खबर है कि NEET परीक्षा में अब भारतीय वायु सेना का इस्तेमाल किया जायेगा. इस खबर ने एक साथ कई सवाल खड़े कर दिए हैं. सबसे बड़ा सवाल तो वर्तमान सिस्टम पर है. क्या यह सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है और इसके सुधरने की उम्मीद नहीं बची है? यह पूरी तरह सरकार की नाकामी का स्वीकारोक्ति है.
सरकार के पास सिर्फ सेना के इस्तेमाल का रास्ता बचा है. यहां गौर करें, सेना इस काम के लिए नहीं बनी है. सेना का काम नागरिकों को बाहरी खतरे से सुरक्षा देना है, ना कि परीक्षा करवाना. सेना का काम बॉर्डर की सुरक्षा करना है ना कि इग्जाम पेपर की डिलीवरी करना. ऐसा लगता है, जैसे सरकार अपने सिस्टम की विफलता की भरपाई करने के लिए सेना का इस्तेमाल कर रही है.
बड़ा सवाल यह भी है कि पेपर लीक की घटना इंसाइड में होती है. यानी प्रश्न पत्र तैयार करने, सेटिंग करने, प्रिंटिग, हैंडलिंग में. वायु सेना को तो सिर्फ प्रश्न पत्र को ट्रांसपोर्टिंग के दौरान सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी देने की बात कही जा रही है. ऐसे में गड़बड़ी होने की जवाबदेही किस पर होगी?
ऐसा लगता है कि सरकार की मंशा अब यह है कि गड़बड़ियों पर कोई सवाल भी ना उठाये. कोई यह ना पूछे कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है. जैसे इस शुरुआती दौर में यह बता दिया गया कि टेक्नोलॉजी में ग्लिच के कारण सीबीएसई परीक्षा परिणाम में गड़बड़ी हुई. यानी गड़बड़ियों के लिए कोई भी जिम्मेदार नहीं है.
इससे भी बड़ा सवाल और इसके पीछे छिपी रणनीति है. यह बहुत ही खतरनाक है. मान लिया जाये वायु सेना के इस्तेमाल के बाद भी परीक्षा में गड़बड़ी के उदाहरण सामने आयेंगे. फिर तय है कि सेना पर भी सवाल उठेगा. फिर यह कहा जायेगा कि आप सेना पर सवाल उठायेंगे? मतलब अब अगर गड़बड़ी हुई तो आप सवाल भी नहीं उठा सकते. जैसे ही आप सवाल पूछेंगे आपको देशद्रोही बता दिया जायेगा.
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