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इन 9 पुलों को बालू माफियाओं ने कर दिया खोखला, कांची पुल की तरह कभी भी हो सकते हैं जमींदोज

खनन नहीं रुका तो एक-दो साल से ज्यादा नहीं टिकेंगे उच्चस्तरीय पुल

Satya Sharan Mishra

Ranchi: झारखंड की नदियों पर बने 9 पुलों को बालू माफियाओं ने खोखला कर दिया है. दामोदर, स्वर्णरेखा, कोयल, शंख जैसी नदियों पर बने उच्चस्तरीय पुल कभी भी कांची पुल की तरह जमींदोज हो सकते हैं. इनमें से अधिकांश नये पुल हैं, लेकिन पिलरों से सटाकर जिस तरह बालू निकाला जा रहा है, उससे नहीं लग रहा कि ये पुल एक-दो साल से ज्यादा चल पायेंगे. पुल टूटने के बाद इसे बनाने वाले ठेकेदार, इंजीनियर और सरकार पर उंगली उठेगी. गुणवत्ता पर सवाल उठेंगे और फिर जांच होगी. इनमें से अधिकांश पुल पिछली रघुवर सरकार के समय बनाये गये हैं. अपने कार्यकाल में बने पुलों की हालत देखकर रघुवर कह रहे हैं कि पुलों को गिराकर उनकी सरकार को बदनाम करने की कोशिश हो रही है.

सालहन पुल (अनगड़ा)

रांची के अनगड़ा में स्वर्णरेखा नदी पर बने नये सालहन पुल को भी बालू माफियाओं ने दीमक की तरह चाट डाला है. पिलर के चारों तरफ से बालू निकालकर 63 करोड़ की लागत से बने पुल को खतरे में डाल दिया है. पूर्व सीएम रघुवर दास के समय इसका निर्माण हुआ था. 800 मीटर लंबा यह पुल हजारीबाग रोड, इरबा, पुरुलिया रोड और गोंदलीपोखर को जोड़ता है.

देखें वीडियो

सुदामडीह पुल (धनबाद)

धनबाद के सुदामडीह में बने नये पुल के सभी पिलरों को आसपास से बालू निकालकर खोखला कर दिया गया है. जेसीबी लगाकर लगातार बालू की खुदाई की जा रही है. हर दिन 100 ट्रैक्टर बालू निकाला जा रहा है. यह पुल गिरा तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता है. साथ ही धनबाद और बोकारो जिला का संपर्क इस पुल के टूटने से खत्म हो जाएगा.

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कौलेश्वरी पुल (चतरा)

चतरा के हंटरगंज में निरंजना नदी पर बने कौलेश्वरी पुल के नीचे से हर रोज 50 ट्रैक्टर से ज्यादा बालू का खनन हो रहा है. कौलेश्वरी पुल के पिलर्स से सटा कर बालू उठाव किया जा रहा है. उठाव भी पोकलेन मशीन के माध्यम से हो रही है. इसकी वजह से पिलर कमजोर हो गये हैं. कौलेश्वरी पुल प्रखंड के पूर्वी भाग की बड़ी आबादी की लाइफलाइन है. इसके क्षतिग्रस्त हो जाने से बड़ी आबादी देश के बाकी हिस्सों से कट जायेगी.

तेलमच्चो पुल (धनबाद)

धनबाद के बाघमारा प्रखंड के तेलमच्चो स्थित दामोदर नदी पर बने पुल के नीचे हर दिन बालू का खनन हो रहा है. हर दिन 100 से ज्यादा गाड़ियों से बालू उठाकर बाहर भेजा जा रहा है. महुदा थाना के चेकपोस्ट से काफी पास इस पुल को भी बालू माफियाओं ने खोखला कर दिया है. पुल के एक तरफ जेसीबी से नदी में खुदाई कर हाइवा व ट्रकों से बालू भेजा जा रहा है, जबकि दूसरी ओर कुछ फासले पर ट्रैक्टरों से उठाव हो रहा है. कभी भी पुल ध्वस्त हो सकता है.

खेतको पुल (बेरमो)

बोकारो जिले के बेरमो के खेतको में दामोदर नदी के पुल के नीचे से दिन-रात बालू माफिया बालू निकाल रहे हैं. पिलर से सटा पूरा बालू निकाल लिया गया है. हर दिन 100 ट्रैक्टर से ज्यादा बालू निकाला जा रहा है. अब पिलर का निचला तल्ला दिखने लगा है. स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कई बार आवाज उठाई, लेकिन अवैध खनन जारी है.

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माहिल पुल (खूंटी)

खूंटी के मुरहू प्रखंड के माहिल गांव में नदी पर बने पुल की नींव भी बालू माफियाओं ने कमजोर कर दी है. पिलर के चारों तरफ से बालू निकाल लिया गया है. खतरे को भांपते हुए फिलहाल पुल पर भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी गई है, लेकिन बालू की खुदाई पर रोक नहीं है. बालू माफियाओं और खनन विभाग के अफसरों की ऐसी सांठगांठ है कि जब भी टीम छापेमारी के लिए निकलती है. अवैध खनन का काम बंद रहता है.

दुआरी पुल (चतरा)

चतरा के ही दुआरी नदी पर बने पुल को भी बालू माफियाओं ने खोखला कर दिया है. रात में भी यहां बालू का उठाव होता है. 50 ट्रैक्टर से ज्यादा बालू हर दिन उठाया जा रहा है. पिलर से सटाकर खनन करने की वजह से पुल कमजोर हो चुका है. पिलर की जमीन दिखने लगी है. वहीं लगातार बालू लदे ट्रकों के गुजरने से पुल कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो चुका है.

शंख पुल (गुमला)

गुमला के रायडीह प्रखंड के मरियमटोली और केमटे के बीच बहने वाली शंख नदी से बेरोक-टोक बालू का अवैध उठाव किया जा रहा है. पुल का पिलर धंस चुका है. कहीं-कहीं तो पिलर तीन-चार फीट नीचे भी धंस जा रहा है. ऐसे में पुल के स्लैब भी खिसक जा रहे हैं. इसकी वजह से पिलर का फाउंडेशन कमजोर होकर ढह रहा है.

मुहाने पुल (इटखोरी)

इटखोरी के मुहाने पुल के नीचे से अवैध तरीके से बालू का खनन किया जा रहा है. पुल के नीचे पिलर की बुनियाद के पास जमा हुए बालू पर खनन माफिया की नजर लग गई है. पिलर के पास बालू बचा ही नहीं है. कई जगहों पर पिलर में दरार आ चुकी है. यहां से बालू खनन कर हजारीबाग, बरही, चौपारण, रामगढ़ और अन्य कई शहरों तक ले जाया जाता है.

क्यों होता है पुल के पिलरों के पास से खनन

इंजीनियरों के मुताबिक बारिश के दिनों में नदी के तेज बहाव के साथ बालू बह कर पिलर से टकराता है, फिर वहीं पर जमा हो जाता है. यह प्रक्रिया हर दिन होती है. इस वजह से पिलर के पास बड़ी मात्रा मे बालू का जमाव होता है और उसकी क्वालिटी भी अच्छी होती है. ऐसे में नदी के अन्य हिस्सों को छोड़ ज्यादा फोकस पिलर के पास जमे बालू के ही उठाव पर होता है.

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