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रिश्तों का सचः सात फेरे, कसमें, कुछ साल का भी साथ नहीं, पत्नियां बनीं पति की कातिल

Ranchi : सात जनम साथ निभाएंगे, शादी के समय अग्नि के फेरे लेते वक्त यही कसमें खाई. लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि सात जनम तो दूर, कुछ साल भी साथ निभाना भारी पड़ रहा है/ झारखंड में बीते दो सालों के भीतर एक दर्जन से ज्यादा ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां पत्नियों ने ही पति की हत्या कर या करा दी.
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AI की मदद से तैयार सांकेतिक तस्वीर.
  • दो साल में 12 से अधिक पत्नियों पर लगा पति की हत्या का आरोप.

Ranchi : सात जनम साथ निभाएंगे, शादी के समय अग्नि के फेरे लेते वक्त यही कसमें खाई. लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि सात जनम तो दूर, कुछ साल भी साथ निभाना भारी पड़ रहा है. झारखंड में बीते दो सालों के भीतर एक दर्जन से ज्यादा ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां पत्नियों ने ही पति की हत्या कर या करा दी.

 

गांव-देहात में लोग कहते हैं, जेकरे संग जीए-मरे के कसम खइनी, उहे आज जान के दुश्मन बन गइल. ये कहावत अब हकीकत बनती दिख रही है. झारखंड के पलामू, गढ़वा, चतरा से लेकर रांची, जमशेदपुर  कई जिलों में घरों के आंगन खून से रंगने लगे हैं. कहीं प्रेमी के चक्कर में पति रास्ते का कांटा बना, तो कहीं रोज-रोज के झगड़े ने आग में घी का काम किया. कई मामलों में तो बड़ी चालाकी से साजिश रची गई. पहले प्यार का नाटक, फिर मौका देखकर मौत का खेल. जहर देकर, गला दबाकर या धारदार हथियार से वार करके. रिश्ते का अंत खौफनाक तरीके से किया गया. इन घटनाओं ने न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि सामाजिक ताने-बाने पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

 

जानकारी के अनुसार 2024 से 2026 के बीच पलामू, गढ़वा, चतरा, बोकारो, रांची और पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) और कई जिलों में 12 से अधिक ऐसे मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमे पत्नियों ने पति की हत्या की या करा दी. कई मामलों में हत्या बेहद सुनियोजित तरीके से की गई. कहीं जहर देकर, कहीं धारदार हथियार काटकर तो कहीं प्रेमी के साथ मिलकर साजिश रचकर पति को रास्ते से हटाया गया.

 

जांच में सामने आया है कि अधिकांश मामलों के पीछे अवैध संबंध, घरेलू कलह, आर्थिक तनाव और मानसिक दबाव जैसे कारण प्रमुख रहे हैं. कुछ मामलों में लंबे समय से चल रहे विवाद और प्रताड़ना ने भी हिंसक रूप ले लिया. वहीं कई घटनाओं में हत्या के बाद इसे आत्महत्या या हादसा साबित करने की कोशिश भी की गई, लेकिन पुलिस जांच में सच्चाई सामने आ गई.

 

पलामू और गढ़वा जिले ऐसे मामलों में खास तौर पर चर्चा में रहे हैं, जहां हाल के दिनों में एक के बाद एक घटनाओं ने लोगों को चौंका दिया. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्य, कॉल डिटेल और पूछताछ के आधार पर कई मामलों का खुलासा किया गया है.

 

समाजशास्त्रियों का मानना है कि यह केवल आपराधिक घटनाएं नहीं, बल्कि समाज में बढ़ती असहिष्णुता, संवादहीनता और रिश्तों में घटते भरोसे का संकेत है. बदलती जीवनशैली और पारिवारिक मूल्यों में गिरावट भी इन घटनाओं को बढ़ावा दे रही है.

 

इन हालातों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या रिश्तों में संवाद की कमी और बढ़ता अविश्वास ही इस खतरनाक प्रवृत्ति की जड़ है? विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते पारिवारिक विवादों का समाधान, सामाजिक जागरूकता और काउंसलिंग जैसी पहल ही ऐसे मामलों को रोकने में मददगार हो सकती है.

 

जब पत्नी बनी कातिल: जिलेवार घटनाएं

  • 17 मार्च 2026: पलामू जिले के नावा जयपुर थाना क्षेत्र में पत्नी ने पहले पति को जहर दिया, फिर गला दबाकर हत्या कर दी. कारण बताया गया घरेलू विवाद और शक.
  • 06 सितंबर 2025: धनबाद जिले के टुंडी क्षेत्र में पत्नी ने पति की हत्या कर शव को घर में ही दफना दिया. घटना कई दिनों बाद सामने आई.
  • 12 अक्टूबर 2025: रांची के चान्हो क्षेत्र में पत्नी ने साथियों के साथ मिलकर पति की हत्या कर दी और शव छुपा दिया. पीछे जमीन और पैसों का विवाद बताया गया.
  • 15 जून 2025: गढ़वा में शादी के कुछ ही दिनों बाद पत्नी ने खाने में जहर मिलाकर पति की हत्या कर दी.
  • 15 जुलाई 2025: सरायकेला-खरसावां में पत्नी ने सोते समय हथौड़े से वार कर पति की जान ले ली. वजह अवैध संबंध का शक बताया गया.
  • 2025 में पूर्वी सिंहभूम जिला में पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश रची.

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