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हजारीबाग-बड़कागांव रोड के लोगों का दर्द : साहब पुलिस के पहुंचते पहुंचते तो अपराधी कांड कर निकल लेते हैं

बड़कागांव रोड पर अगर होता थाना तो कम हो सकती थी घटना-दुर्घटना Pramod Upadhyay Hazaribagh : हजारीबाग से बड़कागांव रोड की दूरी करीब 22 किलोमीटर है और इस बीच एक भी थाना और पुलिस पिकेट नहीं है. वहीं बड़कागांव और कटकमदाग थाना की दूरी लगभग 30 किलोमीटर पड़ती है. ऐसे में कटकमदाग का एरिया बड़कागांव के ओदरना घाटी तक पड़ता है, जिसकी दूरी लगभग 15 किलोमीटर है. इधर हजारीबाग-बड़कागांव रोड में लगातार घटना घटती रहती है. कभी चोरी, तो कभी हत्या, तो कभी सड़क दुर्घटना. थाने की दूरी इतनी है कि पुलिस के पहुंचने के पहले ही घटना को अंजाम देकर अपराधी आसानी से फरार हो जाते हैं. लोगों का कहना है कि हजारीबाग-बड़कागांव मार्ग के बीच एक थाना अथवा पुलिस पिकेट अनिवार्य है. बड़ी-बड़ी कंपनियों के कोयला वाहनों से अक्सर सड़क हादसे भी होते रहते हैं. थाना पुलिस के रहने से सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को तत्काल इलाज में सहयोग होता. केस-1 : 10 दिसंबर 2018 को सीसीएल के अमीन शंभू राणा की अज्ञात अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. शंभू राणा के पिता ने बताया कि सूचना के बाद पुलिस पहुंची. तब तक अपराधी फरार हो चुके थे. अपराधी अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं. केस-2 : 19 फरवरी 2021 को एनटीपीसी की आउटसोर्सिंग कंपनी प्लांट एंड मशीनरी इंजीनियर सत्येंद्र सिंह की अज्ञात अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. उस वक्त भी पुलिस के आने के पहले अपराधी निकल चुके थे. काफी दिनों के बाद अपराधी पकड़ में आए. केस-3 : इसी वर्ष फरवरी में ओदरना घाटी में सड़क दुर्घटना में तीन छात्रों की मौत हो गई थी. उन्हें देखनेवाला कोई नहीं था. घंटों घायलावस्था में तीनों छात्र दुर्घटनास्थल पर ही तड़पते रह गए थे. अगर इस रोड में थाना या पुलिस पिकेट होती, तो उन्हें वक्त पर इलाज में सहयोग मिल सकता था. [caption id="attachment_677207" align="alignnone" width="503"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-23-at-6.43.13-AM.jpeg"

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शाम सात बजे ही बंद कर देते हैं दुकान : सुरेश कुमार

कुंडीलबागी के दुकानदार सुरेश कुमार ने बताया कि इधर के दुकानदार शाम सात बजे ही दुकान बंद कर देते हैं. चूंकि इधर न पुलिस की पेट्रोलिंग होती है और न ही स्थानीय लोग सुरक्षित महसूस करते हैं. इस रोड से आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की आवाजाही होती है.

थाना होता, तो लोग ज्यादा सुरक्षित महसूस करते : जोहन लकड़ा

[caption id="attachment_676753" align="alignleft" width="204"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/06/6-21-300x200.jpg"

alt="जोहन लकड़ा" width="204" height="136" /> जोहन लकड़ा[/caption] मुटुकद्वार निवासी जोहन लकड़ा ने बताया कि अगर इस रोड पर एक थाना होता, तो लोग ज्यादा सुरक्षित महसूस करते. जब कोई घटना घटती है, तो पुलिस को सूचना देते हैं. लेकिन दूरी के वजह से पुलिस को आने में काफी समय लगता है और यही वजह है कि अपराधी घटना को अंजाम देकर आराम से फरार हो जाते हैं.

जंगली इलाके में लगता है भय : धनेश्वर साव

फल विक्रेता धनेश्वर साव ने बताया कि रसूलीगंज से थाना काफी दूर है. बड़कागांव मार्ग जंगली इलाका है और इस वजह से भय लगता है. कई बार अपराधी घटना को अंजाम देकर आसानी से फरार हो जाते हैं. पुलिस को आने में वक्त लग जाता है.

कम हो गई है चाय की बिक्री : राजू साव 

चाय विक्रेता राजू साव ने बताया कि इस रोड से कोयला वाहनों के अलावा कई अधिकारियों की गाड़ियां आती- जाती हैं. देर शाम तक अगर रहते, तो चाय की बिक्री ज्यादा होती है. लेकिन यहां के लोग सात बजे के बाद रुकना पसंद नहीं करते. उन्हें यह डर लगा रहता है कि कब अपराधियों की नजर पड़ जाए और फिर जान पर बन आए. इसे भी पढ़ें : गिरिडीह">https://lagatar.in/giridih-when-pm-modi-speaks-the-world-listens-jp-nadda/">गिरिडीह

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