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सुप्रीम कोर्ट ने आवासीय कॉलोनियों के व्यापारिक इस्तेमाल पर रांची सहित देश के सभी नगर निगमों को नोटिस जारी किया

सुप्रीम कोर्ट की फाइल फोटो
  • - रांची के अशोक नगर व हरमू हाउसिंग कॉलोनी के सैंकड़ों घरों का हो रहा व्यापारिक इस्तेमाल.
  • - क्रिकेटर, ब्यूरोक्रेट्स से लेकर राजनेता व राजनीतिक दल तक कर रहे आवास में व्यापार.

Ranchi: सुप्रीम कोर्ट ने रांची नगर निगम सहित देश के सभी नगर निगमों को नोटिस जारी किया है. साथ ही सभी नगर निगमों को अपने-अपने अधिकारी क्षेत्र में अवासीय परिसर के व्यापारिक इस्तेमाल की जाँच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है. इस मामले की सुनवाई 20 मई को निर्धारित की गयी है. न्यायालय ने यह निर्देश लोगानाथन बनाम तामिलनाडू सरकार के मामले की सुनवाई के दौरान दिया है.

 

उल्लेखनीय है कि राजधानी रांची के अशोक नगर व हरमू हाउसिंग कॉलोनी के सैंकड़ों घरों का व्यापारिक इस्तेमाल किया जा रहा है. आवासीय भवनों का व्यापारिक इस्तेमाल करने वालों में क्रिकेटर, ब्यूरोक्रेट्स से लेकर राजनेता व राजनीतिक दल तक शामिल हैं. राज्य के दूसरे जिलों में भी यही स्थिति है. बहुत सारे आवासीय भवनों में बिल्डर व मकान मालिकों द्वारा व्यापारिक इस्तेमाल किया जा रहा है.

 

जानकारी के मुताबिक ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन में बिना नक्शा के बने दो मंजिला भवन को तोड़ने के आदेश के खिलाफ़ यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था. न्यायाधीश अफजल अमानुल्लाह और न्यायाधीश आर माधवन की पीठ में इस मामले की सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह पाया कि बिना नक्शा स्वीकृति के दो मंजिला भवन बनाने के दौरान कॉरपोरेशन की ओर से कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था. भवन निर्माण के बाद उसे तोड़ने का आदेश दिया गया था. 

 

न्यायालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ग्रेटर कॉरपोरेशन चेन्नई के कमिश्नर को मामले में शपथ पत्र दायर करने का आदेश दिया. कमिश्नर की ओर से दायर शपथ पत्र में इस बात का उल्लेख किया गया था कि नगर विकास विभाग के अपर सचिव ने बिना नक्शा स्वीकृति के मकान बनाने वाले को राह त देते हुए कोई पीड़क कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया था. साथ सक्षम अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिया था.

 

इसके बाद न्यायालय ने तामिलनाडू सरकार को इस पूरे प्रकरण में अधिकारियों की भूमिका का उल्लेख करते हुए शपथ पत्र दायर करने का निर्देश दिया. न्यायालय के निर्देश के आलोक में दायर शपथ पत्र इस बात का उल्लेख किया गया था कि भवनों के निर्माण में बिल्डिंग बायलॉज का पड़े पैमाने पर उल्लंघन किया गया था. इसमें प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण के अलावा बड़े पैमाने पर आवासीय क्षेत्रों के व्यापारिक इस्तेमाल करने का उल्लेख किया गया था. 

 

न्यायालय ने सरकार की ओर से दायर शपथ पत्र को गंभीरता से लिया साथ नियमों का उल्लंघन कर भवनों के निर्माण के मामले में देश और केंद्र शासित प्रदेश के सभी नगर निगमों को प्रतिवादी बनाते हुए नोटिस जारी करने का निर्देश दिया.

 

न्यायालय के निर्देश के आलोक में रांची नगर निगम को भी नोटिस जारी किया गया है. न्यायालय ने प्रतिवादी बनाये गये सभी नगर निगमों को यह निर्देश दिया है कि अपने अपने क्षेत्राधिकार में आवासीय कॉलोनियों का व्यापारिक इस्तेमाल पर रिपोर्ट पेश करें.

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