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छात्र-छात्राओं में खत्म हो रही कंपीटिशन की भावना, भविष्य में करना पड़ेगा मुश्किलों का सामना

Vikash

Ranchi : पूरे एक साल के लॉकडॉउन के बाद स्थिति फिर से सामान्य हो ही रही थी कि कोरोना की दूसरे लहर ने अपना पांव पसारना शुरू कर दिये. ऑनलाइन पढ़ाई के माध्यम से विद्यार्थियों की पढ़ाई हो रही थी. ऐसे में तमाम स्कूल, कोचिंग संस्थान भी छात्रों को पढ़ने के लिए ऑनलाइन का विकल्प लेने लगे थे, मगर जब लोगों ने संभलना शुरू किया तो एक बार फिर सभी व्यापार पर ग्रहण लग गया. वहीं, सरकार ने सीबीएसई की बोर्ड परीक्षाओं के लिए 10वीं और 12वीं के लिए बड़ा फैसला लिया. साथ ही कई अन्य परीक्षाओं के रद्द-स्थगित होने के फैसले के बाद बच्चो में कंपीटिशन की भावना खत्म होती नजर आ रही है.

वही कुछ कोचिंग संस्थान के संचालकों ने कहा कि पिछले साल सभी क्लासेस ऑनलाइन हुए. वहीं कुछ संस्थानों में पढ़ाई नहीं हुई. एक तरफ हर जगह ऑनलाइन पढ़ाई का असर छात्रों पर भी दिखने लगा था. इससे उनके बीच पढ़ाई की भावना खत्म हो गई.

क्या कहते हैं शिक्षक

वहीं एक कोचिंग संस्थान के निर्देशक फैयाज अख्तर ने कहा कि पिछले साल के लॉकडाउन की वजह से विद्यार्थियों को काफी परेशानी हुई है, जिसमें छात्रों ने ऑनलाइन क्लास को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया. उन्होंने बताया कि संक्रमण के डर से विद्यार्थियों का आना 50% घट गया है. ऐसे में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की कक्षाएं करना संभव नहीं हो पा रहा है. अब झारखंड बोर्ड के छात्रों के बीच भी एक असमंजस का विषय बना हुआ है कि परीक्षाएं होंगी भी या नहीं. साथ ही छात्रों का मनोबल भी गिरता नजर आ रहा है. ऐसे में किसी भी परीक्षा में अव्वल होने की दौड़ खत्म हो जाएगी.

भविष्य के लिए कमजोर हो रहे विद्यार्थी रांची के कोचिंग संस्थान की संचालिका पिंकी कुमारी ने बताया की जिस तरह की स्थितियां सामने आ रही हैं, छात्र-छात्राओं के भविष्य में काफी असर पड़ेगा. जो छात्र पढ़ाई में अच्छे हैं, उनका मनोबल टूट रहा है. ऐसे में भविष्य में किसी भी तरह की कॉम्पिटेटिव परीक्षाओं के लिए खुद को उस हिसाब से तैयार नहीं कर पाएंगे, जो कि बहुत ज्यादा चिंता का विषय है. छात्र-छात्राओं के बीच प्रतिस्पर्धा की भावना खत्म होती जा रही है.  

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