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डीलिस्टिंग बिल विधानसभा से पारित करके केंद्र को भेजे सरकार

डीलिस्टिंग बिल को जनजाति सुरक्षा मंच की हुई बैठक, 9 फरवरी को राजभवन के निकट धरना

Ranchi : डीलिस्टिंग बिल को लेकर जनजाति सुरक्षा मंच 9 फरवरी को राजभवन के निकट धरना देगा. इस धरने के माध्यम से सरना धर्म की तरह डीलिस्टिंग बिल को विधानसभा से पारित कराकर केंद्र को भेजे जाने की मांग की जाएगी. यह निर्णय मंगलवार को मंच की अरोग्य भवन में आयोजित बैठक में लिया गया. धरना के बाद एक-एक ज्ञापन राज्यपाल और मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा. बैठक में कहा गया कि जनजाति सुरक्षा मंच सभी से अपील करता है कि आप स्व. कार्तिक उरांव की जन्म शताब्दी वर्ष के अंदर पुनः अपने स्वःधर्म में वापस आयें. अन्यथा आप लोगों का डीलिस्ट होना तय है. अभी वर्तमान समय में ईसाई धर्मावलंबी सभी केंद्र सरकार एवं झारखंड सरकार का आरक्षण रोस्टर पिछड़ी जाति में सूचीबद्ध हैं और वे जनजाति का आरक्षण का लाभ ले रहे हैं, इस पर सरकार अविलंब रोक लगाये. यही कारण है कि इतना-इतना आरक्षण होने के बावजूद भी आदिवासी गरीब व मजदूरी तथा दाई काम करने के लिए मजबूर हैं. वर्तमान समय में जो जाति प्रमाण पत्र निर्गत हो रहा है, उस जाति प्रमाण पत्र में पिता के नाम के साथ-साथ पति का नाम होना अनिवार्य हो, ताकि जनजाति का आरक्षण का लाभ अन्य नहीं ले सकें. डीलिस्टिंग यानि जो जनजाति अपनी धर्म-संस्कृति, परंपरा, रूढ़ि प्रथा छोड़कर इसाई या मुस्लिम धर्म अपना लिए हैं वैसे लोगों को अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर करना है.ऐसे लोगों को अनुसूचित जनजाति का आरक्षण का लाभ न मिले यही डीलिस्टिंग है. बैठक में जनजाति सुरक्षा मंच के मीडिया प्रभारी सोमा उरांव, मेघा उरांव, राजू उरांव, संदीप उरांव, हिंदुआ उरांव, सन्नी उरांव, पिंकी खोया, अंजली लकड़ा, दुर्गा उरांव, मनोज भगत, अशोक मुंडा, अजय भोक्ता, देवकी मुंडा, आरती कुजूर आदि उपस्थित थे. इसे भी पढ़ें : स्वीकार">https://lagatar.in/let-us-accept-that-we-are-part-2-of-hemant-sarkar-champai-soren/">स्वीकार

करते हैं कि हम हेमंत सरकार के पार्ट-2 हैं : चंपाई सोरेन
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