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गोड्डा में टिबड़ेवाल ने सरकारी जमीन हड़पी- बेची, करोड़ों की कमाई की

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  • सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा करोड़ों की अवैध कमाई की, रियल इस्टेट में किया इन्वेस्ट
  • फर्जी दस्तावेज पर सरकारी डमीन की जमाबंदी कराने व सादे पट्टे पर जमीन बेचने वालों को जिला प्रशासन ने किया चिह्नित
  • 208 चिह्नित लोगों को नोटिस भेज जमीन के दस्तावेज के साथ पक्ष रखने को कहा गया
Pravin Kumar/ Amit Singh Ranchiगोड्डा में सरकारी जमीन हड़पने वालों, फर्जी दस्तावेज पर जमाबंदी कराने वालों, सादा पट्टा पर जमीन बेचने वालों को जिला प्रशासन चिह्नित कर रहा है. जिला प्रशासन ने ऐसे लोगों को नोटिस भेज कर जमीन से संबंधित दस्तावेज के साथ पक्ष रखने को कहा है. जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, जिले के महगामा अंचल के विभिन्न मौजा में सरकारी जमीन हड़पने वालों में कैलाश टिबड़ेवाल और उनके परिवार के सदस्यों की अंतरलिप्तता है. लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई के मूड में जिला प्रशासन भी नहीं है. टिबड़ेवाला का नाम जैसे ही सामने आता है, प्रशासन के अफसर और कर्मचारी सकते में आ जाते हैं. क्योंकि सबसे ज्यादा सरकारी जमीन की अवैध जमाबंदी कैलाश कुमार टिबड़ेवाल और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर है. अवैध जमाबंदी का खेल भू माफियाओं, अफसरों और कर्मचारियों की मिलीभगत से हुआ है. प्रशासन के अधिकारी कैलाश टिबड़ेवाल पर हाथ डालने से इसलिए परहेज कर रहे हैं कि कहीं सरकारी जमीन की लूट में उनकी या उनके मातहत कर्मचारियों की मिलीभगत की पोल न कुल न जाए.

11 कंपनियों में डायरेक्टर है टिबड़ेवाल, अरबों का है इन्वेस्टमेंट

सरकारी जमीन की अवैध जमाबंदी के खेल से संबंधित प्रशासन ने जो रिपोर्ट उपर के अधिकारियों को आगे की कार्रवाई के लिए भेजी है, उस रिपोर्ट में बताया गया है कि कैलाश कुमार टिबड़ेवाल का मुख्य कारोबार कोलकाता में है. वर्तमान में कैलाश टिबड़ेवाल 11 कंपनियों में डायरेक्टर हैं. गोड्डा के महगामा के विभिन्न अंचलों में सरकारी जमीन बेचकर अरबों की अवैध कमाई से टिबड़ेवाल ने कई कंपनियां खोल रखी हैं. जांच एजेंसियों को भेजे गए शिकायत पत्र में बताया गया है कि जिन कंपनियों में कैलाश टिबड़ेवाल डायरेक्टर है, उन सभी कंपनियों की जांच होनी चाहिए. जांच में पता चल जाएगा कि कैसे बहुत कम समय में कैलाश टिबड़ेवाल ने आधा दर्जन से ज्यादा कंपनियों में करोड़ों का इन्वेस्ट किया है. खबर जारी करने से पहले कैलाश टिबड़ेवाला से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गयी. मगर उनसे बात नहीं हो पायी. गोड्डा में कैलाश टिबड़ेवाला का काम देखनेवाले दिलीप टिबड़ेवाल ने भी उनसे बात कराने से इनकार कर दिया. बताया जाता है कि दिलीप भी कैलाश का चचेरा भाई ही है, लेकिन खुद को बतौर मुंशी पेश कर सवाल-जवाब से बचता रहता है.

मुंशी बन कर चचेरा भाई देख रहा है जमीन का काम

गोड्डा में कैलाश टिबड़ेवाल ने जमीन सहित अन्य मामलों को देखने के लिए अपने परिवार के सदस्यों और करीबियों को नियुक्त कर रखा है. खुद को मुंशी बताने वाला दिलीप टिबड़ेवाल कैलाश का चचेरा भाई है. राजधानी रांची में भी कैलाश टिबड़ेवाल के कई परिचित और सगे संबंधी है, जिनका कारोबार है. शिकायत करने वालों ने बताया है कि सरकारी जमीन के अवैध कारोबार से ताबड़तोड़ कमाई कर टिबड़ेवाला ने रांची और कोलकाता की कई कंपनियों में करोड़ों का इन्वेस्टमेंट किया है. महगामा में जमीन का काम देखने के लिए टिबडेवाल ने आधा दर्जन लोगों को नियुक्त कर रखा है. ऐसे लोगों की भी संपत्ति की जांच हो जाए, तो पता चलेगा कि बहुत कम समय में टिबड़ेवाल के साथ-साथ ये लोग भी अचानक करोड़पति कैसे बन गए.

टिबड़ेवाला से से जो भी सटा, बन गया करोड़पति

कैलाश टिबड़ेवाल एवं टिबड़ेवाल परिवार के जो भी सदस्य बाहर रहते हैं, उन सभी के काम दिलीप टिबड़ेवाल ही देखता है. दिलीप टिबड़ेवाला का मुख्य काम है पुलिस, प्रशासन एवं असामाजिक तत्वों, सफेदपोशों को मैनेज करना. कच्चे लेनदेन का ब्याज तसील करना भी उसका काम है. वहीं जमीन से संबंधित मामलों को मुख्य रूप से श्रवण यादव देखता है. अभी श्रवण यादव भी करोड़पति है. महगामा में जयकांत यादव ट्रस्ट की देखरेख करता है. वह टिबड़ेवाला का लठैत है. उसके खिलाफ महागामा थाने में लगभग आधा दर्जन केस दर्ज हैं. कई मामलों की पुलिस जांच कर रही है. जयकांत यादव पर उसके छोटे भाई की पत्नी ने भी केस कर रखा है और इस मामले में वह बेल पर है. ये सारे के सारे लोग महगामा में कैलाश कुमार टिबड़ेवाला के लिए काम करते हैं. इनका सारा खर्च भी कैलाश टिबड़ेवाल ही दिलीप टिबड़ेवाल की मदद से वहन करता है.

टिबड़ेवाल नहीं बता पा रहे किस जमींदार के वंशज हैं

महगामा अंचल के विभिन्न मौजा में फर्जी दस्तावेज के सहारे सरकारी जमीन की अवैध जमाबंदी कराने वाले कैलाश टिबड़ेवाल सरकार को यह नहीं बता पा रहे हैं कि वह किस जमींदार के वंशज हैं. जबकि उन्होंने खुद को जमींदार का वशंज बता कर सैकड़ों बीघा सरकारी जमीन की अवैध जमाबंदी करा ली है. सरकारी जमीन की अवैध बंदोबस्ती का खेल 80 के दशक से चला आ रहा है.

शातिर ऐसा कि तीन सरकारी स्कूल में जुड़वा लिया नाम

जिला प्राशासन की रिपोर्ट के अनुसार, कैलाश टिबडे़वाल व उसके परिवार के के सदस्यों ने पहले सरकारी जमीन हड़पी. फिर उसी जमीन को दान कर दिया. सरकारी दस्तावेज में जमीन दान कर टिबडे़वाल परिवार अफसरों की नजर में पाक साफ हो गया. इसके बाद टिबडे़वाल परिवार ने जमीन दान देने के एवज में बसुआ मौजा में खुलने वाले तीन सरकारी स्कूलों के नाम में भी टिबडे़वाल परिवार के लोगों का नाम जुड़वा दिया. यानी स्कूल का नाम टिबडे़वाल परिवार के सदस्यों के नाम पर हो गया. इन तीन स्कूलों के नाम हैं- बनारसी देवी, देवी प्रसाद कन्या उच्च विद्यालय, श्रीमोहन आदर्श मध्य विद्यालय और जयनारायण उच्च विद्यालय. शिकायत करनेवालों ने बताया है कि पूरे मामले की अगर एजेंसी निष्पक्ष जांच करे, तो सरकारी जमीन का बहुत बड़ा घोटाला सामने आएगा.

अब ईडी-सीबीआई को भी दस्तावेज सौंपने की तैयारी

गोड्डा के महगामा अंचल में करोड़ों-अरबों रुपये की सरकारी जमीन की अवैध जमाबंदी कराने के साथ ही साथ खरीद-बिक्री मामले की जांच को लेकर प्रवर्तन निदेशालय व सीबीआई से भी शिकायत करने की तैयारी कर ली गयी. सरकारी जमीन लूट के मामले में जिला प्रशासन की रिपोर्ट व फर्जीवाड़ा के सारे दस्तावेज के साथ आवेदन ईडी व सीबीआई को सौंपी जाएगी. [wpse_comments_template]

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