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देख रहे हो न विनोद...कोल्हान से पलामू क्या पहुंचे, हांफने लगे इलाके के राजनीतिक धुरंधर

 
...जो है नामवाला, वहीं तो बदनाम है Sanjay Singh राजनीति में पदार्पण की एक अनोखी शर्त है, समाजसेवी होना. न भी हों, तो समाजसेवी होने का ढोंग करना. अब पलामू की राजनीति में कोल्हान के एक समाजसेवी (कथित) का पदार्पण क्या हुआ, तो वहां के राजनीतिक धुरंधर हांफने लगे हैं. पहले से पलामू की राजनीति में गत मार बैठे राजनीतिज्ञ इसलिए परेशान हैं कि कहीं उनकी पार्टी टिकट रूपी उनका पत्ता न गुल कर दे. किनारे न लगा दे. पलामू में एक विधानसभा सीट पांकी है. कुरमी बहुल सीट बताया जाता है, लेकिन कभी इस सीट पर क्षत्रियों का ही दबदबा रहा करता था. कांग्रेस के टिकट से कभी संकटेश्वर सिंह उर्फ संतु सिंह परचम लहराया करते थे. फिर विदेश सिंह (अब स्वर्गीय) भी पांकी में परचम लहराते रहे. बीच में जदयू के टिकट पर मधु सिंह (अब स्वर्गीय) ने परचम लहराया था. जब राज्य अलग बना, तो सिंह को मंत्री रूपी मधु का स्वाद चखने को मिला. बाद में स्व विदेश सिंह के बेटे बिट्टू सिंह विधायक बने.

उछल-कूद मचावे में माहिर हो गये हैं मेहता बाबू

उधर मूल रूप से पलामू के रहनेवाले और रांची में शिक्षण संस्थान चलाने वाले मेहता बाबू भी पांकी में लगातार जोर लगाइले रहे. कभी निर्दलीय, तो कभी झामुमो के तीर-धनुष से पांकी पर निशाना साधते रहे, लेकिन हमेशा तनि-तनि सा के लिए पिछुवाते रह गये. बूझ गये मेहता बाबू कि बिना कोई राष्ट्रीय पार्टी का दामन थामले दाल गले वाला नहीं है. आखिर आदित्य कृपा बरसी, माथुर साहिब से करीब लिया गये, तो मेहता बाबू ने कमल थाम लिया. भगवाधारी हुए, टिकट मिला और जीत भी गये. विधानसभा में भी खूबे उछलकूद मचाइले रहते हैं. लेकिन अब पांकी में विनोद बाबू के चरण क्या पड़े, मेहता साहिब हांफे लगे हैं. बिट्टू बाबू भी चुप्पी साधले हैं, लेकिन स्व मधु चचा के सुपुत्र लाल सूरज लकलकाइल हैं. अभी कोई पार्टी भेंटा नहीं रहा है. कोशिश में लगल हैं कोई पार्टी उन्हें टिकट दे दे.

कोयरी-कुरमी बहुल इलाका पांकी विस क्षेत्र

पांकी विधानसभा क्षेत्र कोयरी-कुरमी बहुल इलाका है. मुस्लिम आबादी भी अच्छी-खासी है. मेहता बाबू यहां से विधायक हैं. जोर लगाइले हैं. दावा करते हैं कि पांकी के लिए खूबे काम किये हैं. विधानसभा में भी खूबे एक्टिव रहते हैं. उछल-कूद मचावे में माहिर हो गये हैं. सरकार को घेरने के लिए पोस्टर-बैनर झट से बनवा लेते हैं. फिलहाल तो मेहता बाबू क्षेत्र में लगातार भ्रमण कर रहे हैं, लेकिन विनोद बाबू के पांकी में अवतरित होते ही उनके माथे पर भी पसीना चलने लगा है. विनोद बाबू किसी पार्टी से चुनाव लड़ेंगे या निर्दलीय ही किस्मत आजमाएंगे, यह सब अभी तय नहीं है. लेकिन चूंकि विनोद बाबू के कोल्हान के पूर्व सीएम मधु कोड़ा से अच्छे संबंध रहे हैं, इसलिए मेहता बाबू तनिक ज्यादा ही टेंशन में हैं. विनोद बाबू के कारण हांफले भी हैं. जहां तक विस क्षेत्र में धन-बल के खेल की बात है, तो मेहता बाबू को अबकी बार तनिक परेशानी ज्यादा होगी. ढेरे कचिया डाउन करे पड़ेगा. [wpse_comments_template]
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