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धनबाद में तीन जन औषधि केंद्र, सबके सब बेहाल

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Dhanbad : धनबाद (Dhanbad)  धनबाद में गरीब मरीजों को सस्ती दर पर जेनरिक दवा उपलब्ध कराने के लिए जन औषधि केंद्र खोले गए थे. फिलहाल शहर में तीन जन औषधि केंद्र हैं, जिनमें एसएनएमएमसीएच और तोपचांची में 1-1 जेनेरिक दवा दुकान किसी तरह चल रही है. हालांकि केंद्र में दवा बहुत ही कम मात्रा में है.

डॉक्टर लिखते हैं ब्रांडेड कंपनियों की दवा

शहीद निर्मल महतो मेमोरियल कॉलेज अस्पताल के सभी ओपीडी के बाहर मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव मिल जाएंगे. डॉक्टर मरीजों से ज्यादा इन मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव से मिलते रहे हैं. ये रिप्रेजेंटेटिव दवाओं की लिस्ट और कंपनियों के नाम डॉक्टर को देते नजर आ जाएंगे. परंतु अस्पताल प्रबंधन कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहा है. डॉक्टर यहां खुलकर ब्रांडेड कंपनियों की दवाएं लिख रहे हैं. यही वजह है कि गरीब मरीजों को महंगी दवाएं मेडिकल दुकानों से खरीदनी पड़ती हैं.

              जीवन रेखा ट्रस्ट चलाता है दवाई घर

[caption id="attachment_415717" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/09/davai-ghar-300x235.jpeg"

alt="" width="300" height="235" /> ट्रस्ट की ओर से संचालित दवाई घर[/caption] जीवन रेखा ट्रस्ट की तरफ से जेनेरिक दवा केंद्र खोला गया है, जो दवाई घर के नाम से ट्रस्ट द्वारा संचालित एकमात्र जेनेरिक मेडिसिन दुकान है. जल्द ही गोविंदपुर में दूसरी दुकान खोलने की योजना है. जीवन रेखा ट्रस्ट के सचिव राजीव शर्मा ने बताया कि बाजारों में हर मॉलिक्यूलर की अलग-अलग ब्रांडेड दवा है. इस ब्रांडेड दवा की तुलना में जेनरिक दवाएं लगभग पांच से दस गुनी तक सस्ती होती हैं. जेनरिक दवाएं उत्पादक से सीधे रिटेलर तक पहुंचती हैं. इन दवाओं के प्रचार-प्रसार पर कंपनियों को कुछ खर्च नहीं करना पड़ता. एक ही कंपनी की ब्रांडेड और जेनेरिक दवा के मूल्य में काफी अंतर होता है. चूंकि जेनरिक दवाओं के मूल्य निर्धारण पर सरकारी अंकुश होता है, इसलिए वह सस्ती होती हैं. ब्रांडेड दवाओं की कीमत कंपनिया खुद तय करती हैं, इसलिए वह महंगी होती हैं. यह भी पढ़ें:  धनबाद:">https://lagatar.in/dhanbad-man-of-two-of-the-water-tank-in-egyarkund-did-not-get-honorarium-for-6-months/">धनबाद:

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