारी मौन बैठ जाते हैं. आखिर इसके पीछे का खेल क्या है. उनका यह भी कहना है कि एक बार जब भवन बनकर तैयार हो जाता है, तो फिर उसे तोड़ने में कानूनी अड़चनें भी सामने आ जाती है. इस कारण प्रशासन को कम से कम अपनी सरकारी जमीन बचाने के लिए मुस्तैद रहना चाहिए. नहीं तो इसी तरह भू-माफिया जमीन पर कब्जा करेंगे और फिर उसे औने-पौने दाम में बेच देंगे.

समाप्त हो गया 40 फीट चौड़े नाले का अस्तित्व

झारखंड बनने के बाद हजारीबाग भू-माफिया और जमीन कब्जा के लिए पूरे राज्य भर में सुर्खियों में रहा है. सरकारी जमीन या जलस्रोत लूट लिए गए हैं. आज वहां कंक्रीट के जंगल खड़े हो गए हैं. हजारीबाग का झील वाटर रिचार्ज के लिए भी जाना जाता है. जब बरसाती पानी झील में भर जाता है, तो पानी बाहर निकालने के लिए नाला बनाया गया है. यह नाला पुलिस एकेडेमी के बगल से होते हुए सारले होते हुए कनहरी पहुंच जाता है. वहां बरसाती नदी में जाकर मिल जाता है. लेकिन अब वह नाला नाली के रूप में परिवर्तित हो गया है. 40 फीट चौड़ा नाला का अस्तित्व समाप्त हो गया है. नाला के प्रवाह स्थल पर ही बड़े-बड़े भवन बनकर तैयार हो गए हैं.

नाले के ऊपर बना दिया गया घर, पर नहीं हुई कोई कार्रवाई

पिछले दिनों हजारीबाग वासियों ने जब हंगामा किया तो वहां काम भी रोक दिया गया था. आज भी निर्माणाधीन भवन दिखता है. नाले की जमीन पर घर बना देने से आलम यह है कि बरसात का पानी घरों में घुस जाता है. झील का पानी सड़क पर आ जाता है. इससे अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिलता है. नाले के ठीक ऊपर एक घर भी बना दिया गया है. लेकिन जमीन अतिक्रमण को लेकर किसी भी पदाधिकारी ने संजीदगी नहीं दिखाई. समाज के इक्के-दुक्के लोग जिसमें राजेश मिश्रा, चित्तरंजन प्रसाद, मनोज गुप्ता, स्वर्गीय टीपी सिंह ने हो-हल्ला किया और पदाधिकारियों से मिले. उसका ही नतीजा है कि आज कुछ इलाका बचा हुआ है.

जलस्रोत से भी अतिक्रमण हटाने की तैयारी

जलस्रोत के अतिक्रमण और कब्जा को लेकर उस इलाके को मुक्त कराने के लिए भी अभियान शुरू करने की बात कही जा रही है. अपर समाहर्ता राकेश रोशन ने जानकारी दी कि आने वाले दिनों में जिस तरह कटकमदाग इलाके में प्रशासन का बुलडोजर चला है, उसी तरह जल स्रोत को मुक्त कराने के लिए बुलडोजर चलेगा. तैयारी चल रही है, कभी भी प्रशासन एक्शन में दिख सकता है.

देवघर में भू माफिया ने कुंडा के जलाल तालाब को भर कर बेच डाली जमीन

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alt="" width="600" height="400" /> दो दशक से बाबानगरी में भूमि माफियाओं का वर्चस्व है. इनकी नजर में हर तरह की जमीन बिकाऊ है. फर्जी कागजात के आधार पर इनका धंधा फल-फूल रहा है. लेकिन उनके खिलाफ गंभीरता से कोई आवाज नहीं उठाया जाता है. यदि आवाज उठायी भी जाती है, तो किसी न किसी तरह मैनेज कर लिया जाता है. 1936 से जमीन का सर्वे नहीं हुआ. कोई बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की सूचना भी अब तक सामने नहीं आयी. इसलिए भू-माफिया के हौसले बुलंद हैं. सैकड़ों एकड़ भूमि का कारोबार कर चुके इन माफिया तत्वों की नजर इन दिनों तालाब पर है. सरकारी व निजी जमीन तालाबाें को भर कर जमीन की प्लाटिंग कर बेची जा रही है. कई तालाब बेचे जा चुके हैं, जबकि कई तालाबाें को धीरे-धीरे भरा जा रहा है. ऐसा भी नहीं है कि तालाब भर कर बेचे जाने की जानकारी जिले के संबंधित अधिकारियों को नहीं है. उन्हें सरकारी व निजी जमीन के तालाब भर कर बेचे जाने की जानकारी तो है, पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की जा रही. [caption id="attachment_671487" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/06/Untitled-10-14.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> अफसरों के पास तालाब बचाने के लिए आवेदन दिए गए, पर किसी ने कुछ सुना ही नहीं [/caption] देवघर के वार्ड नंबर 36 में स्थित हतगढ़ मौजा में जलाल तालाब के नाम से प्रसिद्ध तालाब पूरी तरह से खत्म हो चुका है. तालाब कभी 3 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ था, लेकिन अब तालाब का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है. तालाब भर कर जमीन बेच दी गयी और अब तो घर- मकान भी बनकर तैयार हो चुके हैं. स्थानीय गोविंद यादव बताते हैं उनलोगों ने तालाब को बचाने का पूरा प्रयास किया, लेकिन कहीं कोई अधिकारी कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे. पहले लोग इस तालाब में छठ पूजा किया करते थे. यह जमीन हतगड़ मौजा में स्थित है.अभी भी नक्शे में यह तालाब का ही नेचर है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारी न जाने क्यों चुप्पी साधे हुए हैं. हतगड़ मौजा के ही ग्राम प्रधान देव नारायण यादव ने भी तालाब को बचाने के लिए कागजी कार्रवाई की. सीओ से लेकर ऊपर तक के अधिकारियों को आवेदन भी दिया, लेकिन आवेदन पर किसी भी अफसर ने कोई कार्रवाई नहीं की. न तो आवेदन पर किसी तरह को कोई संज्ञान ही लिया. नतीजतन भू-माफिया बेखौफ तालाबों को भर कर बेच रहे हैं और आम लोग घर बनाने की चाहत में अपने जीवन भर की कमाई इनके झांसे में पड़ कर फंसा रहे हैं, क्योंकि उन्हें नहीं पता कि जिस जमीन की खरीदारी उन्होंने की है, वह गलत ढंग से बेच दी गई है. तालाब को भर कर बेचा गया है. जब कबी मामले की जांच होगी, तो जमीन खरीदनेवाले फंसेंगे, उन्हें जमीन काली करनी पड़ेगी. [wpse_comments_template]

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