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सुरक्षाकर्मी- ट्रॉली मैन के कार्य बहिष्कार से थम गया रिम्स का पहिया, जानकारी के लिए भटकते रहे मरीज

Ranchi : रिम्स में पुरानी इमरजेंसी के बाहर लगी वाहनों की कतार, पूछताछ केंद्र की खाली कुर्सी और खुद शव की ट्रॉली को धकेलते परिजनों की तस्वीर के बीच प्रबंधन के विरोध में दिन भर नारेबाजी जारी रही. दरअसल, बुधवार को रिम्स की रीढ़ कहे जाने वाले सुरक्षाकर्मियों और ट्रॉली मैन ने कार्य का बहिष्कार कर दिया. इसकी वजह लंबे समय से काम करने वाले कर्मियों को हटा कर अस्पताल की सुरक्षा की जिम्मेदारी होम गार्ड के जवानों के हाथों में सौंपने की तैयारी है. चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय के बाहर गार्ड और ट्रॉली मैन का भारी आक्रोश नजर आया. वहीं बीते चार माह से बकाया वेतन का भुगतान नहीं होने की वजह से गुस्सा और भी ज्यादा था. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/01/14.jpeg"

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378 कर्मियों का छीन गया निवाला

15- 20 साल से रिम्स में काम करने वाले 378 कर्मियों को अचानक काम से हटाने का आदेश सुनते ही संकट मंडराने लगा. कर्मियों ने कहा कि इसी काम से घर-परिवार चलता है. घर का किरया, बच्चों की पढ़ाई और निवाला देने वाले रिम्स से हट जाने के बाद कहां जाएंगे, यह समझ नहीं आ रहा है.

कोरोना काल में लोगों की जान बचाने वालों के साथ हो रहा है अन्याय

ट्रॉली इंचार्ज चंदन ने कहा कि तीन-तीन बार कोरोना संक्रमित होने के बाद भी अपनी ड्यूटी को बेहतर तरीके से निभाते आ रहे हैं. अस्पताल की दहलीज पर मरीजों के पहुंचते ही उसे अपना समझ कर जान बचाने के लिए पूरी ताकत लगा देते हैं, लेकिन हमारी परवाह किसी को नहीं है. वहीं, गार्ड शुभम ने कहा कि हाल ही में शादी हुई है. जिम्मेदारी बढ़ी कि इसी बीच काम से हटाने का आदेश आ गया है. अब परिवार का भरण-पोषण कैसे होगा यहीं चिंता सता रही है. जबकि आजाद ने कहा कि कम तनख्वाह वाली इसी नौकरी से बच्चों की पढ़ाई, बूढ़े मां-बाप की देखभाल करता हूं. आगे क्या होगा, यह सोच कर नींद भी गायब है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/01/15.jpeg"

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जानकारी के लिए भटकते रहे मरीज और परिजन

इधर, अस्पताल के सुरक्षाकर्मीयों- ट्रॉली मैन के कार्य बहिष्कार की वजह से सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों को हुई. रिम्स की पुरानी इमरजेंसी के बाहर मरीजों को लेकर पहुंचे वाहनों की लंबी कतार थी. पूछने पर मरीज के परिजनों ने कहा कि ट्रॉली के लिए भटक रहे हैं. वहीं ऑर्थो विभाग कहां है, इसकी जानकारी भी कोई नहीं दे रहा है. समझ में नहीं आ रहा है कि आगे इलाज कैसे होगा. वहीं, गुमला से आए मंगल ने कहा कि इमरजेंसी में आने के बाद ट्रॉली के लिए आधे घंटे तक इंतजार करना पड़ा. तब जाकर मरीज को भर्ती किया गया है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/01/16.jpeg"

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क्या कहते हैं रिम्स के अधिकारी

वहीं धरना दे रहे कर्मचारियों से वार्ता के लिए खुद रिम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ हिरेंद्र बिरुआ, उपाधीक्षक डॉ शैलेश त्रिपाठी और पीआरओ डॉ राजीव रंजन पहुंचे. डॉ बिरूआ ने कहा कि बातचीत से ही समस्याओं को सुलझाया जा सकता है. प्रदर्शन से मरीजों का नुकसान है. उन्होंने कहा कि संविधान के तहत सभी की अपनी बात रखने का अधिकार है. कर्मचारियों से लिखित में मांगा गया है कि उनकी समस्या क्या है. उन्होंने कहा कि जहां तक वेतन भुगतान का मामला है, तो नवंबर माह तक का वेतन 1 - 2 दिनों के अंदर हो जाएगा. जबकि दिसंबर का वेतन भी एक सप्ताह के अंदर दे दिया जाएगा. जहां तक होमगार्ड के जवानों की तैनाती की बात है, तो इस बाबत उच्च अधिकारियों से वार्ता की जायेगी. उसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी. इसे भी पढ़ें – नियोजन">https://lagatar.in/planning-policy-cm-hemant-soren-can-clear-the-governments-stand-from-dumka/">नियोजन

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