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आंगनबाड़ी केंद्र में न पानी, न शौचालय, बच्चे लकड़ी चुनकर लाते हैं तब बनती है खिचड़ी

मुख्यद्वार पर है खुला पड़ा है शौचालय की टंकी के लिए बनाया गया बड़ा गड्ढा, कभी भी हो सकता है हादसा Pramod Upadhyay Hazaribagh : हजारीबाग स्थित सदर प्रखंड की पौता पंचायत के चंदवार आंगनबाड़ी केंद्र की कुछ अलग ही कहानी है. स्थानीय ग्रामीणों से शिकायत मिलने पर जब शुभम संदेश की टीम वहां पहुंची, तो पता चला कि आंगनबाड़ी में न पानी है और न शौचालय की व्यवस्था. यहां तक कि भोजन पकाने के लिए रसोई गैस भी नहीं है. खाली सिलेंडर सेविका अपने घर ले गई है. हालत यह है कि जब नौनिहाल लकड़ियां चुन कर लाते हैं, तब किसी प्रकार खिचड़ी पकती है. आंगनबाड़ी चंदवार के बच्चों को अब तक ड्रेस भी नहीं मिला है. केंद्र के मुख्यद्वार पर ही शौचालय की टंकी के लिए एक बड़ा गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है, जहां कभी भी हादसा हो सकता है. बड़े-बच्चे किसी के भी पांव उसमें पड़ सकते हैं और फिर जान पर बन सकती है.

आंगनबाड़ी केंद्र की कहानी, ग्रामीण महिलाओं की जुबानी

[caption id="attachment_580621" align="alignleft" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/03/ladies_9-300x263.jpg"

alt="आंगनबाड़ी केंद्र की कहानी, ग्रामीण महिलाओं की जुबानी" width="300" height="263" /> आंगनबाड़ी केंद्र की कहानी, ग्रामीण महिलाओं की जुबानी[/caption] मंगलवार की पूर्वाह्न करीब 11 बजे आंगनबाड़ी केंद्र में सेविका उपस्थित नहीं थीं. सहायिका खिचड़ी पका रही थी और आधा दर्जन बच्चे आसपास में खेल रहे थे. इस संबंध गीता देवी और एक बच्ची नंदिनी की मां ने बताया कि आंगनबाड़ी में बच्चों से लकड़ियां चुनवा कर मंगवाई जाती है. फिर उन्हीं लकड़ियों से खिचड़ी पकती है. यहां तक कि आंगनबाड़ी केंद्र में न तो पेयजल की सुविधा है और न ही शौचालय है. शौचालय की टंकी के लिए बड़ा गड्ढा मेन गेट के पास करवा दिया गया है. उसमें न तो ढक्कन है और न ही चहारदीवारी है. हजारीबाग-चुरचू मुख्य पथ के किनारे यह केंद्र है. ऐसे में वाहनों की चपेट में आने का बच्चों पर खतरा मंडराता रहता है.

दबंग है सेविका और उनके पति, भय से ग्रामीण रहते हैं खामोश

ग्रामीणों ने दबी जुबां से कहा कि इस आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका और उसके पति दबंग हैं. व्यवस्था से संबंधित कुछ पूछने या समस्या बताने पर वे लोग डांट-फटकार लगाते हैं. गाली-ग्लौज के साथ मारपीट तक की नौबत आ जाती है. ऐसे में ग्रामीण खामोश रहना ही उचित समझते हैं. पदाधिकारियों के पास भी शिकायत ले जाने पर डरते हैं. वैसे यहां कई लोग दलित परिवार से ताल्लुक रखते हैं और उनमें जागरुकता का भी अभाव है. यह भी नहीं जानते कि समस्याएं किसे बताएं.

नामांकित बच्चों पर उठाया सवाल

कई ग्रामीणों ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र में 23 बच्चे नामांकित दिखाए गए हैं. लेकिन उपस्थिति नगण्य रहती है. आधा दर्जन से अधिक बच्चे नहीं आते. कई ग्रामीण कहते हैं कि यहां अधिकांश बच्चे फर्जी तरीके से नामांकित हैं.

गर्भवती महिलाओं को नहीं मिलता कोई लाभ : नागेश्वरी देवी

[caption id="attachment_580619" align="alignleft" width="196"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/03/nageshwari-devi_275-298x300.jpg"

alt="नागेश्वरी देवी" width="196" height="197" /> नागेश्वरी देवी[/caption] गांव की नागेश्वरी देवी कहती हैं कि गर्भवती महिलाओं को सरकार की ओर मिलनेवाला कोई लाभ नहीं दिया जाता है. खिचड़ी बनानेवाला बर्तन भी काफी गंदा रहता है. कभी-कभी तो बच्चों को उल्टी तक हो जाती है.

सेविका ने आरोपों को बताया बेबुनियाद

इस संबंध में सेविका कविता देवी से पूछे जाने पर उन्होंने पहले टालमटोल किया, फिर बताया कि मंगलवार को वह एक फेयरवेल में गई थीं. सहायिका को प्रभार देकर गई थीं. यहां बच्चों को बढ़िया खाना दिया जाता है. उन पर लगाया गया आरोप बेबुनियाद है. 15 दिन से रसोई गैस खत्म हो गया है, इसलिए घर पर सिलेंडर रखे हैं. आंगनबाड़ी केंद्र में 23 बच्चे नामांकित हैं. उन्होंने हर दिन घर जाकर बुलाया जाता है. पानी, शौचालय आदि का अभाव है. जनवरी में बच्चों को स्वेटर दिया गया था. ड्रेस मिला नहीं है और न बच्चों को बैठाने के लिए फर्नीचर हैं. [wpse_comments_template]

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