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युवाओं को कॉकरोच कहने वाले CJI के पास सुनने का वक्त नहीं, दिलचस्पी नहीं

जी हां. छात्रों पर बर्बर पुलिस लाठीचार्ज को देखने-सुनने का वक्त उनके पास नहीं हैं. उनके पास वक्त हो भी तो कैसे, वो वही हैं, जो युवाओं को कॉकरोच समझते हैं. जिनकी वजह से कॉकरोच जनता पार्टी अस्तित्व में आया. जिससे करोड़ों छात्र जुड़ते चले गए. और आज हजारों छात्र दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं.
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जी हां. छात्रों पर बर्बर पुलिस लाठीचार्ज को देखने-सुनने का वक्त उनके पास नहीं हैं. उनके पास वक्त हो भी तो कैसे, वो वही हैं, जो युवाओं को कॉकरोच समझते हैं. जिनकी वजह से कॉकरोच जनता पार्टी अस्तित्व में आया. जिससे करोड़ों छात्र जुड़ते चले गए. और आज हजारों छात्र दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं.


प्रधानमंत्री-गृहमंत्री सदन में आ नहीं रहे हैं. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो नहीं रहा है. और छात्रों के आंदोलन को लाठियों से कुचला जा रहा है. पुलिसिया कार्रवाई के नाम पर युवतियों के साथ दुर्व्यवहार की तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया पर हैं. लेकिन हमारे सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के पास यह सब सुनने का ना वक्त है. ना ही इसमें दिलचस्पी है.


ये वही चीफ जस्टिस हैं, जिन्होंने पश्चिम बंगाल में मेडिकल छात्रा के साथ हुई निर्मम घटना के बाद छात्रों के आंदोलनों पर सुनवाई की थी. पश्चिम बंगाल की तत्कालीन सरकार को कटघरे में खड़ा किया था. लेकिन वहां तक अलग मौसम था आज दिल्ली में अलग मौसम है. इसलिए उनके पास सुनने-देखने का वक्त नहीं है.


एक तरह से देखा जाये तो आज छात्रों का जो आंदोलन चल रहा है, इन सबके पीछे चीफ जस्टिस का वह वक्तव्य ही है, जिसमें उन्होंने बेरोजगार युवाओं को कॉकरोच बताया था. इसी के बाद करोड़ों कॉकरोचों का पहले सोशल मीडिया पर और फिर सड़क पर आंदोलन चल रहा है. छात्र हर हाल में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं.


जेन जी की इस पीढ़ी ने यह बता दिया है कि वह सिर्फ रीलबाज नहीं है. उन्हें समझ में आ गया है रील बनाना रोजगार नहीं है. उन्हें यह भी समझ में आ गया है कि सत्ता और सिस्टम असल में युवाओं के खिलाफ है. सत्ता को सिर्फ वोट चाहिए. ना उन्हें शिक्षा की चिंता है, ना ही रोजगार की. इन सबके बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुप हैं. वैसे वह हर उन मुद्दों पर चुप ही रहते हैं, जो नाजुक होता है. इस बार तो सुप्रीम कोर्ट ने भी देखने-सुनने से इंकार कर दिया.

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