Ranchi: दो दिनों तक चली बैठक, मॉक पोल, रणनीति और दावों के बीच अब झारखंड की राजनीति की नजरें आज की सुबह पर टिकी हैं. राज्यसभा की दो सीटों के लिए मतदान होना है, लेकिन सवाल सिर्फ दो सांसद चुनने का नहीं है. सवाल यह भी है कि कल का सूरज किसके लिए जीत की रोशनी लेकर उगेगा.
एक ओर मुख्यमंत्री आवास में लगातार दूसरे दिन महागठबंधन के नेताओं की बैठक हुई, तो दूसरी ओर एनडीए ने भी अपने विधायकों को एकजुट रखने की कवायद तेज रखी. चुनाव से ठीक पहले दोनों खेमों की सक्रियता ने साफ कर दिया है कि मुकाबला भले संख्या बल का हो, लेकिन सियासी सतर्कता अपने चरम पर है.
मुख्यमंत्री आवास में हुई बैठक के बाद झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रीयो भट्टाचार्य ने दावा किया कि महागठबंधन के पास दोनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल है. उन्होंने कहा कि सभी विधायक आज सुबह 10 बजे तक विधानसभा पहुंच जाएंगे. मतदान सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगा और नतीजे शाम तक आने की संभावना है.
महागठबंधन ने अपनी तैयारियों को परखने के लिए मॉक ड्रिल भी कराई. इसके बाद मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने जीत को लेकर पूरा भरोसा जताया. उन्होंने बताया कि मॉक पोल में झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम को 29 मत मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को 25 मत प्राप्त हुए. उन्होंने कहा कि विधायक हेमलाल मुर्मू अस्वस्थ होने के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सके, लेकिन उनके मतदान में शामिल होने की उम्मीद है. उनके वोट को जोड़ने पर प्रणव झा के पक्ष में संख्या और मजबूत हो जाती है.
राधाकृष्ण किशोर ने दावा किया कि भाजपा और एनडीए के पास 24 से अधिक वोट नहीं हैं. उनका कहना है कि यदि विपक्ष को अतिरिक्त वोट भी मिल जाएं, तब भी महागठबंधन दोनों सीटों पर बढ़त बनाए रखेगा. उन्होंने कहा कि प्राथमिकता वोटों के आधार पर दोनों उम्मीदवारों की जीत तय है.
दिलचस्प बात यह है कि विधानसभा की 81 सदस्यीय संरचना में एक उम्मीदवार को जीत के लिए 28 वोटों की जरूरत होती है. कागज पर महागठबंधन के पास 56 विधायक हैं, जो दोनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त माने जाते हैं. वहीं एनडीए के पास 24 विधायक हैं. इसी वजह से विपक्ष की उम्मीदें किसी संभावित क्रॉस वोटिंग या राजनीतिक चौंकाने वाले घटनाक्रम पर टिकी बताई जा रही हैं.
हालांकि महागठबंधन ऐसे सभी कयासों को खारिज कर रहा है. मुख्यमंत्री ने भी नेताओं और विधायकों को स्पष्ट संदेश दिया है कि चुनाव में किसी तरह की चूक की गुंजाइश नहीं है. सूत्रों के मुताबिक मतदान के दिन सभी विधायक एक साथ विधानसभा पहुंच सकते हैं, ताकि एकजुटता का संदेश भी जाए और किसी तरह की अटकलों को भी विराम मिले.
पिछले दो दिनों से रांची की राजनीति में बैठकों का दौर, होटल की राजनीति, मॉक पोल और संख्या बल की चर्चा छाई रही. अब सारी निगाहें आज के मतदान और शाम को आने वाले नतीजों पर हैं.
सवाल अभी भी वही है...
क्या आज का सूरज महागठबंधन के दावे को सच साबित करेगा, या फिर झारखंड की राजनीति कोई नया मोड़ दिखाएगी?
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