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रांची: तब ढिबरी-दीयों की रोशनी में निकलती थी रामनवमी की शोभायात्रा

Basant Munda Ranchi: जब ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच जय बजरंग बली के नारों से शहर की गलियां गूंज उठती थीं, तब रांची में रामनवमी की शोभायात्रा सिर्फ़ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जन-जन की आस्था और परंपरा का जीवंत उत्सव बन जाती थी. आज से 96 साल पहले शुरू हुई यह शोभायात्रा रांची की धार्मिक चेतना की नींव मानी जा रही है.

1929 में कृष्णालाल साहू ने निकाली थी शोभायात्रा

1929 में कृष्णालाल साहू जब हजारीबाग से लौटे, तो उनके मन में शोभायात्रा की प्रेरणा थी. उन्होंने महावीर चौक से तपोवन मंदिर तक हनुमान जी का झंडा लेकर पहली बार शोभायात्रा निकाली. आज यह झंडा न सिर्फ ऐतिहासिक धरोहर है, बल्कि श्रद्धा की मशाल भी बन चुका है. तब न थी बिजली की जगमगाहट, न थी हाईटेक सजावट फिर भी शहर रौशन होता था. लोग घरों के बाहर ढिबरी, लालटेन और दीयों से शोभायात्रा का स्वागत करते थे. यह दृश्य श्रद्धा और सादगी की मिसाल बन जाता था. इसे भी पढ़ें – वक्फ">https://lagatar.in/rahul-gandhi-on-passing-of-waqf-amendment-bill-said-now-rsss-attention-will-turn-towards-christians/">वक्फ

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