: ब्राउन शुगर के कारोबार में शामिल मॉडल समेत पांच गिरफ्तार [caption id="attachment_443290" align="alignleft" width="213"]
alt="समाजसेवी रवि कुमार डे" width="213" height="300" /> समाजसेवी रवि कुमार डे[/caption] एक ओर अहिंसा के पुजारी कहे जाने वाले टाना भगत अपने हाथों में तिरंगा, शंख एवं घंटी लेकर महात्मा गांधी के अनुयायी होने का दावा करते हैं, तो दूसरी ओर युवाओं का नेतृत्व हत्या एवं लूटपाट जैसे संगीन मामलों में आरोपितों के हाथों में दिया जा रहा है. एक सोची समझी रणनीति के तहत अब अहिंसक आंदोलन का नेतृत्व पेशेवरों के हाथों में थमा दिया गया है. टाना भगतों द्वारा न्यायालय परिसर में किये गये उत्पात पर स्थानीय समाजसेवी रवि कुमार डे ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि ये आंदोलनकारी नहीं उपद्रवी हैं. इसके पहले भी इन्होंने रेल रोको व समाहरणालय बंद करो जैसी गतिविधियों को अंजाम दिया है. श्री डे ने आगे कहा है कि एक ओर प्रशासन के द्वारा इन्हें अहिंसक और महात्मा गांधी के निरीह अनुयायी बोलकर आर्थिक सहायता की जाती है, तो दूसरी ओर इनका एक समूह भारत के संविधान के खिलाफ आंदोलन कर रहा है. श्री डे ने कहा है कि पिछले दिनों विशेष सहायता के तहत टाना भगतों को चार ट्रैक्टर देने की घोषणा जिला प्रशासन ने किया था. लेकिन बाद में टाना भगत दस ट्रैक्टर लेने की जिद पर अड़ गये और काफी हंगामा मचाया. परेशान होकर प्रशासन को फंड डायवर्ट कर दस ट्रैक्टर देना पड़ा था. इसी प्रकार सैकड़ों टाना परिवारों को दुधारू पशु नि:शुल्क उपलब्ध कराया गया. श्री डे ने कहा है कि इनकी अवांछित मांगों को पूरा करने की प्रशासन की प्रवृत्ति ही इन्हें इस हद तक पहुंचा दिया. अब इनका एक तबका न्याय के मंदिर पर भी हमला करना शुरू कर दिया है, यह सर्वथा अनुचित है. इसे भी पढ़ें : ईडी">https://lagatar.in/ed-seeks-report-from-jharkhand-police-against-mining-firm-businessman-vinod-and-many-other-officers/">ईडी
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