प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों से अपील की है कि अगले एक साल तक वह सोना ना खरीदे. विदेशी मुद्रा (डॉलर) को बचाना है. वैसे तो देश की करीब 90-95 प्रतिशत आबादी की औकात सोना खरीदने की बची ही नहीं है. लेकिन जो 5-10 प्रतिशत लोग खरीद सकते हैं, वह उनकी अपील को मानेंगे, इस पर संदेह है. क्योंकि ऐसा ना तो पहले कभी हुआ है, ना आगे होगा. ना 1962 में, ना 2013 में और ना अब होगा.
देखा जाये तो यह जो सोना का रोना है, वह इस सरकार की दो-तीन मास्टर स्ट्रॉक का ही असर है. सरकार यह तो कहती रही है कि सोना कम खरीदे. लेकिन दूसरी तरफ ऐसे-ऐसे नियम बनाती रही, समझौते करती रही, जिससे लोगों को सोना खरीदने को प्रोत्साहन मिलता रहा. खुद सरकार की रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) और बैंक पिछले कुछ सालों से रिकॉर्ड सोना खरीद रही है.
अब जरा हाल के वर्षों की सरकारी नीतियों को समझिये. सरकार ने 2016 में गोल्ड बांड लाया. देश के लोगों ने 72000 करोड़ रुपये का बांड खरीद लिया यानी, इतने गोल्ड सरकार को खरीदने पड़े. आठ साल के लिए लाये गये इस बांड का भुगतान अब सरकार के लिए सिर दर्द बना हुआ है. याद रखिये, इस योजना को सरकार के लोगों और मीडिया ने मास्टर स्ट्रॉक बताया था.
फिर मोदी सरकार का दूसरा मास्टर स्ट्रॉक (सरकार के लोगों व मीडिया ने यही बताया) आया. सरकार ने यूएई के साथ एक समझौता किया. इसके तहत यूएई से भारत सिर्फ एक प्रतिशत की टैक्स देकर सोना खरीद सकती है. पहले साल 50 टन सोना आया, दूसरे साल 150 टन और तीसरे साल 210 टन सोने की आयात एक प्रतिशत टैक्स देकर किया गया. यानी सरकार ने सोने की आयात को प्रोत्साहित किया. सरकार अब इस समझौते की समीक्षा करने वाली है.
यही नहीं सरकार ने ईटीएफ की इजाजत दी. ईटीएफ यानी सोने का ट्रेड. बिल्कुल शेयर की तरह. मतलब सोना आपको फिजिकल तो नहीं मिलेगा, लेकिन आप सोने के मालिक हैं. आप जितना ईटीएफ खरीदेंगे, संबंधित कंपनी को उतना ही सोना रिजर्व में रखना होगा. आज यह बाजार तकरीबन 12 हजार करोड़ की है. सरकार ने ईपीएफ के पैसे भी ईटीएफ में लगाने की छूट दे दी.
सरकार ने सोना खरीद को हतोत्साहित करने के लिए उसके आयात पर लगने वाले टैक्स को छह प्रतिशत से बढ़ा कर 15 प्रतिशत कर दिया है. सोने के आयात को कंट्रोल करने के लिए पहले की सरकारों (1962, 1992 व 2013 में) ने भी तीन बार ऐसा किया है. और हर बार हुआ उल्टा है. सोने की तस्करी बढ़ गयी है.
दरअसल, सरकार ने हर तरह से फिजिकल और वर्चुअल तरह से सोना की खरीद को प्रोत्साहित करने का काम किया. इसके लिए नीतियां बनायीं और अब अपील कर रही है कि सोना नहीं खरीदें. इसके पक्ष में तर्क भी दिये जा रहे हैं और बहुत सारे लोग सहमत भी हैं इससे. यह भी तो एक मास्टर स्ट्रॉक ही है.

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