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किसानों की पीड़ा… स्ट्रॉबेरी से जीवन तो नहीं बदला, कर्ज में डूबने का सता रहा डर

 
The suffering of the farmers … Life has not changed with strawberries, the fear of drowning in debt is haunting Gaurav Prakash Hazaribagh : किसान जिस उम्मीद के साथ हाई वैल्यू क्रॉप की खेती की थी, उन्हें हजारीबाग में न तो ग्राहक मिल रहे हैं और न ही व्यापारी. हम बात कर रहे हैं स्ट्रॉबेरी की. हजारीबाग के कई इलाकों में इस बार बड़े पैमाने पर स्ट्रॉबेरी की खेती की गई थी. किसानों को उम्मीद थी कि इस बार अच्छा मुनाफा होगा. आलम यह है कि मूलधन भी वापस नहीं हो रहा है. उन्हें नुकसान ही नुकसान झेलना पड़ रहा है. किसान सड़क किनारे स्ट्रॉबेरी बेचने को मजबूर हैं. सड़क किनारे चीकू देवी अपने खेत से लाकर स्ट्रॉबेरी बेच रही हैं. वह बताती हैं कि पहले स्ट्रॉबेरी 50 से 70 रुपए प्रति डिब्बा बिकते थे. लेकिन अब खरीदार ही नहीं मिल रहे. आलम यह है कि अब 20-25 रुपए प्रति डिब्बा भी बाजार में नहीं बिक रहा है. ऐसे में हम लोग बेहद उदास हो गए हैं. हम लोगों को लगा था कि व्यापारी हमारे खेतों में आएंगे और नगद पैसे देकर हमारे उत्पाद खरीदेंगे. प्रारंभिक दौर में उन लोगों के पास खरीदार भी आए. उनकी खेत में स्ट्रॉबेरी भरा हुआ है और आज खरीदार भी नहीं आ रहे हैं. उन लोगों को जिला प्रशासन की भी मदद नहीं मिल रही है कि उन्हें उचित बाजार मिल सके. इस कारण वे लोग मजबूरन बाजार में लाकर बेहद कम दाम में स्ट्रॉबेरी बेच रहे हैं. कटकमदाग प्रखंड स्थित बेंदी गांव में भी इस वर्ष बड़े पैमाने पर स्ट्रॉबेरी की खेती हो रही है. जिला प्रशासन ने भी किसानों को प्रोत्साहित किया और कहा कि परंपरागत खेती से दूर होकर इस बार किसान स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं. लेकिन यहां के किसान भी अब सड़क किनारे महज 20 रुपए डब्बा स्ट्रॉबेरी बेचने को मजबूर हैं. किसान कहते हैं कि उनलोगों ने बड़ी मेहनत से खेती की थी और पैसे भी खर्च किए. लेकिन अब उन लोगों को उचित बाजार नहीं मिलने के कारण नुकसान हो रहा है. पहले कहा जा रहा था कि स्ट्रॉबेरी बेचकर लाल हो जाएंगे. मगर अब भारी नुकसान का डर सता रहा है. अगर मूल्य की बात की जाए तो स्ट्रॉबेरी 350 रुपए से लेकर 500 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिकती थी. लेकिन अब किसान महज 100 रुपए किलो बेचने को मजबूर हैं. एक डिब्बे में 200 ग्राम स्ट्रॉबेरी पैक किया जाता था. आमतौर पर हजारीबाग टमाटर की खेती के लिए पूरे देश भर में जाना जाता है. अधिक टमाटर होने के कारण यहां के किसानों को अच्छा मुनाफा नहीं मिल पाता था. ऐसे में किसानों ने परंपरागत खेती छोड़कर स्ट्रॉबेरी की खेती की ओर रुख किया. यही नहीं हजारीबाग में तरबूज की खेती भी बड़े पैमाने पर होती है. लेकिन स्ट्रॉबेरी के रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन होने के बाद भी व्यवसायी नहीं आ रहे हैं. इसे भी पढ़ें : रामगढ़">https://lagatar.in/ramgarh-by-election-it-is-not-bajrangs-defeat-but-rajesh-thakurs-and-four-congress-ministers-defeat/">रामगढ़

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