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झारखंड के ‘भूले-बिसरे’ गांवों में सौर ऊर्जा की रोशनी, बदल रही है जिंदगी

  • JREDA की बड़ी पहल वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी और आसपास के 37 गांवों को किया रोशन
Ranchi: झारखंड के दूरदराज के गांवों में अब सौर ऊर्जा के जरिए नई उम्मीद की किरण पहुंच रही है. खासकर लावालोंग वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी और आसपास के इलाकों में रहने वाले आदिवासी समुदाय के लिए यह पहल जीवन बदलने वाली साबित हो रही है. जहां पहले सूर्यास्त के बाद सन्नाटा और डर का माहौल रहता था, वहीं अब सोलर लाइट्स ने लोगों के जीवन में उजाला भर दिया है.
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इन इलाकों में लंबे समय तक बिजली की सुविधा नहीं थी. लोग मिट्टी के दीये या लालटेन के सहारे जीवन बिताते थे. लेकिन अब सोलर माइक्रो-ग्रिड और एलईडी लाइट्स के जरिए घर-घर रोशनी पहुंच रही है. इससे न केवल दैनिक जीवन आसान हुआ है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और महिलाओं के कामकाज पर भी सकारात्मक असर पड़ा है.

 


स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पहले अंधेरे के कारण शाम होते ही सभी काम बंद हो जाते थे, लेकिन अब बच्चे रात में भी पढ़ाई कर पा रहे हैं और महिलाएं घर के काम आसानी से कर रही हैं. गांवों में मोबाइल चार्जिंग की सुविधा भी उपलब्ध हो गई है, जिससे लोगों का संपर्क दुनिया से बेहतर हुआ है.

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झारखंड सरकार और विभिन्न एजेंसियों के सहयोग से इस क्षेत्र में सौर ऊर्जा परियोजनाओं को तेजी से लागू किया जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के हजारों गांवों में सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं और कई जगहों पर माइक्रो-ग्रिड के जरिए नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है.

 


इस पहल का सबसे बड़ा फायदा उन इलाकों को मिला है, जहां पारंपरिक बिजली पहुंचाना मुश्किल था. सौर ऊर्जा ने न सिर्फ अंधेरे को दूर किया है, बल्कि इन ‘भूले-बिसरे’ गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का काम भी किया है.

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जेरेडा की पहल 37 गांवों में दूर हुआ अंधेरा


झारखंड सरकार के ग्रामीण विद्युतीकरण अभियान के तहत झारखंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (JREDA) ने राज्य के 37 सुदूरवर्ती गांवों में सोलर आधारित बिजली पहुंचाकर है. इन गांवों में अब सोलर मिनी-ग्रिड के जरिए लोगों को बिजली मिल रही है, जिससे उनकी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है.


इस योजना के तहत कुल 377 सोलर मिनी-ग्रिड स्थापित किए गए हैं, जिनसे 15,295 किलोवाट घंटा ऊर्जा उत्पादन हो रहा है. कुल स्थापित क्षमता 7070.5 किलोवाट पीक है. इस पहल से खासकर उन इलाकों को फायदा हुआ है, जहां पारंपरिक बिजली पहुंचाना मुश्किल था.


सोलर बिजली पहुंचने से गांवों में न सिर्फ रोशनी आई है, बल्कि छोटे व्यवसाय, पढ़ाई और सुरक्षा व्यवस्था में भी सुधार हुआ है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अब वे रात में भी काम कर पा रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई भी बेहतर हो रही है. हालांकि  कुछ क्षेत्रों में रखरखाव और सुरक्षा जैसी चुनौतियां भी सामने आई हैं. 

जानें कहां-कहां लगा है सोलर मिनी-ग्रिड

प्रमंडल जिला   कुल सोलर मिनी-ग्रिड (संख्या) कुल उत्पादन (kWh)  स्थापित क्षमता (kWp)
उ. छोटानागपुर चतरा  72  2860 1377
उ. छोटानागपुर हजारीबाग 17  460 195
संथाल परगना
दुमका
 3
178
 85
संथाल परगना
साहिबगंज
18
 3711
 1240.5
संथाल परगना
 गोड्डा
83 
7543
1720
पलामू
 गुमला
42
1854 
970
पलामू
लातेहार
44
1451
745
पलामू 
गढ़वा
 30
781
 864
द. छोटानागपुर 
खूंटी 
14 
340
170
द.छोटानागपुर
लोहरदगा
14 
280
140
द.छोटानागपुर
 रांची
 6
180
90
द.छोटानागपुर
 सिमडेगा
 7
 260
154
  कुल
 377
15295
7070.5
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