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देवघर रोप-वे हादसे के तीन साल बाद भी दोषियों पर नहीं हो सकी कार्रवाई

Ranchi : देवघर रोप-वे हादसा हुए तीन साल से अधिक का समय गुजर गया. लेकिन अब कर इस मामले में दोषी पाये गये लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है. घटना के आपराधिक पहलू के आधार पर दर्ज प्राथमिकी में पुलिस अब तक बड़े लोगों के खिलाफ जांच ही कर रही है.  जांच कब तक जारी रहेगी, इसकी कोई समय सीमा तय नहीं है.

 

दामोदर रोप-वे एंड इंफ्रा लिमिटेड(DRIL) से 9.11 करोड़ रुपये दंड की वसूली के मामले में दायर मनी सूट में JTDC ने एक साल बाद याचिका का Defect दूर किया और सुनवाई के लिए तीन लाख रुपये कोर्ट फीस जमा करने के बाद DRIL को नोटिस जारी करने का अनुरोध किया.

 

देवघर रोप-वे (त्रिकूट पर्वत) दुर्घटना 10 अप्रैल 2022 को हुई थी. इसमें तीन लोगों की मौत हो गयी थी. मामले की गंभीरता के देखते हुए सरकार ने जांच की जिम्मेवारी सेंट्रल मैकेनिकल इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट( CMERI) को सौंपी थी.

 

जांच रिपोर्ट में कई तकनीकी खामियां पायी गयी थी. इन खामियों के आधार पर DRIL को दुर्घटना के लिए जिम्मेवार माना गया था. साथ ही DRIL के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने का फैसला किया गया था. 

 

सरकार ने DRIL पर 9.11 करोड़ रुपये का दंड लगाया. इसे वसूलने की जिम्मेवारी झारखंड पर्यटन विकास निगम (JTDC) को सौंपी. JTDC ने दंड की वसूली के लिए DRIL के खिलाफ 4 अक्टूबर 2024 को मनी सूट दायर किया. इसमें कई खामियां थीं.

 

न्यायालय के बार-बार इन खामियों को दूर करने का आदेश दिये जाने के बावजूद JTDC ने मनी सूट की खामियों को दूर करने में एक साल से अधिक समय लगाया. Defects दूर करने के बाद JTDC ने कोर्ट फीस के रूप में तीन लाख रुपये जमा किया और प्रतिवादी DRIL के खिलाफ नोटिस जारी करने का अनुरोध किया.

 

इस अवधि में DRIL ने हाईकोर्ट में कई बार राज्य सरकार के फैसले को चुनौती दी. हालांकि उसे हर बार हार का सामना करना पड़ा. DRIL की ओर से हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं मे CMERI की जांच रिपोर्ट को गलत करार देने और खुद को निर्दोष साबित करने की कोशिश की गयी.

 

देवघर रोप-वे दुर्घटना में तीन लोगों की मौत के सिलसिले में 12 अप्रैल 2022 को प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. पुलिस ने मामले में दो साल की जांच के बाद सिर्फ विनीत सिन्हा के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया. विनीत सिन्हा रोप-वे का ऑपरेटर है.

 

पुलिस ने 12 जून 2024 को समर्पित आरोप पत्र में लिखा कि त्रिकूट साइट के मालिक सहित अन्य बिंदुओं पर जांच जारी है. उल्लेखनीय है कि इसके बाद से पुलिस से पूरक आरोप पत्र दायर नहीं किया है. 

 

देवघर त्रिकूट रोप-वे से जुड़े तथ्य

- राइट्स ने रोप-वे की लागत 6.14 करोड़ रुपये बतायी थी.

- राइट्स ने वर्ष 2005 में दामोदर रोप-वे एंड कंस्ट्रक्शन कंपनी को रोप-वे निर्माण का काम दिया.

- निर्माण पूरा करने के बाद राइट्स ने 21 जुलाई 2009 को रोप-वे पर्यटन विभाग को सौंप दिया.

- 21 अगस्त 2008 को रोप-वे को चलाने के लिए झारखंड टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन को सौंपा.

- कॉरपोरेशन ने रोप-वे के मेंटेनेंस के लिए दामोदर रोप-वे एंड कंस्ट्रक्शन के साथ 11 जनवरी 2021 को इकरारनामा किया.

- 10 अप्रैल 2022 को दुर्घटना की वजह से रोप-वे चलना बंद हो गया औऱ 59 लोग रास्ते में ही फंस गये.

- राहत कार्य के लिए सेना के जवानों ओर वायु सेना की मदद ली गयी.

- 10 लोगों को जिला प्रशासन ने बचाया, बचाव कार्य के दौरान दो यात्रियों की मौत हो गयी.

- पर्यटन विभाग ने 19 अप्रैल 2022 को दुर्घटना की जांच का आदेश दिया.

- जांच समिति ने सरकारी प्रयोगशाला (सेंट्रल मैकेनिकल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट) से जांच कराने का फैसला किया.

- CMERI की जांच में कई तकनीकी खामियां पायी गयीं. जांच रिपोर्ट के आधार पर DRIL को दोषी मानते हुए दंजडात्मक कार्रवाई का फैसला किया गया.

 

 

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