Ranchi : मुफ्ती सलमान कासमी ने बताया कि रोजे की फरजीयत का मकसद तकवई है, जैसे की कुरआन करीम में इरशाद है, जिसका तजुर्मा (माने) है. ऐ इमान वालों तुम पर रोजा फर्ज किया गया है. जैसा कि इससे पहले के लोगों पर फर्ज किया गया था. ताकि तुम्हारे अंदर तकवई की शिफत हासिल हो सके. दिलचस्प बात यह है कि इस आयत से तारीख से यहां की जग फराई हैसियत हो जाती है और इस तरह के आयत से तीन मालूमात का हमसफर और रफीक बन जाती है. इसलिए तमाम इबादात का खुलासा तकवई है. इसे भी पढ़ें -नीतीश">https://lagatar.in/11-candidates-including-nitish-kumar-rabri-devi-are-sure-to-become-mlc-there-will-be-no-fight/">नीतीश
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