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जा रहा है राजनाथ का मौसम !

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alt="" width="150" height="150" />DR. Santosh Manav
वामपंथियों की तरह यह नहीं कहना चाहूंगा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तानाशाह हैं. पर यह तो कहा ही जा सकता है कि नरेंद्र मोदी जिस सरकार के मुखिया हैं या हों, वहां नंबर टू का प्रश्न नहीं उठना चाहिए. इसलिए कि वे जहां होंगे, वहां एक से दस तक वे ही होंगे या हैं ! फिर भी लोग हैं कि पूछते हैं कि मोदी सरकार में नंबर टू कौन है ? राजनाथ सिंह या अमित शाह? पहले पूछते थे राजनाथ या अरूण जेटली? सवाल उठना या उठाना गैर मुनासिब भी नहीं है, सत्ता है, तो सवाल है. जहां पद, पैसा, पावर, धमक-महक वहां सवाल. निर्बल पर या निर्बल से कौन सवाल करता है, पूछता है ?

क्या निशिकांत दुबे, राजनाथ सिंह को नंबर टू नहीं मानते

12 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झारखंड के देवघर आए. उस दिन झारखंड से प्रकाशित अखबारों में पूरे पेज का विज्ञापन गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने प्रकाशित करवाया. विज्ञापन पर दुबेजी की जेब ढीली हो रही है, तो स्वाभाविक है कि उनकी तस्वीर होगी, थी. यह भी स्वाभाविक है कि पैसा उनका है, तो तस्वीर किसकी लगेगी, यह उनका विशेषाधिकार है. प्रधानमंत्री की रैली थी, तो उनकी बड़ी-सी तस्वीर थी. होनी भी चाहिए. पूरे पेज के विज्ञापन में नीचे की ओर विधानसभा में बीजेपी के नेता बाबूलाल मरांडी, प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, पांच साल तक प्रदेश में बीजेपी के इकलौते मुख्यमंत्री रहने वाले रघुवर दास, केंद्र में मंत्री अर्जुन मुंडा की तस्वीर थी और ऊपर की ओर पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह की. एक तटस्थ आदमी कह सकता है कि जब मंत्री अर्जुन मुंडा की तस्वीर है, तो राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी को भी याद कर लेते दुबेजी. और जब गृह मंत्री अमित शाह को सम्मान दे रहे हैं, तो कायदे से केंद्र की सरकार में नंबर टू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को भी याद कर लेते ? सवाल यह भी हो सकता है कि क्या निशिकांत दुबे, राजनाथ सिंह को नंबर टू नहीं मानते और यह भी कि क्या वे अमित शाह को नंबर टू मानते हैं? पिछले दो-तीन साल से यह सवाल तो जिंदा है ही कि मोदी सरकार पार्ट टू में नंबर टू कौन है? राजनाथ सिंह या अमित शाह ?

क्या मंत्रिमंडल से बेदखल हो सकते हैं? 

1972 से जनसंघ और बीजेपी से जुड़े राजनाथ सिंह ने पचास साल की अपनी राजनीतिक यात्रा में शायद ही कभी दूसरी पार्टी के बारे में सोचा होगा. वे एकनिष्ठ पार्टीसेवी हैं. अटल-आडवाणी के दौर में वे तेजी से आगे बढ़े. पार्टी और सरकार में उन्हें भरपूर तवज्जो मिली. वे मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और दो बार पार्टी अध्यक्ष रहे. लेकिन, बीजेपी के `मोदी-काल` में बार-बार राजनाथ सिंह को लेकर सवाल उठते रहे हैं. 2014 से 2022 तक यानी आठ वर्षों से वे कायदे से सरकार में नंबर टू हैं. पर राजनीतिक गलियारों में कहा जाता है कि वे नाम के नंबर टू हैं, काम के नहीं. सरकार में उनकी नहीं सुनी जाती. बस, मन रखने के लिए वे नंबर टू हैं-वह भी आर एस एस के दबाव में. पता नहीं, खबरों और राजनीतिक बतकही में कितनी सच्चाई है, पर कहा तो यही जाता है कि राजनाथ कभी भी मंत्रिमंडल से बेदखल हो सकते हैं. पार्टी के कार्यक्रम, पोस्टर, बैनरों से वे बेदखल तो लगभग हो ही गए हैं. इसी कड़ी में 12 जुलाई के विज्ञापन को भी देखा जा सकता है.

अफवाहों-कयासों का लंबा दौर

बात में पूरी सच्चाई नहीं भी हो, तब भी कुछ न कुछ तो है. 2014 में नरेंद्र मोदी के बाद राजनाथ सिंह ने शपथ ली. वे गृह मंत्री बने. सामान्य तौर पर गृह मंत्री को ही नंबर टू माना जाता है. प्रधानमंत्री के विदेश दौरे या अनुपस्थिति में गृह मंत्री ही कैबिनेट की अध्यक्षता करते हैं. लेकिन, राजनाथ सिंह की स्थिति देखिए, जिस राजनाथ सिंह ने बतौर पार्टी अध्यक्ष नरेंद्र मोदी का नाम प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के लिए आगे बढाया था, उनका कद मोदी सरकार में लगातार कमतर हो रहा है ! 2014 में यह कहा गया, अखबारों-पत्रिकाओं में खूब छपा भी कि राजनाथ सिंह आर एस एस के दबाव में नाम भर के नंबर टू हैं. असली नंबर टू तो वित्त मंत्री अरुण जेटली हैं. सरकार में राजनाथ की एकदम नहीं चलती. वे सचिव तक अपनी पसंद का नहीं रख सकते. अफवाहों-कयासों का लंबा दौर चला. फिर 2019. मोदी सरकार पार्ट टू. नरेंद्र मोदी के बाद राजनाथ सिंह ने शपथ ली. इसके बाद अमित शाह ने शपथ ली. लेकिन, गृह मंत्रालय मिला अमित शाह को. दूसरे नंबर पर शपथ और लोकसभा में उपनेता बनाकर यह भ्रम बनाए रखा गया कि नंबर टू तो राजनाथ सिंह ही हैं. 2019 से ही यह सवाल लगातार उठ ही रहा है कि नंबर टू कौन है? राजनाथ सिंह या अमित शाह? और 2019 से ही गाहे-बगाहे यह छप भी रहा है कि मोदी सरकार में दरकिनार किए जा रहे हैं राजनाथ सिंह.

आखिर सब का मौसम होता है

कहने को आज भी राजनाथ सिंह सरकार में नंबर टू हैं. पर हर जगह अमित शाह के दबदबे से साफ है कि उनका यानी राजनाथ सिंह का `मान` भर रखा जा रहा है. असली नंबर टू अमित शाह ही हैं. क्या निशिकांत दुबे का विज्ञापन भी यही नहीं कहता है ? 2009 में जब लालकृष्ण आडवाणी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बनाए जा रहे थे, तब कुछ ने राजनाथ सिंह का नाम भी उछाला था. ऐसे ही एक नेता थे-भगत सिंह कोशियारी. वे आजकल महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं. उन्हीं दिनों इन पंक्तियों के लेखक ने राजनाथ सिंह से ग्वालियर में पूछा था- आपका भी नाम है, लोग नाम ले रहे हैं, क्या आप भी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं? राजनाथ सिंह बोले- पार्टी ने मुझे इतना दिया. सबसे बड़े सूबे का मुख्यमंत्री बनाया. और क्या चाहिए? राजनाथ सिंह को क्या चाहिए या क्या नहीं चाहिए, वे ही बेहतर समझते होंगे. पर इतना तय है कि मोदी-काल में राजनाथ फैल नहीं, सिमट रहे हैं या सिमटाए जा रहे हैं. कह सकते हैं कि जा रहा है राजनाथ का मौसम. आखिर सब का एक मौसम होता है. क्या नहीं? {लेखक भास्कर सहित अनेक अखबारों के संपादक रहे हैं. फिलहाल लगातार मीडिया में स्थानीय संपादक हैं } [wpse_comments_template]

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