alt="" width="300" height="225" /> Jamshedpur : जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय एवं स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता की लड़ाई अब खुलकर सामने आ गई है. जुबिली पार्क सड़क खुलवाने को लेकर शुरू हुई यह लड़ाई सदन तक पहुंच गई है. हालांकि सदन में यह मामला जुबिली पार्क सड़क को लेकर नहीं बल्कि पूर्वी सिंहभूम के सिविल सर्जन डॉ. एके लाल के कारण पहुंचा है. विधायक सरयू राय ने मंत्री बन्ना गुप्ता पर डॉ. एके लाल का बचाव करने, कार्रवाई नहीं करने एवं इस मामले में सदन को गुमराह करने तथा गलत जवाब देने का आऱोप लगाया है. इस संबंध में विधायक ने विधानसभा में मंत्री बन्ना गुप्ता के विरूद्ध विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव रखा, जो विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष विचाराधीन है.
स्वास्थ्य मंत्री एक दोष सिद्ध अधिकारी का बचाव कर रहे हैं
श्री राय ने पत्रकारों को बताया कि स्वास्थ्य मंत्री एक दोष सिद्ध अधिकारी का बचाव करने के लिए नियम, कानून एवं संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन कर रहे हैं. कानून की शपथ लेने वाले मंत्री विधानसभा को उत्तर से भ्रमित करते हैं तो उनके विरूद्ध विशेषाधिकार हनन का मामला चलाना विधिसम्मत है. दोषी को बचाने के लिए नियम-कानून का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति मंत्रिपरिषद में रहने लायक नहीं है. अपने विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव की एक प्रति उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री और एक प्रति विधानसभा के सबसे बड़े विपक्षी दल के मुख्य सचेतक को भी दिया है.विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव में उन्होंने झारखंंड विधानसभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन के नियम-186 का जिक्र किया
प्रस्ताव में उन्होंने झारखंंड विधानसभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन के नियम-186 का जिक्र करते हुए कहा है कि झारखंंड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के मंत्री ने सभा को जानबूझकर गुमराह करने, सभा की अवमानना करने, सभा सदस्य के नाते मेरे विशेषाधिकार का हनन करने, दोष सिद्ध अधिकारी का बचाव करने तथा मंत्री पद पर रहते हुए विधि के विरूद्ध आचरण किया है. जो अवमानना एवं विशेषाधिकार उल्लंघन की कार्रवाई चलाने के लिए पर्याप्त है.2005 में बन्ना गुप्ता एवं डॉ. एके लाल ने समाजवादी पार्टी के सिंबल पर लड़ा था चुनाव
अपने विशेषाधिकार हनन के प्रस्ताव में विधायक सरयू राय ने जमशेदपुर के सिविल सर्जन एवं मंत्री बन्ना गुप्ता के 2005 में एक ही पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ने का जिक्र किया है. डॉ. एके लाल ने जहां बिहार के 80-झंझारपुर विधान सभा सीट से चुनाव लड़ा था. वहीं बन्ना गुप्ता उसी वर्ष 49-जमशेदपुर पश्चिमी विधानसभा से प्रत्याशी थे. इससे स्पष्ट है कि मंत्री का दोष सिद्ध अधिकारी से पुराना राजनीतिक संबंध है. इसी वजह से मंत्री न केवल दोष सिद्ध अधिकारी का बचाव करते रहे हैं, बल्कि उन्हें पदोन्नत एवं प्रोत्साहित भी करते रहे हैं.डॉ. एके लाल ने सरकारी पद पर रहते हुए चुनाव लड़ा
प्रस्ताव में उन्होंने आरोप लगाया है कि मंत्री ने दोष सिद्ध अधिकारी को बर्खास्त करने की कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी करने के बदले फिर से बिहार सरकार को और वहां के संबंधित निर्वाचन पदाधिकारी को कतिपय दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए पत्र भेज दिया है. जबकि इसी तरह का निर्देश स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखंंड सरकार ने (पत्रांक 1008 (3), दिनांक 19.09.2014 और पत्रांक 30(3), दिनांक 12.01.2015 समाहर्त्ता, मधुबनी, बिहार तथा जिला पदाधिकारी सहित जिला निर्वाचन पदाधिकारी को भेजा था. जांच में डॉ. एके लाल के पद पर रहते हुए चुनाव लड़ने का जिक्र है. जिसके लिए उन्हें दोषी ठहराया गया है. जांच अधिकारी ने पहले ही उनकी बर्खास्तगी की अनुशंसा की है. परन्तु उनपर कोई कारवाई नहीं हुई. [wpse_comments_template]
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