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30 साल पुराने हत्या मामले में तीन आरोपी हाई कोर्ट से बरी, मिली थी उम्र कैद

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने करीब 30 साल पुराने हत्या के एक मामले में तीन आरोपियों को बरी कर दिया है. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने कहा कि तीनों अपीलकर्ताओं के खिलाफ हत्या का सामूहिक इरादा साबित नहीं होता है. इनके खिलाफ आरोप संदेह से परे प्रमाणित नहीं हुए.
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  •  - धनबाद ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द.

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने करीब 30 साल पुराने हत्या के एक मामले में तीन आरोपियों को बरी कर दिया है. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने कहा कि तीनों अपीलकर्ताओं के खिलाफ हत्या का सामूहिक इरादा साबित नहीं होता है. इनके खिलाफ आरोप संदेह से परे प्रमाणित नहीं हुए. 

 

दरअसल, धनबाद के ट्रायल कोर्ट ने सभी आरोपियों को वर्ष 2003 में IPC की धारा 302/34 के तहत दोषी मानते हुए मई 2003 में उम्रकैद की सजा दी थी. हाईकोर्ट ने धनबाद ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द कर तीनों आरोपियों केदार राम, हृदय राम और विजय राम को बाइज्जत बरी  कर दिया.

 

मामला क्या था

यह मामला 27 मई 1995 का है, जिसमें रामायण राम की मारपीट के दौरान गंभीर चोट लगने से मौत हो गई थी. आरोप था कि मुख्य आरोपी किशुन राम ने लोहे की रॉड से सिर पर वार किया अन्य आरोपी केदार राम, हृदय राम और विजय राम लाठी लेकर मौजूद थे.

 

हाईकोर्ट ने क्या कहा 

हाईकोर्ट ने साक्ष्यों और गवाहों के बयान की गहराई से जांच की और पाया कि मुख्य वार केवल किशुन राम ने किया था, जिससे मौत हुई अन्य तीन आरोपी सिर्फ मौके पर मौजूद थे, उनके द्वारा कोई स्पष्ट हमला साबित नहीं हुआ. दो गवाहों के बयान में भी इन तीनों के खिलाफ ठोस भूमिका नहीं दिखी. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से स्पष्ट हुआ कि घातक चोट सिर पर लोहे की रॉड से लगी थी. बाकी चोटें गिरने से भी हो सकती थीं, लाठी से नहीं. मुख्य आरोपी किशुन राम की मृत्यु हो चुकी है, इसलिए उसका अपील पहले ही समाप्त हो गया था. बरी किए गए आरोपी पहले से जमानत पर थे, अब उनके बेल बांड भी खत्म कर दिए गए.

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