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स्वास्थ्य विभाग ने विधानसभा को अधूरी जानकारी देकर फार्मेसी काउंसिल की गड़बड़ी पर पर्दा डाला

LAGATAR EXPOSE

Ranchi : स्वास्थ्य विभाग ने विधायक सरयू राय के अल्पसूचित सवाल के जवाब में अधूरी जानकारी देकर फार्मेसी काउंसिल की गड़बड़ी पर पर्दा डाला है. विधायक ने फार्मेसी काउंसिल के सिलसिले मे तीन सवाल उठाये थे. स्वास्थ्य विभाग ने अपने जवाब में प्रशांत पांडे को सिर्फ छह महीना के लिए काउंसिल का रजिस्ट्रार नियुक्त किये जाने की बात स्वीकार की. लेकिन छह महीने के लिए नियुक्त रिजस्ट्रार के अब तक कार्यरत रहने के मुद्दे पर सदन को अधूरी जानकारी दी. वर्ष 2026 में डिप्लोमा-इन-फार्मेसी परीक्षा समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति के मामले को 2019 के आदेश का हवाला देकर टाल दिया.

 

उल्लेखनीय है कि विधायक सरयू राय ने फार्मेसी काउंसिल और परीक्षा समिति के मामले में तीन सवाल उठाया था. उन्होंने पहले सवाल यह पूछा था कि क्या छह महीने के लिए रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त प्रशांत पांडेय अब तक इस पर कार्यरत हैं? उन्होंने दूसरे सवाल के सहारे यह जानना चाहा था कि क्या 19-2-2026 को कार्यालय आदेश जारी कर किसी अयोग्य व्यक्ति को परीक्षा समिति का अध्यक्ष बना दिया गया है. तीसरा सवाल अब तक नियमित रजिस्ट्रार की नियुक्ति नहीं होने और अयोग्य व्यक्ति को परीक्षा समिति का अध्यक्ष नियुक्त करने वालों के ख़िलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई.

 

विधानसभा में पूछे गये इन सवालों का जवाब स्वास्थ्य विभाग से मांगा गया. स्वास्थ्य विभाग ने विधानसभा की तीनों सवाल का जवाब लिख कर भेजा. पहले सवाल के जवाब में स्वास्थ्य विभाग ने यह स्वीकार किया कि प्रशांत पांडेय की  नियुक्ति 14-10-2024 को औपबंधिक तौर पर छह महीने के लिए किया गया था. विभाग ने प्रशांत पांडेय के छह महीने का कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद अब तक कार्यरत रहने के मुद्दे को सीधे तौर पर स्वीकार नहीं किया. इसके बदले विभाग ने यह कहा कि नियमित रजिस्ट्रार की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है. विभाग के जवाब का मतलब यह है कि छह महीने के लिए नियुक्त रजिस्ट्रार अब तक कार्यरत है और फार्मेसी काउंसिल तदर्थ व्यवस्था के तहत चल रहा है.

 

यहां यह बात उल्लेखनीय है कि प्रशांत पांडेय को रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त करने के लिए हुई कागजी प्रक्रिया के दौरान विभागीय सचिव अजय कुमार सिंह ने तत्कालीन विभागीय मंत्री बन्ना गुप्ता को फाईल भेजी. इसमें सचिव ने लिखा कि अधिकतम छह माह के लिए औपबंधिक नियुक्ति करने का निर्णय लिया जा सकता है. तथा छह माह के भीतर निबंधक द्वारा विधिवत पर्षद का गठन कर लिया जायेगा. सचिव के इस प्रस्ताव पर तत्कालीन मंत्री ने सहमति दी. इसके बात प्रशांत पांडेय को औपबंधिक रूप से छह महीने के लिए रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त किया गया. विभाग द्वारा किये गये इस फैसले के आलोक में छह महीने के अंदर झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल के गठन की प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेवारी प्रशांत पांडेय की थी. लेकिन वह अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद खुद ही इस पद पर काबिज़ हैं.

 

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संचिका पर तत्कालीन विभागीय सचिव का मंतव्य.

 

सरयू राय का दूसरा सवाल डिप्लोमा-इन-फार्मेसी परीक्षा समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति से संबंधित था. विभाग ने 2026 में हुई इस नियुक्ति के मुद्दे पर वर्ष 2019 के एक आदेश का हवाला दिया है. 2019 को जारी आदेश में स्टेट फार्मेसी काउंसिल के वरीय सदस्य को परीक्षा समिति का अध्यक्ष बनाया गया था. जवाब में यह भी कहा गया कि फार्मेसी काउंसिल द्वारा वरीयतम सदस्य का चुनाव कर विभागीय अनुमोदन के लिए प्रस्ताव मिला था. इस पर विभागीय सहमति दी गयी है. लेकिन जवाब में वरीयता सदस्य के नाम की जानकारी नहीं दी गयी है. सिर्फ इतना ही नहीं परीक्षा परिषद के अध्यक्ष के योगदान से संबंधित कार्यालय आदेश में भी परीक्षा समिति के अध्यक्ष के नाम का उल्लेख नहीं किया गया है. इस तरह विभाग ने उस वरीय सदस्य का नाम नहीं बताया जिसे परीक्षा समिति का अध्यक्ष बनाया गया है. सरकार ने अपने जवाब में अध्यक्ष की नियुक्ति से संबंधित अधिसूचना की जानकारी भी नहीं दी है. हमेशा परीक्षा समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति के मामले में विभाग द्वारा अधिसूचना जारी की जाती रही है.

 

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डिप्लोमा इन फार्मेसी के प्राचार्य/निदेशक के योगदान से संबंधित दस्तावेज.

विधायक ने तीसरे सवाल के सहारे यह जानना चाहा था कि 17 महीने बाद भी फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार के पद पर नियमित नियुक्ति नहीं करने और परीक्षा परिषद में अध्यक्ष के पद पर नियुक्ति में हुई गड़बड़ी के मामले में दोषी लोगों पर सरकार कार्रवाई करेगी या नहीं? विभाग द्वारा विधानसभा को भेजे गये जवाब में  कहा गया कि “ उपरोक्त खंडों में स्थिति स्पष्ट कर दी गयी है. यानी सरकार ने पूरे प्रकरण में किसी को दोषी नहीं माना है और किसी पर कार्रवाई नहीं होगी.

 

क्या है नियम

झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल के सदस्यों में से ही किसी को परीक्षा समिति का अध्यक्ष बनाने का नियम है. सरकार ने 2019 में वरीयता सदस्य को परीक्षा समिति का अध्यक्ष बनाने का फैसला किया. लेकिन वरीयता निर्धारित करने का कोई मापदंड निर्धारित नहीं किया. बताया जाता है कि 19 फरवरी 2026 को जारी आदेश के आलोक में रणधीर गुप्ता परीक्षा समिति के अध्यक्ष के रूप में काम करने लगे हैं. इस प्रकरण मे सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि वह फार्मेसी काउंसिल के इलेक्टेड मेंबर थे. इलेक्टेड मेंबर का कार्यकाल पांच साल का होता है. रणधीर सहित सभी इलेक्टेड छह मेंबरों का कार्यकाल 2025 में समाप्त हो गया है.

 

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इलेक्टेड मेंबर के कार्यकाल से संबंधित दस्तावेज.

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