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तप-धर्म का प्रमुख उद्देश्य चित्त की मलिन वृत्तियों का उन्मूलन : माताजी

Hazaribag : पर्यूषण पर्व के सातवें दिन मंगलवार को बड़ा बाजार जैन मंदिर में आर्यिका 105 प्रतिभा मति माताजी एवं आर्यिका 105 सुयोग मति माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि तप-धर्म का प्रमुख उद्देश्य चित्त की मलिन वृत्तियों का उन्मूलन है. हमारा जीवन इच्छाओं का ``अक्षय पात्र`` है और उसको पूरा करने के लिए हम अपने जीवन में कितनी मुश्किलें खड़ी कर लेते हैं.

तप के बिना कुछ भी नहीं मिलता

उन्होंने कहा कि संसार में तप के बिना कुछ नहीं मिलता और ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसे तप से प्राप्त न किया जा सके. मात्र घर परिवार छोड़कर जंगल में जाना तप नहीं है. तप का लक्ष्य कर्मक्षय और इच्छाओं का विरोध है. इस लक्ष्य के साथ जो अंतरंग और बहिरंग प्रकार की तपस्या करता है वह कर्मों की निर्जरा करने में भी सामर्थ्य होता है. तप है, तपना, प्रयास करना, मेहनत करना, एक बच्चा जो परीक्षा की तैयारी कर रहा है, वह भी तप है. देश का हर नागरिक जो अपने कर्तव्य का निष्ठापूर्वक पालन करता है, वह तप करता है और जब भी हम अपने लक्ष्य पर चलते हैं, तो रास्ते में प्रलोभन भी आते हैं. उन पर प्रलोभन में अधिकतर लोग फिसल जाते हैं. परंतु जो अपने आप को स्थिर रखता है, वही स्थितप्रज्ञ है. वही योगी बन सकता है. इसे भी पढ़ें–मंत्री">https://lagatar.in/minister-mithilesh-thakur-went-to-rims-and-assured-of-government-help-to-sunita/">मंत्री

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सांसारिक वस्तुओं की कामना मिथ्या तप

माता जी ने कहा कि सांसारिक वस्तुओं की कामना को लेकर जो तप करता है, वह मिथ्या तप है. इच्छा की निरोध को तप कहते हैं. विषय कषायो का निग्रह करके छह अंतरंग, छह बहिरंग कुल 12 प्रकार के तप को चित्त लगाना उत्तम तप धर्म है. जिस प्रकार पत्थर से सोना बनने के लिए उसे 16 बार आग में तपना पड़ता है, उसी प्रकार आत्मा से परमात्मा बनने के लिए कठिन तप करना होता है.

जैन मंदिरों में अभिषेक और शांतिधारा

इससे पहले बॉडम बाजार और बड़ा बाजार दोनों जैन मंदिरों में अभिषेक, शांतिधारा और नित्य पूजन हुआ. बड़ा बाजार जैन मंदिर जी में आर्यिका 105 प्रतिभा मति माताजी एवं आर्यिका 105 सुयोग मति माताजी के सानिध्य में 1008 शांतिनाथ एवं 1008 पार्श्वनाथ भगवान की पूजा हुई. साथ ही दशलक्षण विधान में उत्तम तप धर्म की पूजा एवं प्रवचन हुआ. शांति धारा करने का अवसर विमल विकास बड़जात्या एवं पाठशाला के बच्चों को प्राप्त हुआ. पुण्य अर्जक बनने का सौभाग्य धर्मचंद-उषा देवी विनायका को मिला. माता जी को जिनवाणी देने का सौभाग्य शांति देवी अजमेरा एवं सुमती पाटनी को प्राप्त हुआ. इसे भी पढ़ें–जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-fashion-show-of-fast-step-india-on-18th-september/">जमशेदपुर

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सामूहिक व्रत और पर्यूषण पर्व

संध्या दोनों मंदिरों में महाआरती हुई. रात्रि में पंडित दीपक शास्त्री का प्रवचन एवं जैन पाठशाला में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए. पावन वर्षा योग के मुख्य संयोजक निर्मल जैन गंगवाल ने बताया कि इस वर्ष पर्यूषण पर्व पर राजकुमार पाटनी एवं साक्षी पाटोदी ने दस लक्षण व्रत कर रहे हैं. उनकी अनुमोदना के लिए समाज की ओर से सात सितंबर को विनती रखी गई है. समाज के अध्यक्ष धीरेंद्र सेठी और महामंत्री पवन अजमेरा ने बताया कि समाज में सभी लोग अभिषेक सामूहिक एवं व्रत उपवास के साथ पर्यूषण पर्व मना रहे हैं. सभी में काफी उत्साह है. [wpse_comments_template]

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