Ranchi : सरकार ने JPSC घोटाले से जुड़े अफसरों से संबंधित दस्तावेज ED को नहीं दिये हैं. ED ने JPSC घोटाले में ECIR दर्ज करने के बाद सरकार से आवश्यक दस्तावेज की मांग की थी. ED ने JPSC घोटाले की जांच शुरू करने के बाद राज्य सरकार को पत्र लिखा था और घोटाले में आरोपित अधिकारियों द्वारा दायर किये गये वार्षिक संपत्ति का ब्योरा मांगा था.
राज्य में लागू नियम के तहत सरकारी अधिकारियों को अपनी संपत्ति का ब्योरा हर साल देने पड़ता है. ईडी ने इन अधिकारियों द्वारा योगदान देते समय दिये गये संपत्ति के ब्योरे की भी मांग की थी. इसका उद्देश्य नौकरी में आने से पहले और बाद की संपत्तियों की जांच करना बताया जाता है.
ईडी ने संपत्ति के ब्योरे के अलावा संबंधित अधिकारियों के सेवा काल में बरती गयी अनियमितताएं और उसमें की गयी कार्रवाही की जानकारी भी मांगी थी. लेकिन सरकार ने ED को इसमें से किसी भी मामले की जानकारी नहीं दी.
उल्लेखनीय है कि CBI ने JPSC घोटाले में प्राथमिकी दर्ज करने के करीब 12 साल बाद आरोप पत्र दायर किया था. आरोप पत्र दायर करने की वजह लंबी कानून लड़ाई बतायी जाती है. CBI और JPSC व संबंधित अधिकारियों के बीच कानूनी बिंदुओं पर छिड़ी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक गयी थी.
जांच के दौरान छिड़ी कानूनी जंग में ट्रायल कोर्ट द्वारा जांच की दिशा से संबंधित दिये गये दिशा निर्देश, कॉपियों के फिर से मूल्यांकन जैसे बिंदु सर्वाधिक महत्वपूर्ण रहे. न्यायालय द्वारा कॉपियों की फिर से जांच का आदेश देने और JPSC को सहयोग करने का निर्देश देने के बाद कापियों की जांच हुई. इसमें नंबर बढ़ाने सहित अन्य प्रकार की अनियमितताएं पकड़ में आयीं.
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