Lagatar Desk : कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने महिला आरक्षण बिल, महंगाई और राजनीतिक मंशा पर को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि जिस तरीके से महिला आरक्षण विधेयक को पेश किया गया, उससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार को पहले से पता था कि यह बिल संसद में पारित नहीं हो पाएगा.
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का उद्देश्य कानून को पास कराना नहीं, बल्कि इसका राजनीतिक लाभ लेना था. प्रियंका गांधी ने कहा कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण मिलना उनका अधिकार है और इसे कोई नहीं रोक सकता.
#WATCH | Delhi: Congress MP Priyanka Gandhi Vadra says, "The way they have brought this bill, the things they have attached to it, the delimitation, the 2011 census, it's very clear that they knew this bill was not going to be able to be passed. They just wanted the political… pic.twitter.com/TQo2dP2eLC
— ANI (@ANI) April 18, 2026
प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार से मांग की कि 2023 में पारित किए गए महिला आरक्षण कानून को बिना देरी लागू किया जाए और और आवश्यक बदलावों के साथ इसे 2029 तक प्रभावी बनाया जाए. उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष और इंडिया गठबंधन की सभी पार्टियां इस प्रस्ताव का पूरा समर्थन करेंगे.
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार अंतरराष्ट्रीय दबाव में काम कर रही है और हाल के कई फैसले इसी का संकेत देते हैं. उन्होंने कहा कि देश में महंगाई बढ़ रही है और इसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर पड़ रहा है, क्योंकि घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ बढ़ती कीमतों का बोझ भी उन्हीं पर आता है.
उन्होंने सरकार की नीतियों और नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता अब जागरूक हो चुकी है और सच्चाई समझ रही है. कांग्रेस सांसद के मुताबिक, महिलाओं का भरोसा सरकार से लगातार कम हो रहा है और सरकार के दावों पर विश्वास करना मुश्किल है.
#WATCH | Delhi: Congress MP Priyanka Gandhi Vadra says, "The way they have brought this bill, the things they have attached to it, the delimitation, the 2011 census, it's very clear that they knew this bill was not going to be able to be passed. They just wanted the political… pic.twitter.com/TQo2dP2eLC
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गौरतलब है कि शुक्रवार को लोकसभा में इस विधेयक पर लंबी बहस के बाद वोटिंग हुई. कुल 528 सांसदों ने मतदान किया, जिसमें 298 ने समर्थन और 230 ने विरोध में वोट दिया. हालांकि, बिल को पारित करने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका, जिसके कारण यह प्रस्ताव गिर गया.
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