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पेयजलापूर्ति योजना का काम अधूरा छोड़ा, फिर भी कर दिया भुगतान

 
कौशल आनंद/ प्रवीण कुमार Ranchi: झारखंड के लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है. लेकिन अभी तक लोगों को शुद्ध पेयजल उप्लब्ध नहीं हो पाया है. लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध करने के लिए चेन्नई की श्रीराम ईपीसी कंपनी को भी 2017-18 में झारखंड के अलग-अलग जिलों में 753.54 करोड़ का काम मिला था, जिसमें धनबाद की एक योजना को छोड़ किसी का काम पांच साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है. इस कंपनी पर राज्य के अफसर भी कुछ अधिक ही मेहरबान रहे. विभागीय जांच में भी कंपनी और विभाग के अफसरों-इंजीनियरों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हुए. तीन अभियंताओं को निलंबित भी किया गया है, लेकिन संवेदकों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है. धनबाद में भी जुडको की तीन जलापूर्ति योजना का काम कर रही कंपनी की प्रगति संतोषजनक नहीं है. तीन महीने पहले कंपनी की कार्यशैली पर फटकार लगाते हुए टर्निमेट करने की चेतावनी दी गयी थी. ज्ञात हो कि एचसीईएल माइंस संचालन का काम भी यही कंपनी देख रही है. योजना पूरा करने में कंपनियों की लेटलतीफी के बावजूद विभाग लागत बढ़ने की आशंका के कारण कंपनी को टर्मिनेट करने से परहेज कर रहा है.

कंपनी पर राज्य के अफसर मेहरबान, जितने का काम हुआ, उससे ज्यादा का भुगतान

श्रीराम ईपीसी चेन्नई की कंपनी है. कंपनी को झारखंड में केवल पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से ही नहीं, बल्कि अन्य विभागों से भी करोड़ों का काम मिला हुआ है. झारखंड में धनबाद के भेलीडीह जलपूर्ति योजना को छोड़ किसी भी योजना का काम एजेंसी पूरा नहीं कर सकी है. पश्चिमी सिंहभूम जिला के तांतनगर जलापूर्ति योजना में श्रीराम ईपीसी ने नियमों को ताक पर रखकर मेसर्स आनंद सिंह को काम सबलेट कर दिया था. योजना का जितना काम हुआ, उससे 30 करोड़ रुपए ज्यादा का भुगतान अफसरों ने कर दिया था. विभाग ने तांतनगर जलापूर्ति योजना की जांच करायी. जांच समिति ने श्रीराम ईपीसी को दोषी पाते हुए उक्त कंपनी को एक साल के लिए डिबार कर दिया था. लेकिन मेसर्स आनंद सिंह पर कार्रवाई को रोक दी गयी.

श्रीराम ईपीसी को 2017-18 में मिले काम जो अब तक पूरे नहीं हुए

-पेयजल विभाग : टंडवा (चतरा) में 236.28 करोड़ की योजना में 70 प्रतिशत ही काम हुआ पूरा -जुडको धनबाद : 166.16 करोड़ तीन में से एक योजना का ही काम हुआ है पूरा -जुडको खूंटी : 59.54 करोड़ योजना अधूरी -पेयजल विभाग चाईबासा : 94.03 करोड़ योजना में 25 % काम बाकी -पेयजल विभाग, तांतनगर : 109.69 करोड़ की योजना में 20 % काम बाकी -पेयजल विभाग मारगो मुंडा, देवघर : 105.84 करोड़ की योजना में 20 % काम बाकी

विभागीय जांच में पकड़ी गई गड़बड़ी, पर संवेदकों को छोड़ दिया

इंजीनियर इन चीफ श्वेताभ कुमार (अब सेवानिवृत्त) के समय पश्चिमी सिंहभूम और धनबाद जिला में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की योजनाओं में 250 करोड़ से ज्यादा का हेरफेर हुआ था. पेयजल विभाग ने इसकी जांच करायी थी, जिसमें गड़बड़ी का मामला सामने आया था. उस समय विभागीय इंजीनियरों पर कार्रवाई हुई, लेकिन दोषी संवेदकों पर कार्रवाई नहीं हुई. विभागीय जांच के बाद संवेदक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और तीन वर्ष के अंदर संवेदक को आवंटित सभी योजनाओं की जांच करने से संबंधित पत्र जारी हुआ था. इसके बाद भी संवेदक मेसर्स आंनद सिंह, चाईबासा के खिलाफ कोई कार्रवाई अब तक नहीं हुई. [wpse_comments_template]
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