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विश्व आदिवासी दिवस का मूल घोषणा पत्र देश में लागू हो : भुवनेश्वर केवट

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Ranchi : विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर बजरा, हेहल में आदिवासी संगठनों ने आदिवासी अधिकार रैली निकाली. बजरा के आदिवासी मैदान से चुनवा टोंगरी तक सफेद साड़ी लाल पाड़ पहने पारंपरिक परिधान में गांव की महिलाएं और पुरुष अपने कंधे में हर जुआंठ, हल और तीर धनुष लेकर बड़ी संख्या में अखड़ा पहुंचे. जहां पूजा प्रार्थना के बाद सभा की गई. अधिकार सभा के पूर्व जल जंगल जमीन और आदिवासी अधिकारों के लिए जारी आंदोलन में शहीद हुए लोगों को मौन श्रृद्धांजलि दी गयी. अधिकार सभा में आदिवासी पड़हा समाज के अध्यक्ष लक्ष्मी कांत भगत ने कहा कि संविधान प्रदत आदिवासी अधिकारों की रक्षा आज समय की जरूरत है, जिस तरह से पेड़ों की कटाई हो रही है, पर्यावरण का संतुलन अनियंत्रित होगा, जिसकी कीमत दुनिया को चुकानी होगी.

घोषणाओं को देश में लागू नहीं किया गया

भुवनेश्वर केवट ने कहा कि आदिवासी दिवस की शुरूआत हुए 28 वर्ष बीत जाने के बावजूद अबतक सरकार सिर्फ घोषणाएं  करती रही है. अभी तक आदिवासी दिवस के मुख्य पत्र की घोषणाओं को देश में लागू नहीं किया गया है. आदिवासियों को सनातन बनाकर उनकी पहचान को मिटाने की कोशिश की जा रही है. अगर ऐसा हुआ तो आदिवासियों के हाथ से सबकुछ छिन जाएगा. महिला सरना समिति की अध्यक्ष मेवा उरांव ने कहा कि आजादी के 75 सालों के बाद भी आदिवासी महिलाओं को खेती करने के लिए हल जोतने पर हमला किया जा रहा है. सभा की अध्यक्षता राजेश लिंडा ने की, जबकि सभा को 22 पड़हा सामाजिक उत्थान समिति के बुधवा उरांव, शनीचरवा मुंडा, सोमा मुंडा, लक्ष्मी कांत भगत, निर्मल एक्का, हरिहर भगत, मनागलदानी, बिमला तिर्की, शीतल बाड़ा, आदिवासी संघर्ष मोर्चा के महावीर मुंडा, बिरेंद्र उरांव, लेलो तिर्की ने संबोधित किया.

लिया गया संकल्प

कार्यक्रम के अंत में आदिवासी दिवस पर सात सूत्री संकल्प पत्र का सामूहिक पाठ किया गया. जिसमें देश के संविधान में प्रदत अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों की रक्षा करने ,आदिवासी समुदाय के अस्तित्व, पहचान, संस्कृति की रक्षा करने, झारखंड के जल जंगल जमीन और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए संगठित होकर जीवन पर्यंत संघर्ष करने, शराब हंडिया या तंबाकू समेत कोई अन्य नशा का सेवन नहीं करने, अपने पूर्वजों की पुश्तैनी और खतियानी जमीन भूमि दलालों के हाथों नहीं बेचने,आदिवासियों की अलग पहचान के लिए सरना धर्म कोड लागू करने, आदिवासी दिवस के मुख्य घोषणा पत्र को पूरे देश में लागू करने का संकल्प लिया गया. इसे भी पढ़ें - झारखंड">https://lagatar.in/tribal-day-celebrated-in-jharkhand-agitator-smriti-bhawan/">झारखंड

आंदोलनकारी स्मृति भवन में मनाया गया आदिवासी दिवस
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