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…तो प्यासे मर जाएंगे

- अत्यधिक दोहन से अलार्मिंग प्वाइंट पर पहुंचा भू-गर्भ जलस्तर- बेरमो, धनबाद, तोपचांची, गोलमुरी ओवर एक्सप्लॉयटेड - धनबाद का बलियापुर और रांची का सिल्ली क्रिटकल श्रेणी में पहुंचे Ranchi: झारखंड में औसतन 31.35 प्रतिशत तक भूगर्भ जल का दोहन हो रहा है. इसके चलते भूगर्भ जलस्तर अलार्मिंग प्वाइंट पर पहुंच गया है. अगर भूगर्भ जल के दोहन का सिलसिला यूं ही चलता रहा तो प्रदेशवासी बूंद-बूंद पानी को मोहताज हो जाएंगे. यह हम नहीं कह रहे बल्कि प्रदेश सरकार और सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की रिपोर्ट्स कह रही हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य के धनबाद, तोपचांची और गोलमुरी में अत्यंत खतरनाक (ओवरएक्सप्लॉयटेड) स्थिति में भूगर्भ जल का दोहन किया गया है. वहीं, धनबाद का बलियापुर और रांची का सिल्ली क्षेत्र क्रिटिकल स्थिति में पहुंच चुका है. सबसे खराब स्थिति धनबाद की है. यहां पिछले दो वर्षों में भूगर्भ जल स्तर में चार मीटर से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है. यहां भूगर्भ जल 19 मीटर नीचे चला गया है. इसके बाद गोड्डा और पाकुड़ हैं. जहां भूगर्भ जल स्तर 16 मीटर है. फिर रांची, गिरिडीह, चतरा, बोकारो और पलामू का स्थान आता है जहां भूगर्भ जलस्तर 15 मीटर से भी अधिक नीचे चला गया है. हालांकि, सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के अनुसार, 260 प्रखंडों में से 245 प्रखंड फिलहाल सेफ जोन में हैं. यह अलार्मिंग स्थिति है. अगर अब भी भूगर्भ जल के दोहन को लेकर सतर्कता नहीं बरती गई और भूगर्भ जल के रिचार्ज की दिशा में सार्थक कदम नहीं उठाए गए तो निकट भविष्य में जलसंकट बेकाबू स्थिति में पहुंच जाएगा.

सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

भू-गर्भ जल के दोहन को लेकर सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की रिपोर्ट चिंताजनक है. रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 की तुलना में ग्राउंड वाटर की निकासी 2.22 प्रतिशत बढ़ी है. वर्ष 2020 में ग्राउंड वाटर की निकासी जहां 29.13 प्रतिशत थी. वर्ष 2022 में यह 31.35 प्रतिशत तक हो गयी है. बतातें चलें कि बोर्ड हर दो वर्ष में ग्राउंड वाटर की स्थिति का आकलन करता है. इसके तहत पूरे राज्य के भूगर्भ जल स्तर को चार कैटगरीज में बांटा जाता है. इनमें क्रिटिकल, सेमिक्रिटिकल, ओवर एक्सप्लाॅयटेड और सेफ जोन शामिल हैं. इस वर्ष जनवरी-फरवरी के मध्य तैयार रिपोर्ट के अनुसार स्थिति बेहद चिंताजनक है.

रिपोर्ट की खास बातें

- राज्य को 623 यूनिट (260 प्रखंड) में बांटकर ग्राउंड वाटर की स्थिति का आकलन किया गया - बेरमो, बलियापुर, गोलमुरी, जमशेदपुर शहरी, चितरपुर में भूगर्भ जल का सबसे अधिक दोहन हो रहा है. - छह यूनिट तोपचांची, धनबाद शहरी, जयनगर, रामगढ़ सिल्ली, रांची शहरी में भूगर्भ जल की स्थिति चिंताजनक है. - लोहरदगा का कैरो, सरवन, सोनार अइठाडीह, गोविंदपुर, धनबाद, भवनाथपुर, गिरिडीह, दारू, कोडरमा, खलारी, ओरमांझी में स्थिति चिंताजनक. - बाकी बची हुई यूनिट को सुरक्षित श्रेणी में रखा गया है. राज्य में ग्राउंड वाटर की स्थिति (यूनिट हेक्टेयर मीटर में)

जिला सालाना दोहन के लिए उपलब्ध- वर्तमान में दोहन-प्रतिशत

बोकारो            28955 -8834-30.51 चतरा-26100-8912-34.15 देवघर-14938-7733-51.62 धनबाद-24465-18396-75.08 दुमका-23630-6226-26.35 पूर्वी सिंहभूम-26715-7612-28.49 गढ़वा-2854-9920-34.74 गिरिडीह-38483-14545-37.80 गोड्डा-18932-4549-24.03 गुमला-31692-5602-17.68 हजारीबाग-29602-11544-39.34 जामताड़ा-8328-3773-25.30 खूंटी-11257-3390-30.09 कोडरमा-5914-3909-66.10 लातेहार-22835-6565-28.75 लोहरदगा-12217-2715-15.17 पाकुड़-21050-3465-16.46 पलामू-33689-10974-32.58 रामगढ़-10854-6382-58.80 रांची-35992-17385-48.30 साहेबगंज-25841-4446-17.21 सरायकेला-15772-3726-23.62 सिमडेगा-22003-3148-14.31 पश्चिम सिंहभूम-46354-4601-9.93

धनबाद और कोडरमा में सबसे अधिक दोहन

झारखंड में भूगर्भ जल का सबसे अधिक दोहन धनबाद और कोडरमा में हुआ है. धनबाद में 75 प्रतिशत तो कोडरमा में 66.10 प्रतिशत तक दोहन हुआ है. पश्चिम सिंहभूम की स्थिति काफी अच्छी है. यहां मात्र 9.93 प्रतिशत ही दोहन हुआ है. ओवरऑल पूरे राज्य में ग्राउंड वाटर का दोहन 1.78 बिलियन क्यूबिक मीटर दोहन हो रहा है.

इन 12 प्रखंडों में हालात चिंताजनक

ओवरएक्सप्लॉयटेड श्रेणी बेरमो, धनबाद, तोपचांची, गोलमुरी क्रिटिकल श्रेणी धनबाद का बलियापुर, रांची का सिल्ली. (नोट : इन क्षेत्रों में 90 से 100 प्रतिशत तक ग्राउंड वाटर का दोहन किया जा रहा है) सेमिक्रिटिकल श्रेणी चास, सोनारायठारी, धनबाद, झरिया, गढ़वा का भवनाथपुर, हजारीबाग का दारू, चित्तरपुर, मांडू, रामगढ़, कांके, खलारी आदि.

भूगर्भ जल निदेशालय के अनुसार जल स्तर (मीटर में)

जिला 2021 2023 रांची 13.4 15.09 सिमडेगा 10.6 10.02 गुमला 11.2 11.00 पलामू 13.8 15.07 लोहरदगा 11.7 11.09 हजारीबाग 12.3 14.07 चतरा 14.6 15.01 गिरिडीह 14.9 16.10 सिंहभूम 13.8 13.09 बोकारो 12.1 15.00 धनबाद 15.7 19.08 दुमका 11.8 12.10 जामताड़ा 12.5 14.00 देवघर 13.01 13.10 पाकुड़ 14.6 16.08 गोड्डा 17.5 18.00

क्या कहते हैं पर्यावरणविद

ग्राउंड वाटर की ताजा रिपोर्ट वास्तव में चिंताजनक है. इसका कारण मात्र ग्राउंड वाटर का बोरिंग एवं डीप बोरिंग के जरिए अंधाधुंध दोहन है. अगर हम पानी निकाल रहे हैं तो भू-गर्भ में पानी डालना भी पड़ेगा. इसे लेकर झारखंड में कोई काम नहीं हुआ. रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर ध्यान नहीं दिया गया. शहर का शहर अब तो ग्रामीण क्षेत्र भी कंक्रीट होता जा रहा है. कहीं से बारिश और नाली का पानी जमीन के अंदर जाने का स्रोत ही दिख रहा है. झारखंड जैसे भौगोलिक बनावट जहां बारिश का पानी ठहरता ही नहीं. यहां तो बारिश पानी संरक्षण और रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए था. ऊपर से पांच महीने से मौसमी बारिश भी नहीं हुई है. ऐसे में इस बार गर्मी में पानी का संकट गहरा सकता है.
- नीतीश प्रियदर्शी, पर्यावरणविद्  

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