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कोविड से मृत लोगों के शव परिजनों को देने की याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा विस्तृत शपथपत्र

 

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने कोविड-19 से मरने वालों का अंतिम संस्कार  धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार कराने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर राज्य सरकार से 17 जून तक विस्तृत प्रति शपथपत्र मांगा है. इस मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायधीश जस्टिस डॉ रविरंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने सरकार को  हलफनामा देने का आदेश दिया.

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परिजनों को नहीं दिये जाते शव, जिला प्रशासन कर देता है अंत्येष्टि

याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रार्थी की अधिवक्ता अपराजिता भरद्वाज ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक कोरोना से मरनेवालों के शव परिजनों को दिये जा सकते हैं. लेकिन जमशेदपुर के TMH अस्पताल समेत राज्य के कई अस्पताल ऐसा नहीं कर खुद ही शवों की अंत्येष्टि कर दे रहे हैं. इस जनहित याचिका में TMH  अस्पताल को भी पार्टी बनाया गया है. राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता आशुतोष आनंद ने अदालत में कहा कि ऐसा नहीं है. उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि उनकी जानकारी में एक व्यक्ति को उनके परिजनों का शव अस्पताल ने दिया. इस पर हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि यहां आम आदमी की बात हो रही है. हमें आम नागरिकों के बारे में सोचना है.

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जमशेदपुर की संस्था ने दायर की है याचिका, अगली सुनवाई 17 जून को

 बता दें कि जमशेदपुर के तितवंतो देवी महिला कल्याण संस्थान के सचिव द्वारा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी है. इसमें कहा गया है कि जमशेदपुर में कोविड-19 संक्रमित मृतकों के परिजनों को उनके धार्मिक रीति रिवाज के अनुसार समुचित ढंग से अंतिम संस्कार नहीं करने दिया जा रहा है. जमशेदपुर प्रशासन जैसे -तैसे शवों का अंतिम संस्कार करा दे रहा है, जो  गलत है. सुनवाई के दौरान अदालत को जानकारी दी गयी कि जमशेदपुर में टीएमएच हॉस्पिटल में जिन संक्रमितों की मौत होती है,  उनके शव परिजनों को नहीं देकर जमशेदपुर प्रशासन को दे दिये जाते हैं. जमशेदपुर प्रशासन उनके परिजन को सूचना तो देते हैं कि अमुक तारीख को अमुक स्थान पर अंतिम संस्कार किया जायेगा. लेकिन परिजनों को पता नहीं चल पाता है कि वास्तव में ऐसा हुआ अथवा नहीं. साथ ही जो परिजन शव का अंतिम संस्कार कराना चाहते हैं, अथवा शव लेना चाहते हैं, उन्हें न तो शव दिया जाता है न अंत्येष्टि में उचित समय पर भाग लेने दिया जाता है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 17 जून को होगी.

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