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सच्चे क्रूस की खोज: सम्राज्ञी हेलेना की ऐतिहासिक यात्रा

Ranchi: येसु ख्रीस्त के सच्चे क्रूस की खोज एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक घटना है, जो रोम की प्रसिद्ध "येरुसलेम में पवित्र क्रूस की बासिलिका" से गहराई से जुड़ी हुई है. चेसारेया के इतिहासकार यूसेबियस (265-340 ई.) के अनुसार, सम्राट हार्डियन ने कलवारी पर्वत और पवित्र कब्र को मिटाने के लिए वहा पेगन मंदिर बनवाए. परंतु, 313 ई. में जब सम्राट कॉन्स्टेंटाइन ने धार्मिक सहिष्णुता की घोषणा की, तब इन मंदिरों को हटाकर वहां एक विशाल ईसाई चर्च "ल’अनास्तासिस ए मार्टिरियॉन" (उत्थान और शहीदी स्थल) बनाया गया. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2025/03/3-71.jpg"

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कौन थीं संत हेलेना?

325 ई. में सम्राज्ञी हेलेना, जो सम्राट कॉन्स्टेंटाइन की माता थीं, अपनी वृद्धावस्था में पवित्र भूमि की यात्रा पर गईं. उनका जन्म 250 ई. में बिटिनिया के ड्रेपानुम में हुआ था. वे एक साधारण परिवार से थीं और बाद में ईसाई धर्म को अपनाया. जब उनके पुत्र कॉन्स्टेंटाइन सम्राट बने, तो उन्हें दरबार में "ऑगस्टा" की उपाधि दी गई.

एक स्थान पर खुदाई करने पर तीन क्रूस मिले

संत हेलेना ने येरुसलेम पहुंचकर वहां के निवासियों से येसु के क्रूस के बारे में जानकारी प्राप्त की. एक स्थान पर खुदाई करने पर तीन क्रूस मिले. लेकिन यह पता लगाना कठिन था कि इनमें से कौन-सा येसु का क्रूस था. उस समय बिशप संत मकैरियस ने प्रार्थना की और एक अस्वस्थ युवक के शरीर को इन क्रूसों पर रखा गया. जैसे ही वह सच्चे क्रूस को छूता है, वह चमत्कारिक रूप से स्वस्थ हो जाता है. इस प्रकार, येसु के क्रूस की पहचान हुई.

क्रूस का वितरण: रोम, येरुसलेम और कांस्टेंटिनोपल

संत हेलेना ने इस क्रूस को तीन भागों में विभाजित किया— येरुसलेम: एक भाग को वहीं रखा गया. कॉन्स्टेंटिनोपल: दूसरा हिस्सा अपने बेटे सम्राट कॉन्स्टेंटाइन को भेजा. रोम: तीसरा हिस्सा स्वयं अपने साथ ले गईं. साथ ही, उन्होंने कलवारी पर्वत की मिट्टी भी लाई, जिसे रोम में एक प्रार्थनालय के फर्श पर बिछाया गया.

क्रूस पर कब्जा और पुनः प्राप्ति

वाराज्जे के जाकोपो के अनुसार, पेर्सिया के सम्राट ख़ोसरों ने येरुसलेम पर आक्रमण कर सच्चे क्रूस के अवशेषों को अपने अधिकार में ले लिया. लेकिन सम्राट हेराक्लियस ने उन्हें हराया और क्रूस को पुनः येरुसलेम लाने में सफल हुए. किंवदंती के अनुसार, जब वे क्रूस को लेकर येरुसलेम में प्रवेश करना चाहते थे, तो शहर के द्वार बंद हो गए. तभी एक स्वर्गदूत प्रकट हुआ और उन्हें विनम्रता के साथ प्रवेश करने का संकेत दिया.उन्होंने अपने सम्राटी वस्त्र उतारे, क्रूस को कंधे पर उठाया, और जैसे ही उन्होंने ऐसा किया, शहर के द्वार खुल गए.

आज भी देखे जा सकते हैं पवित्र अवशेष

"येरुसलेम में पवित्र क्रूस की बासिलिका" रोम का एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है. यहां संत हेलेना द्वारा लाई गईं क्रूस की लकड़ी, येसु के दुःखभोग के अवशेष और पवित्र मिट्टी को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा गया है. यह न केवल एक ऐतिहासिक धरोहर है, बल्कि हर ख्रीस्तीय को उनके विश्वास को सुदृढ़ करने के लिए प्रेरित करता है. (स्रोत: रोम की "येरुसलेम में पवित्र क्रूस की बासिलिका") इसे भी पढ़ें – ऑक्सफोर्ड">https://lagatar.in/opposition-to-mamta-banerjee-in-oxford-university-know-why/">ऑक्सफोर्ड

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