Lagatar Desk: पिछले दो दिनों से दिल्ली के रामलीला मैदान की रैली की चर्चा खूब हो रही है. इतनी भीड़-उतनी भीड़. अलग-अलग दावे. अब मणिपुर की राजधानी इंफाल की रैली की चर्चा कर लें. द संगाई एक्सप्रेस के मुताबिक, रैली में एक लाख से अधिक लोग शामिल हुए. ये लोग देशभर से नहीं जुटे थे, सिर्फ मणिपुर के थे. इस रैली की चर्चा आपने शायद टीवी या अखबार में नहीं देखा या पढ़ा होगा.
मणिपुर के इंफाल में हुई इस रैली की पृष्ठभूमि को समझिए. वहां भाजपा की सरकार है. पहले बीरेन सिंह मुख्यमंत्री थे. चार फरवरी से युमनाम खेमचन्द सिंह हैं. तीन मई 2023 से वहां दो समुदायों कुकी (पहाड़ क्षेत्र पर रहने वाले) और मेइती (घाटी क्षेत्र में रहने वाले) के बीच हिंसा हो रही है. यानी करीब साढ़े तीन साल से. अब तक 300 से अधिक लोग मारे गए हैं और 60 हजार से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं.
इंफाल में हुई रैली में शामिल लोग एक बड़ा सा बैनर लिए हुए थे. जिसपर लिखा था- प्रॉक्सी वार बंद करो, मणिपुर बचाओ. हमें प्रॉक्सी वार नहीं, शांति चाहिए. रैली का आयोजन को-ऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (सीओसीओएमआइ) के नेतृत्व में किया गया था. रैली में नागा संगठन यूनाइटेड नागा काउंसिल, ज्वाइंट ट्राईब्स काउंसिल समेत अन्य आदिवासी मूलवासी समूहों के लोग शामिल हुए.

इंफाल में मेइती व नागा समुदाय के लोगों ने रैली निकाली.
रैली में मेइती, नागा, पैंगाल और अन्य समुदाय के लोग भी शामिल हुए. इंफाल के टिडिम ग्राउंड से शुरु होकर यह रैली थाऊ ग्राउंड तक पहुंची. इसी तरह की रैली मणिपुर के दूसरे जिलों के मुख्यालयों में भी निकाले जाने की खबरें हैं.
रैली में लोगों ने यह मांग किया है कि कुकी उग्रवादी समूहों के साथ समझौते को खत्म किया जाये. असम राइफल्स को हटाया जाये. असम राइफल्स की जगह को तटस्थ फोर्स की तैनाती हो. 1951 के आधार पर एनआरसी को लागू किया जाये. केंद्र सरकार की प्रॉक्सी वॉर और नार्को टेररिज्म को बंद हो. मणिपुपर के मुख्यमंत्री युम्नाम खेमचंद सिंह और डिप्टी सीएम नेमचा किपगेन को हटाया जाये.
उल्लेखनीय है कि पिछले साढ़े तीन साल से मणिपुर जल रहा है. कुकी व मेइती समुदाय के बीच शुरु हुआ संघर्ष अब नागा समुदाय तक भी फैल चुका है. केंद्र व राज्य सरकार हिंसा को रोकने में विफल रही है. इसे केंद्र सरकार की बड़ी विफलता के रुप में भी देखा जा रहा है.
मणिपुर के मेइती समुदाय के लोग लंबे समय से यह मांग कर रहे हैं कि उन्हें एसटी का दर्जा दिया जाये. जबकि कुकी समुदाय के लोग इसका विरोध कर रहे हैं. कुकी समुदाय, जो पहाड़ी क्षेत्र में रहते हैं, उन्हें डर है मेइती को एसटी का दर्जा मिलने के बाद नौकरियों, शिक्षा व पहाड़ी जमीनों पर मिले अधिकार कम या खत्म हो जाएंगे.
हिंसा की शुरुआत तब हुई थी जब अप्रैल 2023 में मणिपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मेइती समुदाय को एसटी का दर्जा देने की सिफारिश करने का निर्देश दिया था. इस निर्देश के खिलाफ तीन मई 2023 को आदिवासी संगठनं ने ट्राइबल सोलिडरिटी मार्च निकाला. इस दौरान चुराचांदपुर और अन्य इलाकों में हिंसक झड़पें हुई, जो तेजी से पूरे राज्य में फैल गई. हिंसा का दौर अब तक जारी है.
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