Ranchi : राज्य गठन के बाद सरकार के कई विभागों ने बजटीय प्रावधान के मुकाबले 3778.41 करोड़ रुपये अधिक खर्च किया है. बजट के मुकाबले अधिक खर्च करने वाले विभागों में भ्रष्टाचार के लिए चर्चित ग्रामीण विकास सहित अन्य विभाग शामिल है. ग्रामीण विकास विभाग के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम भ्रष्टाचार के मामले में ही जेल में हैं. एकीकृत बिहार में पशुपालन घोटाले की शुरूआत भी बजटीय प्रावधान से अधिक खर्च करने से शुरू हुई थी. महालेखाकार द्वारा बार बार पशुपालन विभाग द्वारा बजट के मुकाबले किये गये अधिक खर्च को नियमित करने का अनुरोध किया जाता रहा. बाद में अधिक खर्च का यह मामला पशुपालन घोटाले के रूप में सामने आया.
सरकार के विभागों द्वारा उसके लिए निर्धारित बजटीय प्रावधान की सीमा में ही खर्च करने का नियम है. अगर किसी विशेष परिस्थिति में बजटीय प्रावधान से अधिक खर्च हो गया हो तो उसे विधानसभा में नियमित कराने की बाध्यता है. संविधान के अनुच्छेद 205(1)(बी) के तहत बजट से अधिक खर्च करने को नियमित करने का अधिकार सिर्फ विधानसभा को है.
राज्य गठन के बाद से अब तक बजटीय प्रावधान के मुकाबले 3778.41 करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं. महालेखाकार द्वारा बार बार अपनी रिपोर्ट में संवैधानिक प्रावधानों के तहत इसे विधानसभा से नियमित कराने का अनुरोध किया जाता है. लेकिन सरकार के स्तर से बजट के मुकाबले हुए इस अधिक खर्च को नियमित करने के लिए अब तक कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की गयी है.
झारखंड में बजट के मुकाबले अधिक खर्च करने का सबसे रोचक पहलू यह है कि राज्य में बजट के मुकाबले अधिक खर्च करने की घटना विधानसभा से ही शुरु हुई. विधानसभा ने राज्य गठन के बाद से अपने लिये किये गये बजटीय प्रावधान के मुकबले 55 लाख रुपये अधिक खर्च किया है.
राज्य में भ्रष्टाचार के लिए चर्चित ग्रामीण विकास विभाग ने भी अपने बजटीय प्रावधान के मुकाबले 173.19 करोड़ रुपये अधिक खर्च किया है. इस विभाग के तत्कालीन मंत्री, उनके आप्त सचिव, मुख्य अभियंता सहित अन्य लोग टेंडर में कमीशन लेने के आरोप में मनी लाउंड्रिंग के मामले में आरोपित है और जेल जा चुके है.
ग्रामीण विकास विभाग के अलावा पर्यटन, सांस्थिक वित्त, निगरानी, भू-राजस्व, निबंधन विभाग ने भी बजट के मुकाबले अधिक खर्च किया है. इसमें से भू-राजस्व (1072 रुपया), निबंधन (81866 रुपया), सांस्थिक वित्त (11160रुपया) द्वारा बजट के मुकाबले अधिक खर्च गयी राशि बहुत ही कम है.
बजट के मुकाबले सबसे ज्यादा अधिक राशि सरकार द्वारा लिये गये कर्ज की वापसी, कर्ज पर सूद चुकाने और पेंशन भुगतान के मद में किया गया है. यह सभी खर्च वित्त विभाग के माध्यम से किये जाते हैं. आंकड़ों के अनुसार कर्ज चुकाने के लिए बजटीय प्रावधान के मुकाबले 938.39 करोड़ रुपये और सूद चुकाने पर 889.27 करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं. इसके अलावा पेंशन भुगतान पर बजटीय प्रावधान के मुकाबले 1730.95 करोड़ रुपये अधिक खर्च किये गये हैं.
बजट के मुकाबले अधिक खर्च (करोड़ में)
| विभाग/मद | वित्तीय वर्ष | अधिक खर्च |
| विधानसभा | 2001-02 | 0.04 |
| विधानसभा | 2002-03 | 0.08 |
| पर्यटन विभाग | 2003-04 | 0.29 |
| विधानसभा | 2010-11 | 0.10 |
| कर्ज आदायगी | 2011-12 | 219.00 |
| पेंशन भुगतान | 2011-12 | 200.60 |
| निगरानी | 2012-13 | 0.07 |
| कर्ज आदायगी | 2012-13 | 556.01 |
| पेंशन भुगतान | 2012-13 | 703.44 |
| ग्रामीण विकास | 2012-13 | 3.66 |
| सूद अदायगी | 2013-14 | 139.42 |
| कर्ज अदायगी | 2013-14 | 181.58 |
| पेंशन भुगतान | 2013-14 | 373.05 |
| सूद अदायगी | 2014-15 | 191.68 |
| ग्रामीण विकास | 2014-15 | 169.53 |
| कर्ज अदायगी | 2016-17 | 10.42 |
| सूद अदायगी | 2017-18 | 193.69 |
| पेंशन भुगतान | 2017-18 | 71.18 |
| सूद अदायगी | 2019-20 | 120.64 |
| पेंशन भुगतान | 2019-20 | 192.68 |
| सूद अदायगी | 2020-21 | 144.95 |
| सूद अदायगी | 2021-22 | 98.89 |
| पेंशन भुगतान | 2021-22 | 189.97 |
| कर्ज अदायगी | 2022-23 | 15.92 |


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