[caption id="attachment_535818" align="alignleft" width="150"]
https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/01/Untitled-10-copy-15-150x150.jpg"
alt="" width="150" height="150" /> डॉ माया प्रसाद[/caption] आज 26 जनवरी है. इतिहास की एक अविस्मरणीय तिथि. सदियों पुरानी पराधीनता के बंधनों को काटकर भारतीय गणतंत्र के अभ्युदय का पावन दिन. राष्ट्रकवि दिनकर के शब्दों में यह विश्व के सबसे विराट गणतंत्र के अभ्युदय का दिन है. राष्ट्र वेदी पर असंख्य वीरों के प्राणोत्सर्ग का प्रतिफल है 26 जनवरी. सुखद संयोग यह कि आज ही वाग्देवी की शुचि साधना का आध्यात्मिक पर्व भी है. कलाकार, मसिजीवी और छात्र समुदाय उत्साह और उमंग के पारावार में डूब उतरा रहे हैं. विद्या की, ज्ञान की अधिष्ठात्री शुभ्रवसना शारदा के मृण्मय स्वरूप की उपासना में व्यस्त है समग्र सनातन भारतीय समाज. हम में से बहुतों के लिए यह तिथि एक विशेष कारण से भी उल्लेखनीय है.
https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/01/Untitled-9-copy-16.jpg"
alt="" width="1200" height="800" /> हिंदी के महाप्राण कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जन्मतिथि है वसंत पंचमी. यद्यपि इस तिथि को लेकर विवाद है. गंगा प्रसाद पांडेय, राहुल सांकृत्यायन, डा बच्चन सिंह और आदरणीय जानकी वल्लभ शास्त्री के अनुसार, वसंत पंचमी निराला जी की जन्मतिथि है तो कई अन्य मूर्धन्य विद्वानों की राय में इस तिथि का चयन स्वयं कवि श्री ने किया है. इस विवाद से परे मैं युग प्रवर्तक कवि के कृतित्व में ऋतुराज वसंत और शारदोत्सव वसंत पंचमी के उजागर महत्व को रेखांकित करने की कोशिश कर रही हूं. वसंत और पावस कवियों की सर्वाधिक प्रिय ऋतु मानी गयी है. आज केवल वसंत की सुरम्य वीथियों में विचरें. निराला के लिए वसंत जीवन जगत में प्रसरित चिरकालिक कालिमा का, जड़ता का उच्छेद कर उसे निर्मल दर्पण बनाने का ऋतु है. कवि जीवन का निरुपाया-निरुद्देश्यता का परिहार कर उसे अर्थगर्भ और सोद्देश्य बनाता है वसंत. प्रकृति और चेतना के सायुज्य का उत्सव यह रागमय ऋतु.
alt="" width="150" height="150" /> डॉ माया प्रसाद[/caption] आज 26 जनवरी है. इतिहास की एक अविस्मरणीय तिथि. सदियों पुरानी पराधीनता के बंधनों को काटकर भारतीय गणतंत्र के अभ्युदय का पावन दिन. राष्ट्रकवि दिनकर के शब्दों में यह विश्व के सबसे विराट गणतंत्र के अभ्युदय का दिन है. राष्ट्र वेदी पर असंख्य वीरों के प्राणोत्सर्ग का प्रतिफल है 26 जनवरी. सुखद संयोग यह कि आज ही वाग्देवी की शुचि साधना का आध्यात्मिक पर्व भी है. कलाकार, मसिजीवी और छात्र समुदाय उत्साह और उमंग के पारावार में डूब उतरा रहे हैं. विद्या की, ज्ञान की अधिष्ठात्री शुभ्रवसना शारदा के मृण्मय स्वरूप की उपासना में व्यस्त है समग्र सनातन भारतीय समाज. हम में से बहुतों के लिए यह तिथि एक विशेष कारण से भी उल्लेखनीय है.
alt="" width="1200" height="800" /> हिंदी के महाप्राण कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जन्मतिथि है वसंत पंचमी. यद्यपि इस तिथि को लेकर विवाद है. गंगा प्रसाद पांडेय, राहुल सांकृत्यायन, डा बच्चन सिंह और आदरणीय जानकी वल्लभ शास्त्री के अनुसार, वसंत पंचमी निराला जी की जन्मतिथि है तो कई अन्य मूर्धन्य विद्वानों की राय में इस तिथि का चयन स्वयं कवि श्री ने किया है. इस विवाद से परे मैं युग प्रवर्तक कवि के कृतित्व में ऋतुराज वसंत और शारदोत्सव वसंत पंचमी के उजागर महत्व को रेखांकित करने की कोशिश कर रही हूं. वसंत और पावस कवियों की सर्वाधिक प्रिय ऋतु मानी गयी है. आज केवल वसंत की सुरम्य वीथियों में विचरें. निराला के लिए वसंत जीवन जगत में प्रसरित चिरकालिक कालिमा का, जड़ता का उच्छेद कर उसे निर्मल दर्पण बनाने का ऋतु है. कवि जीवन का निरुपाया-निरुद्देश्यता का परिहार कर उसे अर्थगर्भ और सोद्देश्य बनाता है वसंत. प्रकृति और चेतना के सायुज्य का उत्सव यह रागमय ऋतु.
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